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गर्भावस्था का छठा हफ्ता – 6th week of pregnancy in Hindi

गर्भावस्था का छठा सप्ताह में प्रवेश करने का मतलब है कि आप पहली तिमाही आधी पार कर चुकी हैं। निश्चित रूप से बच्चे की वृद्धि और विकास होता है जिस कारण आपके शरीर में भी अनेकों परिवर्तन होते हैं। इस सप्ताह से, पेट के आकार में भी परिवर्तन आता है। गर्भवती महिला को इस दौरान गर्भावस्था के सभी लक्षण महसूस होने लगते हैं। और प्रेगनेंसी की सभी जांचों का भी सकारात्मक परिणाम आता है। 

छः हफ्ते की गर्भवती महिला के शरीर में होने वाले बदलाव – Body changes when 6 weeks pregnant in Hindi

जैसे जैसे बच्चे का विकास होता है आपको महसूस होने वाले लक्षणों में भी बढ़ौतरी होती है। जैसे आपको जल्दी जल्दी मूड बदलने, खाद्य पदार्थों के प्रति लालसा, मॉर्निंग सिकनेस, थकान, वजन बढ़ना, स्तनों में छूने पर दर्द का अनुभव होना और मतली आदि लक्षण महसूस होंगे। 

गर्भावस्था के ये लक्षण आपके बच्चे के बढ़ने के साथ साथ और तेज़ी से महसूस होंगे। इनको ख़त्म तो नहीं किया जा सकता लेकिन कुछ उपायों द्वारा इनको कम ज़रूर किया जा सकता है। पहली तिमाही के दौरान कई महिलाओं का वज़न लगभग 2 किग्रा. तक बढ़ जाता है। लेकिन कई महिलाएं गर्भावस्था के पहले छह सप्ताह के दौरान उलटी और मतली के कारण कई का वजन कम भी हो जाता है। 

हालांकि इसमें चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि सभी महिलाओं की शारीरिक रचना अलग प्रकार की होती है और सभी को गर्भावस्था के दौरान वजन से सम्बंधित अलग अलग प्रकार का अनुभव होता है।
ज्यादातर महिलाएं गर्भावस्था में डॉक्टरी जांच के लिए पहली बार छठे सप्ताह में ही जाती हैं। डॉक्टर उनका अल्ट्रासाउंड करेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि माता और बच्चे का स्वस्थ्य ठीक है या नहीं। और इस अल्ट्रासाउंड टेस्ट में विकासशील भ्रूण की पहली झलक भी देखने को मिलती है।

छः हफ्ते की गर्भावस्था में भ्रूण का विकास – Baby development in 6th week of pregnancy in Hindi

छठे सप्ताह में, आपके बच्चे में होने वाले परिवर्तन जैसे कान, मुंह और नाक में होने वाले विकास आपको अल्ट्रासाउंड में दिखाई देने लगेंगे। प्रमुख बदलाव और अल्ट्रासाउंड इन आसानी से चुन सकते हैं। आँखें और नथुने (Nostrils) भी बनने लगते हैं जो अल्ट्रासाउंड में काले बिंदुओं के रूप में दिखाई देते हैं।

आपके बच्चे के हाथ और पैर आकार लेने लगते हैं और अपने जोड़ों से बाहर निकलने लगते हैं। शिशु के दिल की धड़कन 100-160 बीट्स प्रति मिनट अर्थात वयस्क मनुष्य की तुलना में दोगुनी होती है।
रक्त परिसंचरण होने लगता है और फेफड़े, आतें, लिवर और अग्न्याशय (Pancreas) सभी का निर्माण हो रहा होता है। बच्चा लगभग ¼ इंच लंबा एक दाल के दाने जैसा दिखाई देता है।
छह हफ्ते की प्रेगनेंसी में, बच्चा कुछ गतिविधियां करने में सक्षम हो जाता है लेकिन ये गतिविधियां इतनी शांत और धीमी होती हैं कि गर्भवती महिला को अकसर इनका पता नहीं चलता। 

छः हफ्ते के गर्भ का अल्ट्रासाउंड – Ultrasound 6th week pregnancy in Hindi

विकासशील भ्रूण की इस 3डी (3D) छवि में आप पिछले सप्ताह की तुलना में एक बड़ा बदलाव देख सकती हैं। बच्चा गर्भ के अंदर ही अंदर गर्भनाल के चारों ओर अपनी स्थिति बदलता रहता है और छवि में उसका सर दायीं ओर ऊपर दिखाई देता है। हाथ और पैरों के विकसित होने के स्थान पर छोटे छोटे उभार दिखाई देने लगते हैं। 

छठे सप्ताह के गर्भधारण के लिए टिप्स – Week 6 pregnancy tips in Hindi

छठे सप्ताह के दौरान भोजन के सम्बन्ध में सावधानी बरतना अत्यंत महत्वपूर्ण है सिर्फ इसलिए कि आप गर्भवती हैं इसका मतलब यह नहीं है कि आपको दो लोगों की खुराक खाने की आवश्यकता है।
प्रति दिन केवल 300 अतिरिक्त कैलोरी का सेवन करने की कोशिश करें। और अपना वजन अधिक न बढ़ने दें उसपर नियंत्रण रखें। इसके अलावा, एक बार में अधिक भोजन करने के बजाय थोड़ी थोड़ी मात्रा में दिन में तीन बार भोजन करें साथ में स्नैक्स भी खाती रहें। इससे आपको मॉर्निंग सिकनेस को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी, जो अधिकतर खाली पेट होने पर होती है। 

पहले तिमाही से ही भविष्य की योजना करना भी ज़रूरी होता है। इनमें आप अपने साइज के बढ़ने के अनुसार कपड़ों का चुनाव कर सकती हैं या अगर आप घर पर सिलना चाहें तो खुद भी तैयार कर सकती हैं। हालांकि इनकी ज़रूरत आपको अभी नहीं होगी। कम से कम 12वें हफ्ते के अंत तक वज़न बढ़ने पर आपको इनकी आवश्यकता होगी। 

प्रेगनेंसी के छठे हफ्ते का डाइट प्लान – Diet plan for 6 week pregnancy in Hindi

गर्भावस्था अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण शब्द है और गर्भावस्था का कोई भी हफ्ता अपने आप में प्रमुख होता है। गर्भवती महिला को अन्य सावधानियों के साथ साथ अपने आहार  सावधानी बरतने की ज़रूरत होती है। 

इस दौरान बच्चे के अंगों का विकास बहुत तीव्रता से होता है। आपको फोलिक एसिड, विटामिन्स, खनिज, प्रोटीन आदि का सेवन पर्याप्त मात्रा में करना चाहिए।
अपना खाना समय पर और उचित मात्रा में सभी पोषक तत्वों को शामिल करते हुए खाएं। रोटी, चावल, ज्वार-बाजरा, मक्का आदि का सेवन करें।
प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन करें।
थकान और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए तरल पदार्थों का सेवन पर्याप्त मात्रा में करती रहें। 
कैफीन युक्त पदार्थों का सेवन कम करें।