5 आदतें जो चर्बी घटाएं सिर्फ एक महीने में

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स्वस्थ और फिट रहने का सबसे बड़ा फायदा है एनर्जेटिक रहना .वजन बढ़ने और मोटापे की वजह से कई बीमारियों के साथ ही हमारा कॉन्फिडेंस भी कम हो जाता है और एनर्जी भी। जिसकी वजह से हमेशा थकान और कोई न कोई दर्द या समस्या बनी रहती है। इसलिए आज हम बात करते हैं उन आदतों की , जो आपको बिना किसी हैवी वर्कआउट के फैट बर्न करने में मदद करती हैं। इन आदतों से आप न सिर्फ और भी फिट होंगे बल्कि इससे आपका वजन भी कम करने में मदद मिलेगी।

पानी की मात्रा बढ़ा दें – पानी वैसे भी हमारे शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।एक सामान्य व्यक्ति को दिन में कम से कम 2 -3 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए। यह न सिर्फ बॉडी टेम्परेचर को रेगुलेट करता है बल्कि मेन्टल और फिजिकलहेल्थ को बनाये रखने में भी बहुत बड़ा रोल निभाता है। यदि आपका वजन ज्यादा है और आप मोटापे से परेशान हैं तो आपको ज्यादा पानी पीने की आदत डालनी चाहिए। इससे न सिर्फ शरीर हाइड्रेट रहता है बल्कि आपका BMR भी बढ़ जाता है। BMR कम होना वजन बढ़ने के मुख्य कारणों में से एक है।

पानी पर्याप्त मात्रा में पीने से बार बार खाने का मन नहीं होता। वजन बढ़ने की समस्या के कारण पर गौर करें तो हम देखेंगे की हम थोड़ी थोड़ी देर में कुछ न कुछ खाते रहते हैं,ऐसा जरूरी भी नहीं की जब आप भूखे हों तब ये फीलिंग आये , कई बार खाने के बाद भी हमारा कुछ खाने का मन करने लगता है और इस तरह की भूख में ज्यादातर हम कुछ मीठा खाने को ढूढ़ते हैं। इसका कारण यह है की जब हम पानी कम पीते हैं तो हमारे शरीर को खाने के बाद भी सैटिस्फैक्शन यानि तृप्ति नहीं होती जिससे हम और खाने के लिए प्रेरित होते रहते हैं। इसके लिए खाने के आधा घंटे पहले एक गिलास पानी पीने की आदत बनाएं।

फलों और सब्जियों को खाने में ज्यादा शामिल करें – फैट को कम करने के लिए ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियों और उन फलों का सेवन करना शुरू करें जिनमे पानी ज्यादा होता है। जैसे तरबूज , पपीता ,अनानास ,खरबूज ,संतरा , मोसम्मी , खीरा , गाजर , अमरुद। सब्जियों में लोकि ,तोरई , मेथी , पालक , करेला , ब्रोक्कली ज्यादा लें। यह सभी फैट बर्न करने में मदद करते हैं और पाचन संबंधी समस्याओं को कम करके पेट निकलने की प्रॉब्लम को सॉल्व करते हैं। खाने में जब भी मीठा खाने का मन हो तो चॉकलेट , आइसक्रीम या कुछ स्वीट्स खाने के बजाये कोई फल लें। इसके अलावा फलों की स्मूथीस और जूस बनाकर भी आप ले सकते हैं।

खाने के साथ बड़ी प्लेट में सलाद खाने की आदत डालें – खाने में फाइबर कम होने से कॉन्स्टिपेशन यानी कब्ज की समस्या होने लगती है। इसके लिए सलाद को खाने में शामिल करना बहुत जरूरी होता है। फाइबर एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करने के साथ ही ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है।

घर का बना खाना खाएं – पैक्ड फ़ूड और फ़ास्ट फ़ूड में आयल का ज्यादा प्रयोग और प्रोसेस्ड चीज़ों का ज्यादा प्रयोग करना वजन को अनहेल्दी तरीके से बढ़ाता है। इसके बजाए घर में खाना बनाने से आप उसमे तेल , मसाले और दूसरे इन्ग्रेडिएन्ट्स की मात्रा को अपने अनुसार रख सकते हैं। बाहर के खाने को सीमित करें कोशिश करें की ज्यादा से ज्यादा घर में बना खाना ही खाएं।

