मोबाइल रेडिएशन के खतरे को कैसे कम करें

आज के समय में मोबाइल हम सब की अनिवार्य आवश्यकता बन गया है। हमारे लिए मोबाइल फ़ोन की जरूरत वैसे ही हो गयी है जैसे खाना और पानी। हमारा छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा काम आजकल हम अपने स्मार्ट फ़ोन से कर लेते हैं।

मोबाइल को बीसवीं सदी की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण खोज माना जा सकता है इसने न केवल हमारे काम को आसान बनाया है बल्कि हमारी बहुत सी जरूरतों को रिप्लेस कर दिया है। आपने ध्यान दिया होगा पहले के टाइम में लोगो को अलार्म घडी , कैलकुलेटर , टेबल पर एक छोटा सा कैलेंडर रखते हुए। आज के टाइम में इन सब के लिए आपका एक मोबाइल ही काफी है उसमे आप सब कुछ कर लेते है। मोबाइल फ़ोन के फायदे और खूबियों के बारे में हम सब जानते ही है पर क्या हम इनके डायरेक्ट और इनडायरेक्ट खतरों को जानते हैं।

एक अनुमान के मुताबिक हर साल लगभग सात मिलियन पक्षी मोबाइल टावर रेडिएशन से मारे जाते हैं । ये टावर टीवी और रेडियो का प्रसारण करते है और सेल फोन के सेलुलर नेटवर्क के लिए भी जरूरी होते हैं। कई बार इनसे रेयर बर्ड्स यानि दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों को भी नुक्सान होता है। रेडियोफ्रीक्वेंसी वेव्स, पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र यानि मैग्नेटिक फील्ड को डिस्टर्ब कर देती हैं, जिसका प्रयोग पक्षी अपने नेविगेशन के लिए करते हैं।

हाल के अध्ययनों से ये भी पता चलता है कि एक सेल फोन टॉवर और मोबाइल फोन हैंडसेट के रेडिएशन उत्सर्जन के कारण मधु मक्खियों पर भी दुष्प्रभाव हो रहे हैं। अधिकांश शोधकर्ताओं ने विकिरण प्रभाव यानि रेडिएशन के कारण मधुमक्खी में जैविक और व्यवहार संबंधी परिवर्तनों को भी बताया है।

स्पेन और बेल्जियम में हुए अध्ययनों ने पक्षियों पर सेल फोन मास्टर्स द्वारा उत्सर्जित इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन (ईएमआर) के दुष्प्रभाव को बताया है, पंजाब यूनिवर्सिटी में एक टीम द्वारा किये गए एक अध्ययन में पाया गया है कि ईएमआर पक्षी के अंडे और भ्रूण को नुकसान पहुंचा सकता है।

पक्षियों और एनवायरमेंट को बचाने के लिए हम कुछ कदम उठा सकते है जिससे उनपर रेडिएशन के खतरे को कम किया जा सके जैसे –

  • मल्टीपल सिम कार्ड्स का प्रयोग को कम करें क्योंकि ज्यादा सिम कार्ड्स के कारण ज्यादा रेडिएशन होता है।
  • निर्धारित सीमा से अधिक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन का उत्सर्जन करने वाले टावरों का निरीक्षण करें और गवर्मेंट इसे कम करने का प्रयास करें।
  • हर शहर में स्थापित किए जाने वाले टॉवर की अधिकतम संख्या को सीमित किया जाना चाहिए।

कुछ चिकित्सा उपकरणों यानि मेडिकल इक्विपमेंट जैसे पेसमेकर, इम्प्लांटेबल डिफिब्रिलेटर, के प्रयोग के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करने की सलाह दी जाती है ऐसा इसलिए क्योंकि इससे उनके संचालन यानि ऑपरेशन में व्यवधान उत्पन्न होने की संभावना होती है।

कुछ देशों ने उड़ान के दौरान विमानों पर केवल लाइसेंस प्राप्त मोबाइल फोन के इस्तेमाल को ही अनुमति दी हुई है ऐसा इसलिए है क्यूंकि मोबाइल फ़ोन्स के सिग्नल विमान के कम्युनिकेशन सिग्नल में बाधा डाल सकते हैं।

यह तो बात हुई की मोबाइल और मोबाइल टावर के रेडिएशन से हमारे आसपास क्या फर्क पड़ रहा है , अब बात करते हैं की इसके रेडिएशन का हमारी हैल्थ पर क्या प्रभाव हो रहा है ।

