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साइनस क्या है और इसके घरेलु उपचार

साधारण जुखाम से अलग , साइनस मे तेज सिरदर्द, आखों मे जलन और गले के दर्द का तेज अनुभव होता है l सही समय पर उपचार ना किया जाये तोह यह दिमागी बुखार या दिमाग के सुजन मे बदल सकता है और जानलेवा बन जाता है l

साइनस मे नाक के पीछे की ग्रंथियों मे बैक्टीरिया से पस जमा हो जाता है l सही समय पर उपचार साइनस मे बेहद ज़रूरी है , साइनस को डॉक्टर्स एंटीबायोटिक्स देके उसका उपचार करते है और समस्या अधिक गंभीर हो जाने पर ऑपरेशन करने की भी ज़रूरत पढ़ती है l

आइये जानते है साइनस से बचने के कुछ उपाय:

हल्दी दूध साइनस की परेशानी में जल्दी असर दिखाता है। हल्दी की एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज साइनस के बैक्टीरियल इन्फेक्शन को खत्म करने में बहुत असरदार है।

विटामिन C से भरपूर फल जैसे संतरा , अंगूर, नींबू का सेवन साइनस की समस्या को दूर करता है।

विटामिन E का सेवन साइनस को कम करने में मदद करता है इसके लिए अपनी डाइट में बादाम , अखरोट, अलसी, तिल,और कोल्ड प्रेस्ड वेजिटेबल ऑयल का प्रयोग करें।

अदरक , लोंग या काली मिर्च , तुलसी की पत्ती डालकर चाय बनाकर पियें। इससे साइनस में तुरंत राहत मिलती है।

नारियल पानी ,दही, पपीता का सेवन साइनस की समस्या को कम करने में काफी उपयोगी होता है ये सभी खाद्य पदार्थ हैल्दी म्यूकस के बनने में मदद करते है जिससे इन्फेक्शन जल्दी ठीक हो सकता है।

लहसुन में मौजूद एलिसिन एन्जाइम साइनस के बैक्टीरिया और वायरस को खत्म करता है।

गाजर में मौजूद पोषक तत्व साइनस को ठीक करने में काफी असरदायक होते हैं। इसके लिए आप रोज़ 1 गिलास गाजर का जूस या चुकंदर – खीरे – पालक के जूस के साथ मिलकर पियें

आयुर्वेद में भाप लेना फेफड़ो की कई बीमारियों के उपचार में प्रयोग किया जाता रहा है । आयुर्वेद के मत अनुसार पेपरमिंट और यूकेलिप्टस की भाप लेने से साइनस में काफी राहत मिलती है।

मेथी के बीजों को उबालकर बनाए गए पेय में शहद की कुछ बूंदों को डालकर चाय बनाए और उसका सेवन साइनस में एक अचूक इलाज साबित होगा।

योग के फायदे यूँ तो जग जाहिर है किन्तु साइनस में योग करने से शरीर को साइनस से बचाया जा सकता है।  साइनस के बचाव में प्राणायाम सबसे कारगर देखा गया है।

साइनस के उपचार मे घरेलु उपाय सिर्फ एक हद तक ही अपनाये जा सकते है l समस्या की जड़ को खत्म करने मे चिकित्सक के परामर्श से बेहतर कुछ नहीं

टेंशन को कम कैसे करें

तनाव , आजकल की प्रमुख समस्याओ में से एक है । इसके वैसे तो कई कारण हैं पर प्रमुख कारण देखा जाए तो वह है चीज़ों का हमारे अनुरूप ना होना। जैसे हम चाहते हैं वैसा न होना।

पहले के समय में लोग परिवार के साथ ही अपने अड़ोस पड़ोस में रहने वालो की भी परवाह करते थे, लेकिन आज के समय में प्राइवेसी की महत्ता इतनी बढ़ गयी है कि आदमी पड़ोस तो दूर उसके घर के सदस्यों की ज़िन्दगी में क्या चल रहा है इसका भी उसे अंदाजा नहीं । प्राइवेसी एक हद तक तो ठीक है मगर अति सर्वत्र वर्जयेत अतः बच्चो बड़ो सभी को प्राइवेसी देने की साथ ही जरुरी है कि उनकी लाइफ से रूबरू हुआ जायें