कुछ चीज़ों का सेवन रोक दें – अचार, सॉस, ज्यादा शक्कर ,चाय कॉफ़ी ,कोल्ड ड्रिंक्स , आईस्क्रीम और मेदे से बनी चीजों का सेवन कम करें। मीठे के लिए शक्कर की जगह गुड़ या शहद का प्रयोग करें। चाय कॉफ़ी के बजाए सुबह निम्बू शहद पानी या ग्रीन टी लें। स्नैक्स में मेदे से बनी चीज़ों की जगह अंकुरित अनाज या भुने चने या मूंगफली , या मिक्स वेज या फ्रूट सलाद को शामिल करें।

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आँखों की देखभाल कैसे करें

आँखें हमारे शरीर के बहुत महत्वपूर्ण अंगो में से एक है। आजकल की लाइफस्टाइल, बढ़ते प्रदूषण और व्यस्त दिनचर्या में आँखों का ख्याल रखना बेहद जरूरी हो गया है। लगातार लैपटॉप या कम्प्यूटर में काम , नींद पूरी न हो पाना, ज्यादा देर टीवी या मोबाइल स्क्रीन देखना , धूप में बिना सनग्लासेस के निकलना, कम लाइट में पढ़ना। यह कुछ प्रमुख कारण हैं आँखों में समस्या होने के।

उम्र बढ़ने के साथ आँखों का कमजोर होना नेचुरल है फिर भी कुछ आसान से उपाय से हम आँखों को हैल्दी रख सकते हैं। खान पान का ध्यान रख कर और कुछ सावधानियों को अपना कर हम कम उम्र में आँखों में होने वाली प्रोब्लेम्स को कम कर सकते हैं।

विटामिन A से भरपूर चीज़ें खाएं जैसे गाजर , चुकंदर, पपीता ,पालक, कद्दू, इसके अलावा अखरोट, बादाम , मूंगदाल , आँवला का सेवन भी आँखों को हैल्दी रखता है। धूप में निकलने से पहले सनग्लासेस लगाएं। अंधरे में मोबाइल न देंखे इसकी ब्लू लाइट आँखों को नुक्सान करती है। रेगुलर आँखों का चेकअप कराते रहें।

आँखों में सूखापन महसूस हो तो आँखों को मसलें नहीं , इसके लिए आँखों में गर्म सेंक या ठंडी सेंक लें। गर्म सेंक के लिए एक साफ़ मुलायम कॉटन का कपड़ा लें उसको गुनगुने पानी में डाल के अच्छे से निचोड़ लें। अब इस गर्म पानी की पट्टी को आँखे बंद करके पलको के ऊपर रखें। ऐसा करने से पलकों में मौजूद तेल ग्रंथियों से तेल आँखों में पहुँचता है और आँखों में ड्राइनेस से रहत मिलती है। ठंडी सेंक के लिए गुनगुने पानी के स्थान पर ठंडा पानी प्रयोग करते हैं। इसमें यह ध्यान देना है की बर्फ या आइस क्यूब को सीधे आखों में न रखें।

आँखों से पानी आना भी एक कॉमन समस्या है। वैसे तो यह किसी गंभीर बात का संकेत नहीं होता , फिर भी यदि इसके साथ आँखों में दर्द या चुभन है तो आपको जरूर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। यदि कोई दर्द नहीं है और सिर्फ आँखों से पानी आता है तो इसका कारण आँखों में कुछ चले जाना या कोई एलर्जी हो सकता है। इसके लिए आप गर्म या ठंडी सिंकाई ले सकते हैं।

इसके अलावा खीरा यानि कुकुम्बर की स्लाइस काट कर उसे आँखे बंद करके पलकों के ऊपर 15 मिनट के लिए रखें। खीरे में एंटी इंफ्लामेटरी और एनाल्जेसिक प्रॉपर्टी होती है जो आँखों की थकान और सूजन को कम करता है।

लौंग के तेल में एंटीसेप्टिक यौगिक होते है इसी कारण लौंग का प्रयोग भी आँखों से पानी आने की समस्या को दूर करने में किया जाता है। इसके लिए 2-3 लौंग को पानी में पीस कर उसे आँखों के आस पास लगाना है। ध्यान रखिये ये पेस्ट आँखों के अंदर न जाए। इसे दिन में एक बार से ज्यादा अप्लाई नहीं करना है।