सेल फोन उपयोग के समय नॉन आयोनाइज़्ड रेडिएशन को उत्सर्जित यानि एमिट करते हैं। सेल फोन द्वारा उत्सर्जित रेडिएशन के प्रकार को रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) ऊर्जा भी कहा जाता है। यदि आरएफ रेडिएशन काफी अधिक है, तो इसका एक ‘थर्मल’ प्रभाव होता है, जिसका अर्थ है कि यह शरीर के तापमान को बढ़ाता है।

हालाँकि नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट का यह मत है की वैसे तो इस बात को कोई ठोस सबूत नहीं मिला है की नॉन आयोनाइज़्ड रेडिएशन से मनुष्यों में कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। फिर भी फोन द्वारा उत्सर्जित आरएफ रेडिएशन के निम्न स्तर से सिरदर्द या ब्रेन ट्यूमर जैसी समस्याएं हो सकती हैं ।

इस रेडिएशन के ह्यूमन ब्रेन यानि मानव मस्तिष्क पर पड़ने वाले प्रभाव को जानने के लिए वैज्ञानिकों ने कई रिसर्च की है, जिसमे ब्रेन एक्टिविटी में कुछ बदलाव , रेस्पॉन्ड टाइम यानी प्रतिक्रिया समय और नींद के पैटर्न पर इसके साइड इफेक्ट्स को पाया गया है।

सभी मोबाइल फ़ोन के रेडिएशन की मात्रा उस फ़ोन के मॉडल के आधार पर अलग अलग होती है। आप इसे स्पेसिफिक अब्सॉर्प्शन रेट यानि SAR के माध्यम से नाप सकते है। आपके फ़ोन की SAR वैल्यू जितनी कम होती है उससे उतना ही कम रेडिएशन होता है।

आप यूएसएसडी कोड * # 07 # डायल करके अपने स्मार्टफोन के SAR के संदर्भ में रेडिएशन लेवल की जांच कर सकते हैं, यदि एसएआर 1.6 वाट प्रति किलोग्राम (1.6 W/Kg) से नीचे दिखाता है तो यह ठीक है अन्यथा आपको अपना स्मार्टफोन तुरंत बदलने की सलाह दी जाती है।

मोबाइल फ़ोन के रेडिएशन के साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए हम कुछ महत्वपूर्ण बातो को ध्यान में रख सकते है जैसे –

  • जब नेटवर्क कम हो या बैटरी कम हो तब मोबाइल फ़ोन का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्यूंकि इस समय मोबाइल से रेडिएशन कई गुना ज्यादा एमिट होता है। इसलिए फ़ोन को चार्ज करके ही बात करें।
  • कॉल करते समय स्पीकरफ़ोन या हेडसेट का उपयोग करें।
  • अपना फ़ोन अपने शरीर के पास न रखें, जैसे कि जेब में न रखें।
  • मोबाइल को लेकर न सोएं , मोबाइल को कभी भी अपने तकिया के नीचे या सिरहाने न रखें।
  • कॉल लगाने के बाद कुछ सेकण्ड्स रुक कर मोबाइल को कान में लगाए, क्यूंकि मोबाइल कॉल कनेक्ट करने के पहले काफी इन्टेन्स रेडिएशन एमिट करता है और कनेक्ट होने के बाद इसकी तीव्रता कम हो जाती है।
  • जितना हो सके मोबाइल को एयरप्लेन मोड पर रखें। जैसे रात में मोबाइल को एयरप्लेन मोड में रख कर सोएं।
  • चार्जिंग के दौरान मोबाइल पर बात न करें क्योंकि ऐसे में मोबाइल से निकलने वाला रेडिएशन लेवल 10 गुना तक बढ़ जाता है।
  • यदि आप फ़ोन को अपनी जेब में वाइब्रेट मोड में रखते हैं तो यह आपके शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। कुछ रिसर्च में यह साबित हुआ है कि इसके कारण सिर में दर्द, पेट की समस्याओं और संतुलन में समस्या आने का खतरा बढ़ जाता है। लम्बे समय तक कंपन यानि वाइब्रेशन से tendons, मांसपेशियों, हड्डियों और जोड़ों में परिवर्तन हो सकते हैं, और यह तंत्रिका तंत्र यानि नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं। इसको हैंड-आर्म वाइब्रेशन सिंड्रोम (एचएवीएस) के रूप में जाना जाता है।
Subscribe