परिवार में नियम बनायें कि कम से कम एक वक़्त के खाना सभी साथ बैठ कर खाएं। इससे आप या घर का कोई भी सदस्य यदि टेंशन में है उससे बात करके उसकी प्रॉब्लम को समझा जाए। इस समय यह ध्यान देना भी जरूरी है की कोई ऐसी बात न की जाए जिससे उसे दुःख हो या पछतावा हो उस समय उसे सम्बल की जरूरत होती है। उसे टेंशन का कारण पूछें और उस समस्या को दूर करने के विकल्प सोचने में मदद करें।

फैमिली के साथ शेयर करें – तनाव होने पर अपने फैमिली के साथ उस बात को शेयर करें , इससे उस प्रॉब्लम का सोल्युशन तो मिलेगा ही साथ में फैमिली बॉन्डिंग और भी मजबूत होगी। बच्चों को भी यह भरोसा होगा की लाइफ में कोई भी उलझन हो उसे अपनी फैमिली के साथ डिसकस करना है उसे छुपाना नहीं है।

अपने लिए समय निकाले – सुबह जल्दी जागें , अपने साथ कुछ वक़्त बिताएं प्रकृति की खूबसूरती निहारें पक्षियों के कलरव को सुनें कुल मिलाकर अपनी सुबह में अपने आप कि कंपनी को एन्जॉय करें व्यर्थ के तनाव को त्यागकर केवल पॉजिटिव ही सोचें

आध्यात्म का साथ – हम कितने भी मॉर्डन हो जाएँ लेकिन अपनी जड़ो को नहीं नकार सकते । आध्यात्म से जुड़ें ,चाहे जो भी धर्म मानते हों कुछ देर उस एक शक्ति के बारे में सोचें ध्यान लगाएं गहरी साँसे लें और अपने खुशनुमा पलों के बारे में सोचे सुबह के ये 10 मिनट आपका दिन खुश रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

सोशल बने – केवल अपना ही न सोचते रहें दूसरों को भी देखने की भी कोशिश करें ।दूसरों के हाल जाने। दोस्त भले कम बनाएं, लेकिन अच्छे दोस्त बनाएं।शेयर करें,समाधान तलाशें लेकिन तनाव को अपने आप पर हावी ना होने दें।

अच्छा सोचें – माना कि आपके जीवन में समस्याएं हैं लेकिन तय माने कि जीवन है तो समस्याएं हैं समस्याएं हैं तो समाधान भी हैं बस जरुरत है कि वक़्त को थोड़ा वक़्त दें कई बार समस्याएं खुद ही सॉल्व हो जाती हैं समय के साथ , बस समय को भी थोड़ा समय दें ।

वर्चुअल वर्ल्ड से दूरी बनाएं – फेसबुक , इंस्टाग्राम ,टवीटर आदि सभी साइट्स पर दुसरो कि देखा देखि और बराबरी करने से बचें हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएँ तनाव से दूर रहें और जितना हो सके समस्यायों से अकेले जूझने के बजाये शेयर करें।

समस्या अधिक लगने पर चिकित्स्कीय परामर्श ही आखरी विकल्प है ।

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अनिद्रा

आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में फिट रहना बहुत ज़रूरी है और फिट रहने के लिए सही खानपान के साथ साथ अच्छी नींद लेना बहुत महत्वपूर्ण है। नींद हमें शारीरिक रूप से रिलैक्स करने में मदद करती है, साथ ही साथ हमारे दिमाग को भी व्यवस्थित करती है इसीलिए यदि आप रात में अच्छी और भरपूर नींद लेते है तो इसका असर आपके पूरे दिन में पड़ता है। आप सारा दिन एनर्जेटिक और फ्रेश फील करते है।

हममें से बहुत से लोग नींद ना आने की समस्या से ग्रसित हैं । नींद ना आने के कई कारण हो सकते है जैसे अनियमित दिनचर्या , सोने जागने का कोई रूटीन न होना , किसी तरह का तनाव होना , खान पान की गलत आदतों की वजह से , कैफीन या अल्कोहल के कारण, किसी ट्रीटमेंट या दवा के कारण।