दो बूँद टी ट्री आयल को एक चम्मच नारियल के तेल में मिलाकर रख लें। इसमें एक साफ़ कॉटन की रुई को भिगो कर उसे आँखों को बंद करके पलकों के ऊपर लगाए। टी ट्री आयल में एंटी बैक्टीरियल गुण होते है जिससे बैक्टीरिया खत्म होता है और आँखों में पानी आने से रहत मिलती है।

इसके अलावा आँखों की कुछ एक्सरसाइज भी होती हैं जिनको अपनाकर आप अपनी आँखों को स्वस्थ रख सकते हैं –

पलकों को बार बार झपकाएं। आँखों को खोले और बंद करें ऐसा 30 सेकंड करें, फिर थोड़ा रुकें , आँखों को आराम दें , फिर इसे 30 सेकंड दोहराए। ऐसा एक मिनट करें फिर आँखों को आराम दें। इससे आँखों की थकान दूर होती है।

एक जगह आरामदायक स्त्थिति में बैठ जाए और सामने देखें और सामने देखते हुए ही अपनी गर्दन को धीरे धीरे दायीं ओर से बायीं तरफ घुमाये और फिर बायीं से दायीं ओर घुमाये , ध्यान रखें इस पूरे टाइम आपको सामने ही देखना है। ऐसा करने से आँखों की एक्सरसाइज होती है और आँखों से संबंधित कई समस्याओं से रहत मिलती है। इस एक्सरसाइज को रोज 2 मिनट करिये।

सामने देखें और सामने देखते हुए ही अपनी गर्दन को धीरे धीरे ऊपर से नीचे लाएं और फिर नीचे से ऊपर ले जाएँ ध्यान रखें इस पूरे टाइम आपको सामने ही देखना है।यह एक्सरसाइज 3-4 मिनट के लिए करें।

सीधे बैठें और और सामने देखते हुए बिना गर्दन घुमाये आँखों को बायीं से दायीं और फिर दायीं से बायीं और देखें। ऐसा करते हुए जल्दबाजी न करें आराम से यह एक्सरसाइज 5 मिनट के लिए करें। इसके बाद कुछ सेकंड आखों को बंद करके बैठें।

आँखों से जिओमेट्री बनाएं। आराम से बैठ जाएँ , अब सामने देखते हुए आँखों को धीरे धीरे गोल गोल घुमाये। कुछ सेकण्ड्स के लिए आँखें बंद करें, फिर धीरे से आँखे खोले और त्रिकोण यानि ट्राइंगल बनाये ऐसा धीरे धीरे करें। इसे करते समय जल्दबाजी न करें। और इसके बाद कुछ सेकंड्स आँखों को फिर आराम दें।

आप जब कम्प्यूटर में काम कर रहे हो तब आँखों के लिए 20-20 रूल को याद रखें। इसका मतलब है हर 20 मिनट में 20 फ़ीट की दूरी में रखी किसी चीज़ को 20 सेकेंड के लिए देखें। इससे आँखों को थोड़ा आराम मिलेगा।

आँखों को स्वस्थ रखने के लिए अनुलोम , विलोम , प्राणायाम विशेष रूप से प्रभावी होता है। इनके साथ ही अब बात करते है कुछ घरेलु उपायों की जिनसे आँखों की थकान , सूजन और ऑंखें लाल होने की समस्याओ को दूर किया जा सकता है।

रात में बादाम को दूध में भीगा दें सुबह दूध बादाम में चंदन मिलाकर आँखों की पलकों के ऊपर लगाएं इससे आँखों का लालिमा कम होगी।

यदि आँखों के नीचे सूजन रहती है या डार्क सर्कल्स हैं तो इसके लिए आपको आलू की पतली स्लाइस काट कर उसे आँखों को बंद करके पलकों के ऊपर रखना है। इससे रोज़ २-३ बार करना है। इससे सूजन कम होती है और स्किन कलर इवन होता है।