इम्युनिटी बढ़ाने के 10 असरदार तरीके

हमारे हैल्दी और फिट रहने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है हमारे इम्यून सिस्टम का स्ट्रांग होना। आजकल हमारी लाइफस्टाइल , बिज़ी रुटीन के चलते कई बार हमारा ध्यान इस तरफ जाता ही नहीं की हमारी बॉडी को कैसे और किन किन चीज़ों की कमी हो जाती है और इसके बारे में हमे तब पता चलता है जब हमे कोई हैल्थ प्रॉब्लम होने लगती है।

हम जानते ही है की हमारी बॉडी का अपना एक पूरा सिस्टम होता है जो किसी भी इन्फेक्शन या एलर्जी होने पर उसको पहचान कर उसे ठीक कर लेता है, पर यह तभी संभव होता है जब हमारे शरीर में सभी जरूरी मिनरल्स और विटामिन्स समुचित मात्रा में मौजूद हो। इसके अलावा कई और भी ऐसे फैक्टर्स होते है जो हमारे इम्यून सिस्टम को प्रभावित करते हैं।

अब बात करते है उन तरीको की जिनसे हम अपने इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग बना सकते है और कई तरह की बीमारियों और इन्फेक्शन्स से खुद को बचा सकते है।

अपनी डेली डाइट में फ्रूट्स को जरूर शामिल करें। फलों में हमारे लिए आवश्यक कई मिनरल्स और विटामिन्स होते है जो हमारे शरीर में होने वाली अनेक महत्वपूर्ण क्रियाओं के लिए बेहद जरूरी होते है। सेब यानि एप्पल , कीवी, संतरा , पाइनएप्पल , नाशपाती , पपीता जैसे फलों में इम्यून बूस्टिंग प्रॉपर्टीज होती है जो हमारे शरीर को अनेक संक्रमणों से बचाने में सहायक होते है।सभी रंग की सब्जियों को अपने डाइट में शामिल करें। सब्जियां विटामिन ए, बी 6, और विटामिन सी, फोलेट, मैग्नीशियम, फाइबर, राइबोफ्लेविन, फास्फोरस और पोटेशियम से भरपूर होती है। इसके साथ ही उनमें कई विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो हमारे इम्यून सिस्टम के लिए काफी फायदेमंद होते हैं।

विटामिन सी एक पावरफुल एंटीऑक्सिडेंट होता है . इसके अलावा यह काफी सारे सेलुलर फंक्शन्स में भाग लेकर इम्यून डिफेन्स में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विटामिन C युक्त खाद्य पदार्थ जैसे आँवला, संतरा , मोसम्मी, निम्बू में अच्छी मात्रा में पाया जाता है। निम्बू पानी को यदि विटामिन C के लिए ले रहे है तो इस समय इस बात का ध्यान देना जरूरी है की इसे गर्म करने पर विटमिन नष्ट हो जाता है। इसके अलावा fermented फूड्स और सलाद का प्रयोग जरूर करें।

जिंक, हमारे इम्यून सिस्टम और मेटाबोलिक फंक्शन में मदद करता है। इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग बनाए रखता है और शरीर के ऊतकों को बढ़ाता और मरम्मत करता है। यह 300 से अधिक एंजाइमों के कार्यों के लिए आवश्यक है और शरीर में कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में शामिल रहता है। क्योंकि ज़िंक हमारे शरीर में स्टोर नहीं रहता है इसलिए इसे डेली डाइट में लिया जाना बेहद जरूरी होता है। इसके स्त्रोतों की बात करें तो यह साबूत अनाज , डेरी प्रोडक्ट्स जैसे दूध , पनीर , फोर्टिफाइड अनाजों , बीन्स , पालक , मशरूम , फलियों में , अंडे , कद्दू के बीजों , तिल के बीजो में , ड्राई फ्रूट्स में , डार्क चॉकलेट में पाया जाता है।

एंटी इंफ्लामेटरी फूड्स जैसे लहसुन , अदरक , हल्दी , पुदीना , काली मिर्च , दालचीनी का प्रयोग करें। इनका प्रयोग हम सूप , काढ़े या चाय के रूप में भी कर सकते हैं। इनमे मौजूद एंटी एक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टी के कारन यह इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग बनाते है और इन्फेक्शन को जल्दी खत्म करने में मदद करते हैं।