अनिद्रा का एक बड़ा कारण हमारी गलत लाइफ स्टाइल भी है, जैसे सोने का समय निश्चित ना होना। एक निश्चित समय पर ना सोने से हमारे मस्तिष्क को रिलैक्स करने का समय नहीं मिल पाता। हम सभी जानते है की हमारा मस्तिष्क हमेशा काम करता रहता है और जब हम सोते है तब मस्तिष्क सारे दिन के डाटा को रिस्टोर और व्यवस्थित करता है। इसी वजह से सोने के बाद हमें अच्छा फील होता है और दिमाग अच्छे से काम कर पाता है।

कई बार किसी बात का तनाव या चिंता भी नींद ना आने का कारण होती है। आजकल तनाव होना बहुत आम है लगभग सभी आयुवर्ग में ये समस्या देखने को मिलती है बच्चो से लेकर बड़ो तक, सभी को किसी न किसी बात की चिंता रहती ही है पर अगर ये नींद पर असर डालने लगे तो इसे गंभीर माना जाना चाहिए।

खान पान की गलत आदतें भी कई बार अनिद्रा का कारण होती है। देर रात डिनर करना ,सोने के समय चाय कॉफ़ी का सेवन करना ।

खाना खाने के बाद हमारा डाइजेस्टिव सिस्टम सक्रीय हो जाता है और इस वजह से ब्रेन को नींद के लिए तैयार करने में देरी होती है।
इसी प्रकार चाय और कॉफ़ी में पाया जाने वाला कैफीन आपकी नींद में बाधा डाल सकता है। एक अध्ययन में यह भी पाया गया है कि कैफीन आपके बायोलॉजिकल क्लॉक के समय में देरी कर सकता है और इन प्रभावों से आपकी नींद का समय कम हो जाता है।

रात में स्क्रीन टाइम का ज्यादा होना भी अनिद्रा का एक मुख्य कारण है हममें से बहुत से लोगो को देर रात तक टीवी देखना या लैपटॉप में काम करना पसंद होता है इससे भी हमारे मस्तिष्क को जागते रहने के संकेत मिलते है जिससे नींद अच्छी नहीं आती है इसके अलावा देर रात तक मोबाइल में देखना या गेम खेलना भी अनिद्रा को बढ़ाता है।

इन सब बातो के अलावा कुछ मेडिकल कंडीशन्स में भी अनिद्रा की समस्या होने लगती है यदि आप किसी तरह के डिप्रेशन या अवसाद से जूझ रहे है या फिर आप कुछ दवाओं का सेवन कर रहे है तो भी अनिद्रा की समस्या हो सकती है। इस स्थिति में आपको डॉक्टर की सलाह की आवश्यकता होती है।

अब बात करते है कुछ आसान नुस्खों की जिनको अपनाकर आप अनिद्रा से काफी हद तक छुटकारा पा सकते है।

कमरे का तापमान – ख्याल रखें कि कमरे का तापमान सही हो , न तो बहुत अधिक और ना ही कम ,सोने के लिए कमरे का सही तापमान होना आवश्यक है।

आदतों में बदलाव – छोटी छोटी चीज़ो पर गौर करें , सोने से कम से कम 2 घंटे पहले डिनर कर लें । सोने का समय निश्चित करें और रोज उसी समय सोने का प्रयास करें।सोने से पहले गुनगुना दूध पीना भी अनिद्रा को दूर करने में सहायक होता है। सोने से पहले मुमकिन हो तो नहा लें या नहाना संभव न हो तो पैर धोकर सोने जायें ये नींद लाने में सहायक है।

सोते समय किसी भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट जैसे मोबाइल, लैपटॉप को अपने पास न रखे।
मोबाइल को लेके बिस्तर पर ना लेटें इससे भी नींद पर बुरा असर पड़ता है।

हल्का म्यूजिक सुने – वैज्ञानिको ने भी माना है कि हल्का म्यूजिक हमारे दिल दिमाग पर प्रभाव डालता है और नींद न आने पर ये चमत्कार सा असर करता है ।

सुगन्धित वातावरण – नींद न आ रही हो तो कमरे के वातावरण पर ध्यान दें सुगन्धित वातावरण भी अनिद्रा दूर करने में सहायक है ,इसके लिए नेचुरल आयल का यूज़ करें अगरबत्ती का प्रयोग भी एक अच्छा विकल्प है।

इसके अलावा मेडिटेशन और कुछ योग के रोजाना अभ्यास से भी हम अनिद्रा को दूर कर सकते है।