आँखों की सूजन कम करने के लिए ग्रीन टी बैग्स को आँखों में रखें। इसके लिए टी बैग को ठंडे पानी में भिगोएं और फिर उसे आँखों को बंद करके पलकों के ऊपर 15 मिनट के लिए रखें। ग्रीन टी में मौजूद टेनिन सूजन को कम करता है।

धनिया , सौंफ और चीनी को बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें । रोज़ सुबह शाम इसका 10 gm सेवन करें। इससे नजर कमजोर होने की समस्या दूर होगी।

बादाम, सौंफ और मिश्री को मिक्स करके पाउडर बनालें । इस पाउडर को सोने से पहले गुनगुने दूध के साथ पिये। इसे रेगुलर लेने से आँखे हैल्दी रहती है और eyesight अच्छी रहती है।

सुबह उठ कर बिना कुछ खाये अपनी सलाईवा यानी लार को आँखों में काजल की तरह लगाएं। लार में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो आँखों के संक्रमण के खतरे को कम करता हैं।

पर्याप्त पानी पियें। हरी मटर, गाजर, पालक के साथ ही पीले , नारंगी और लाल रंग के फलों और सब्जियों को नियमित रूप से खाएं। अगर आप डायबिटीज या उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं , तो आपको एक नेत्रविशेषज्ञ को नियमित रूप से दिखाना चाहिए |

इसके अलावा यदि आप 65 वर्ष से अधिक आयु के हैं तो आपको साल में कम से कम एक बार eye टेस्ट जरूर कराना चाहिए। यदि आपको आँखों में कोई जलन, दर्द या पस जैसी प्रॉब्लम है तो डॉक्टर को दिखाएँ अपने आप कोई eye ड्राप का प्रयोग ना करें।

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बॉडी डिटॉक्स और इसके तरीके

आजकल हमारी लाइफस्टाइल और हमारा वातावरण ये दोनों ही ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से हम कई तरह के टॉक्सिन्स के सम्पर्क में आ जाते हैं। यह टॉक्सिन्स यानि विषैले तत्त्व हमारे शरीर में कई तरह के रोग उत्पन्न करते हैं। यह साधारण सर्दी जुखाम , स्किन एलर्जी से लेकर कई बड़े रोगों का रूप भी ले सकते हैं। इनकी मौजूदगी ना सिर्फ हमारे कार्यक्षमता यानि एफिशिएंसी को कम करती है बल्कि हमारे इम्यून सिस्टम को भी कमजोर बना देती है। इसीलिए शरीर का डिटॉक्सिफिकेशन बहुत जरूरी होता है। डिटॉक्सिफिकेशन का मतलब है शरीर से सभी तरह के टॉक्सिन्स यानि विषैले तत्वों को बाहर करके शरीर को साफ़ करना।

हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से ही डिटॉक्सिफिकेशन सिस्टम होता है , इसका मतलब यह है की हमारा शरीर खुद ही अपने आप को detox कर सकता है इसके लिए हमे किसी बाहरी equipment या केमिकल की जरूरत नहीं होती। डिटॉक्सिफिकेशन सिस्टम में लिवर , किडनी ,इंटेस्टाइन , स्किन और फेफड़े प्रमुख अंग हैं। लिवर , हमारे शरीर के डिटॉक्सिफिकेशन सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण आंतरिक अंग है। इसके अलावा आंत यानि इंटेस्टाइन का काफी महत्वपूर्ण काम होता है बॉडी को डेटॉक्स करने में।

हम अब उन तरीकों के बारे में बात करेंगे जिनको अपनाकर आप बॉडी को डेटॉक्स करने में मदद कर सकते हैं। इन तरीकों के बारे में आपने सुना भी होगा और कुछ नए तरीके भी है जिनके बारे में आप जानना चाहते होंगे।

हैल्दी लाइफ स्टाइल अपनाकर – इस बारे में आपको पता ही है खाने में प्रोसेस्सेड और डिब्बाबंद चीज़ों का प्रयोग कम करके आप अपने भोजन में कई सारे केमिकल्स को कम कर सकते है। आप जानते ही है पैक्ड फूड्स की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए कई तरह के प्रिज़र्वेटिव्स का प्रयोग किया जाता है। इसी तरह जिन चीज़ों को कई तरह की प्रोसेसिंग के बाद खाने में प्रयोग किया जाता है उनमे भी नेचुरल पोषक तत्व खत्म हो जाते है इसके अलावा ऐसे खाने को डाइजेस्ट होने में बहुत ज्यादा समय लगता है और इनमे से कई पूरी तरह डाइजेस्ट भी नहीं होते और हमारे शरीर में टॉक्सिन्स के रूप में इकट्ठा होते रहते हैं। इसलिए खाने में नेचुरल फ़ूड को प्राथमिकता दें इसका अर्थ है खाने में फ्रूट्स वेजटेबल्स की मात्रा ज्यादा रखें।