प्रोटीन युक्त डाइट लें – अपनी डाइट में उन चीज़ों को जरूर शामिल करे जिनसे प्रोटीन मिलता है। जैसे दूध और दूध से बने पदार्थ जैसे दही , पनीर , अंडा , मीट , मछली, दालें, बीन्स । इनसब के सेवन से शरीर में प्रोटीन की कमी नहीं होती और बॉडी अपना डेवलपमेंट और रिपेयर का काम आसानी से कर पाती है।

हमारा शरीर विटामिन डी खुद ही बनाता है इसके लिए हमे धूप यानि सन लाइट की जरूरत होती है। हालाँकि विटामिन डी किसी प्लांट प्रोडेक्ट में ज्यादा नहीं पाया जाता इसीलिए इसकी कमी होने पर हमे सप्प्लीमेंटस लेने होते हैं जो की हमे डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेना चाहिए। फिर भी कुछ फ़ूड प्रोडक्ट ऐसे है जिनमे यह पाया जाता है जैसे टूना फिश , साल्मन फिश , मशरूम्स।

पर्याप्त पानी पियें , हाइड्रेट रहें – जिससे बॉडी को डेटॉक्स करने में आसानी होती है और सभी मेटाबोलिक क्रियाओ के सुचारु रूप से चलने में मदद मिलती है। इसके साथ ही सुबह खाली पेट निम्बू या शहद डालकर हल्का गुनगुना पानी भी इम्यून सिस्टम को एक्टिवेट करता है।

नींद पूरी लें – ऐसा करने से ना सिर्फ हमारा शरीर रिलैक्स होता है बल्कि और भी ज्यादा बेहतर तरीके से इन्फेक्शन्स और टॉक्सिन्स को पहचानकर खत्म करता है। इसके अलावा नींद अच्छी लेने से बॉडी में स्ट्रेस हार्मोन्स का लेवल कम होता है जिससे इम्यून सिस्टम स्ट्रांग बनता है।

वर्क आउट जरूर करें – इसके लिए कम से कम 20 मिनट वॉक, योग या एक्सरसाइज जरूर करे इससे हमारी बॉडी का स्टैमिना बढ़ता है और इम्युनिटी में भी सुधार होता है।

जंक फ़ूड , बहुत ज्यादा मिर्च मसाला और तला हुआ और पैक्ड फ़ूड का प्रयोग कम से कम करें। इनसब से हमारे शरीर में फ्री रेडिकल्स की मात्रा बढ़ती है जो इन्फेक्शन और बीमारियों की मुख्य वजह होती है। इसके अलावा धूम्रपान और बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फ़ूड का प्रयोग भी इम्यून सिस्टम को कमजोर बनाता है।

इन सबके साथ ही कुछ इम्युनिटी बूस्टर ड्रिंक्स भी बनाये जा सकते हैं इनके सेवन से सामान्य सर्दी खासी के अलावा कुछ वायरल इन्फेक्शन्स में भी ये काफी इफेक्टिव होते है।

जैसे गुनगुने पानी में एक चुटकी काली मिर्च और आधा चम्मच हल्दी डाल कर पीने से सर्दी जुकाम में राहत मिलती है।

एक गिलास पानी में एक चुटकी दालचीनी पाउडर , एक चौथाई यानि 1/4 चम्मच काली मिर्च , एक लौंग, तुलसी के पत्ते , थोड़ा सा अदरक डाल कर उसे तब तक उबाले जब तक पानी आधा न हो जाए। इसे छानकर इसमें थोड़ा सा शहद मिला कर पिया जा सकता है ।

गिलोय की पत्ती को उबालकर उसकी चाय भी इम्युनिटी बूस्ट करती है। इसके अलावा आप गिलोय का जूस का भी प्रयोग कर सकते हैं।

दूध में हल्दी डाल कर गर्म करके इसे रात में सोने से पहले पीने से कई तरह के इन्फेक्शन्स दूर करने में मदद मिलती है।

bacho ki immunity kaise badhaye, immunity system kaise majboot kare, immunity badhane ke liye gharelu nuskhe, immunity kaise badhaye ayush mantralaya, rog pratirodhak chamta in english, immunity badhane ki homeopathic medicine, corona mein immunity kaise badhaen, immunity badhane ke liye kya kya khaye, how to fight with coronavirus in hindi, immunity booster drink recipe in hindi, coronavirus se, mulethi for corona, baccho ki immunity badhane wale food, immunity badhane ke liye yoga, immunity badhane ki dawa, immunity badhane ka kadha , immune system kamjor hone ke lakshan, immunity kaise badhaye gharelu upay, #immunity kaise badhaye kya khaye, #immunity booster drink

Subscribe

9 Unique ways to activate subconscious mind

ऐसा कहा जाता है की हम जैसा सोचते हैं वैसे बन जाते है इसके पीछे कोई मैजिक नहीं है बल्कि साइंस है। दरअसल इसके लिए सबकॉन्शयस माइंड यानी अवचेतन मन जिम्मेदार होता है।

हमारा सबकॉन्शियस माइंड यानी अवचेतन मन एक तरह का डेटा-बैंक है, जो वो सभी सूचनाएं और इनफार्मेशन स्टोर करके रखता है जो हमारे चेतन मन यानी कॉन्शियस माइंड में नहीं है। यह हमारे विश्वासों, पिछले अनुभव, यादों, हमारे स्किल्स को स्टोर करता है। जो कुछ भी कभी भी हमने देखा है, किया है या सोचा है वह भी स्टोर रहता है।

अगर हम कहें की हमारा सबकॉन्शियस माइंड हमारे हर एक काम को चाहे वो हम जानबूझ कर करें या अनजाने में सभी को कण्ट्रोल करता है तो इसमें बिलकुल भी आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

हमारा सबकॉन्शियस माइंड कितना पॉवरफुल होता है इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं की यह हमारे ब्रेन पावर का 95% हिस्सा होता है और हमारे खाने और सांस लेने से लेकर याददाश्त बनाने तक बहुत सारी इनफार्मेशन को स्टोर रखता है। हम कितने लोगो से मिलते है बात करते है कितने सारे स्वाद और खुशबू और आवाजों को पहचानते हैं ये सभी सूचनाएं एक डाटा की तरह हमारे माइंड में स्टोर रहती है। माइंड जर्नल के अनुसार हमारा सबकॉन्शियस माइंड कॉन्शियस माइंड की तुलना में दस लाख गुना ज्यादा पावरफुल होता है।

अब अगर हम कॉन्शियस और सबकॉन्शियस माइंड के अंतर को समझना चाहें तो इसे हम ऐसे समझ सकते हैं चेतन मन यानी कॉन्शियस माइंड में हम अपनी और अपने आसपास की दुनिया की बाते रखते हैं जबकि अवचेतन मन में वो चीज़ें भी शामिल होती हैं जिन्हे हम वर्तमान में तो नहीं जानते पर जरूरत पड़ने पर उसे कॉन्शियस माइंड में ला सकते हैं। हमारे सबकॉन्शियस मांइड में यादें , हमारे डर और विश्वास रहते है। इसीलिए यह हमारे जाने अनजाने ही हम जीवन में क्या करते हैं सबकॉन्शियस मांइड इसका डायरेक्शन करता है। कई बार हम कुछ बिना सोचे समझे ही कुछ करते हैं तो उसका नियंत्रण हमारा अवचेतन मन ही करता है। इसका सीधा सा कनेक्शन यही है की हम जब कुछ भी सोच रहे होते हैं तो फीलिंग हमारे सबकॉन्शियस माइंड के डेटाबेस में स्टोर होती रहती है।

हमारा सबकॉन्शियस माइंड एक तरह से हमारे कम्फर्ट जोन का गेटकीपर है यानी यह वह क्षेत्र है जहां आप खुद के ऐसे गोल्स और टार्गेट्स को पूरा करने के लिये सोचते हैं और रेगुलर उस तरफ प्रयास करते हैं जो आपको लाइफ की सबसे बड़ी सक्सेस और ख़ुशी दिलाएगी। जीवन में बहुत बड़े पैमाने पर बदलाव लाने के लिए पहला कदम है उस इम्पॉसिबल चीज़ को पॉसिबल देखना।

अब बात करते हैं कैसे हम अपने सबकॉन्शियस माइंड को एक्टिव करके अपनी लाइफ में अभूतपूर्व और आश्चर्यजनक बदलाव ला सकते हैं इसके लिए हमे कुछ टेक्निक्स पर काम करना होगा जैसे –

खुद को सफल बनाने के बारे में सोचिये। खुद को खुश रखने के लिए काम कीजिये। यदि आप मन से दुखी या हताश होंगे तो यह आपके सबकॉन्शियस माइंड में स्टोर होगा। जैसे अगर कोई वीडियो या ऑडियो फाइल करप्ट हो जाती है तो कुछ साफ़ समझ नहीं आता यही लॉजिक हमारे सबकॉन्शियस माइंड में भी अप्लाई होता है इसलिए सबसे पहले खुद को रिलैक्स और पॉजिटिव बनाये और अपने लक्ष्य के याद रखें।

दूसरों के डर और शक को अपने ऊपर हावी न होने दें। जैसे अगर आप किसी को अपनी किसी बड़ी महत्वाकांक्षा के बारे में बताते हैं तो अलग अलग लोग उसमे अलग अलग प्रतिक्रिया देते है उदाहरण के लिए अगर आप किसी को अपने बहुत बड़े प्लान के बारे में बताते हैं तो कुछ लोग आपको उसमे होने वाली परेशानियों और चुनौतियों के बारे में बतायेगे और कुछ लोग अपनी फेलियर को आपके साथ शेयर करेंगे। अब आप के सबकॉन्शियस माइंड में दोनों तरह के विचार स्टोर हो जाएंगे और आप जिस को ज्यादा सोचेंगे वही इफेक्टिव बनने लगेगा।

खुद को सकारात्मक रूप से बढ़ाइए / खुद में पॉजिटिव बदलाव लाइए , अच्छा सोचिये। उन बातो और घटनाओं को रिकॉल न करें जो आपमें गुस्सा , तनाव या डर पैदा करती हैं। मोटिवेशनल और पॉजिटिव बुक्स पढ़ें। कुछ नया सीखिए और उन कामो की लिस्ट बनाकर काम करें जो आपके लक्ष्य के लिए जरूरी है।

उन बदलावों को सोचिये जो आज आपको लगता है ये कभी नहीं बदल सकता। न सिर्फ उनको सोचिये बल्कि उन बातों और चीज़ों को देखिये। जैसा आप सोच सकते हैं वैसा हो सकता है ये बिलकुल लॉजिकल है। जैसे अगर आपको कोई बदलाव करना है तो उस बदलाव को ऐसे सोचिये और देखिये जैसे वो आपके अनुसार हो गया हो।

अपनी सफलता को भविष्य में नहीं आज में सोचिये जैसे की आप कुछ करना चाहते हैं तो उसे मैं शायद किसी दिन ऐसा करूँगा ना कह कर मैं अभी इस काम को कैसे कर सकता हूँ उसको समझ रहा हूँ। मैं उस तरह उस जगह खुश रहूँगा सोचने के बजाये ऐसा सोचें में खुश हूँ और मुझे कुछ भी परेशान नहीं कर सकता। इस तरह आप अपने सबकॉन्शियस माइंड में ख़ुशी वाला डाटा स्टोर कर रहे होते हैं।

अपने प्रतिरोध को पहचाने – कई बार ऐसा होता है की हम जो भी करना या बनना चाहते हैं तो हमारा मन उसको करने से हमे रोकता है जैसे कोई बड़ा काम करने के पहले हमारे मन में कई कमजोर विचार आते हैं जैसे यदि कोई बहुत इम्पोर्टेन्ट प्रोजेक्ट या एग्जाम की तैयारी से पहले हमे इस तरह के ख्याल आते है की शायद मैं उतना केपेबल नहीं या मुझसे भी ज्यादा स्मार्ट और इंटेलीजेंट लोग वहां होंगे। ऐसे विचार हमे इसलिए आते हैं क्यूंकि हमारे अवचेतन मन में हमने खुद को कम समझ रखा है। इसके लिए खुद पर भरोसा करना है और मन को विश्वास दिलाना है की आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।

एक मास्टर प्लान बनाइये – पांच साल या दस साल के प्लान्स के बजाये एक मास्टर प्लान बनाएं। अपने आप से पूछें की आप वास्तव में क्या चाहते हैं आप किस तरह का जीवन या विरासत देखना चाहते हैं और उसके लिए अपनी योजनाएं बनाएं।

महत्वाकांक्षी, सहयोगी और क्रिएटिव लोगों के साथ रहिये। याद रखें कि आप सही मायने में वही बनेंगे, जिसके साथ आप सबसे अधिक समय बिताते हैं, इसलिए अपने आस पास किस तरह के लोग हैं उसपर ध्यान दीजिये। यदि आप अपने फ्री टाइम में ऐसे लोगों के साथ घूम रहे हैं, जो अपने जीवन से नाखुश हैं, तो आप पर भी निराशावादी भाव आने लगेगा।

अपने उस समय को प्रोडक्टिवली यूज़ करें जब आप कुछ फिजिकल वर्क कर रहे हों। जैसे जब आप कुकिंग या अपने सुबह के डेली कामों में लगे होते हैं उस समय कुछ मोटिवेशनल या पॉजिटिव एनर्जी वाले ऑडियो सुने। ऐसा करने से हम अपने सबकॉन्शियस माइंड में पॉजिटिव और मोटिवेटिंग थॉट्स स्टोर करते है जो धीरे धीरे हमारी सोच और पर्सनालिटी में आने लगता है। इसलिए इस बात के लिए हमेशा सचेत रहें की आप क्या सुन , पढ़ और देख रहें हैं।

इस तरह सबकॉन्शियस माइंड बेहद शक्तिशाली सिस्टम होता है जो हमारी लाइफ को लगभग हर तरह से नियंत्रित करता है और चलाता है। यही कारण है की किसी की सलाह या बात आपके जीवन को प्रभावित नहीं कर सकती जब तक आप उसको अपने सबकॉन्शियस माइंड में डाल नहीं देते। इसका मतलब है जब तक आप अपने अवचेतन मन में जब तक किसी बात को नहीं रखेंगे तब तक उसका अच्छा या बुरा प्रभाव आप पर नहीं होगा।

सफलता , खुशियाँ और एक अच्छी लाइफ स्टाइल को हासिल करने का सबसे पॉवरफुल तरीका है अपने कॉन्शियस और सबकॉन्शियस माइंड के बीच संवाद यानि कम्युनिकेशन को बढ़ाना।मैडिटेशन ऐसा करने में काफी मददगार होता है। इसके लिए हमें अपनी सोच को पॉजिटिव बनाने के साथ ही अपने डर , शंकाओं और सभी तरह के नेगेटिव थॉट्स को अपने अवचेतन मन से मिटाना होगा।

Q. How powerful is the subconscious mind?

Ans. माइंड जर्नल के अनुसार हमारा सबकॉन्शियस माइंड कॉन्शियस माइंड की तुलना में दस लाख गुना ज्यादा पावरफुल होता है।

Q. What is subconscious mind?

Ans. सबकॉन्शियस माइंड हमारी आदतों , धारणाओं , विश्वास , अनुभवों पर आधारित होता है यह लॉजिक्स के बजाये फीलिंग्स पर ज्यादा चलता है।

Q. How to activate subconscious mind .

Ans. subconscious mind can be activated through Meditation , Visualisation , repeat for results and some more techniques like focus on positive thoughts.

Subscribe

subconscious mind ko kaise jagaye , conscious mind meaning in english , cosmic consciousness in hindi, subconscious mind ki takat, dimag ki power , avchetan man kaise kaam karta hai, avchetan man ki shakti book, mind body relationship in hindi, what is subconscious mind, collective consciousness in hindi, avchetan man meaning in hindi , avchetan man meaning in english , power of mind book in hindi pdf, what is mind in hindi wikipedia, avchetan man kya hota hai , power of subconscious mind , avchetan ko vash me kare , avchetan man ko kaise jagrat kare , man ki shaktiya, subconscious mind facts in hindi, subconscious mind power secrets , subconscious mind
, subconscious mind meaning , yoga and the subconscious mind , powers of subconscious mind the secret , subconscious processing , how to access your superconscious mind, how to control subconscious mind of others , subconscious example, unconscious mind , subconscious mind quotes, define unconscious , hack subconscious mind, tricking the subconscious mind, subconscious mind manipulation, subconscious conversation , subconscious reprogramming hypnosis, repetition subconscious mind , subconscious mind training law of attraction , subconscious example sentence , examples of subconscious actions, 10 laws of the subconscious mind , conscious mind example , example of unconscious mind , speech on power of subconscious mind, mind power techniques pdf , mind power techniques book , mind power secrets, mind power blogs , mind power training, visualization is the key to success , how to bend the universe to your will,the keys to living in infinite possibility, how to explore the unconscious mind , meditation and subconscious healing , how to explore your mind