योग और एक्सरसाइज करें – जैसा आपको पता ही है योग और एक्सरसाइज करने से बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है इससे हमारे फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और एक्सरसाइज करने से हम नेचुरल डिटॉक्सिफिकेशन की प्रक्रिया को किकस्टार्ट कर सकते हैं क्योंकि जब हम पसीना बहाते हैं तो वाइट ब्लड सेल्स को पंप करने के लिए बेहतर परिसंचरण को बढ़ावा देने वाला रक्त प्रवाह भी बढ़ता है और अंगों को प्रभावी ढंग से शुद्ध करने में मदद करता है।

इंटरमिटेंट फास्टिंग – यह तरीका आजकल वेट लॉस के लिए काफी लोग अपना रहें हैं। इसमें 24 घंटे में कुछ टाइम फास्टिंग रखना होता है इसका मतलब उस समय आपको उपवास रखना होता है। इसमें कई तरह के विकल्प होते है जैसे आप 16 घंटे फ़ास्ट रखें और 8 घंटे खाने के लिए होंगे उन आठ घंटो में आप जो चाहे खा सकते हो।इसे 16/8 कहते हैं। दूसरा विकल्प है एक दिन खाना और अगले 24 घंटे फास्टिंग और तीसरा तरीका होता है जिसमे सप्ताह में दो दिन आपको केवल 200 -300 कैलोरी ही लेना है इसे ज्यादा कैलोरी वाला खाना आपको नहीं खाना होता है। यह तरीका काफी पुराना है और लगभग सभी धर्मों में उपवास रखने का उल्लेख है चाहे वह हिन्दू धर्म हो , इस्लाम , ईसाई या बौद्ध धर्म। इसके पीछे एक सबसे बड़ा आधार है की जब शरीर फास्टिंग में होता है तो उस समय रिपेयर और डेटॉक्स का काम आसानी से करता है इसीलिए इंटरमिटेंट फास्टिंग वेट मैनेजमेंट के साथ ही कई तरह की मेटाबोलिक और हार्मोनल प्रोब्लेम्स को भी ठीक करने में प्रभावी होता है।

आयल पुल्लिंग , जिसे “कवला” या “गुंडुशा” के रूप में भी जाना जाता है, एक प्राचीन आयुर्वेदिक डिटॉक्स तकनीक है जिसमें लगभग 20 मिनट के लिए खाली पेट मुंह में एक बड़ा चम्मच तेल रखना है यहां आप नारियल का तेल या तिल या जैतून का तेल का प्रयोग कर सकते हैं। इस तेल को मुँह के अंदर भरकर उसे पूरे मुँह में घुमाते रहना है इसमें यह ध्यान रखना है की यह तेल आपको पीना नहीं है। 20 मिनट बाद इसे बाहर थूक देना है और समान्य या हल्के गुनगुने पानी से कुल्ला करलें। आयुर्वेद के अनुसार यह क्रिया मुख्य रूप से आपके शरीर में विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालती है, मुख्य रूप से डेंटल हेल्थ में सुधार करने के साथ साथ पूरे स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए काफी प्रभावी है।

क्योंकि हमारा बॉडी का डेटोक्सिफिकेशन सिस्टम खुद ही काफी प्रभावी है इसलिए अलग से कुछ करने के बजाये उन चीज़ों को हम अपनाकर अपने आपको डिटॉक्स कर सकते हैं जो बॉडी को डिटॉक्स करने में हेल्प करती है जैसे

  • अंडे, ब्रोकोली और लहसुन जैसे सल्फर युक्त खाद्य पदार्थ खाने से ग्लूटाथियोन के कार्य को बढ़ाने में मदद मिलती है, जो आपके शरीर द्वारा उत्पादित एक प्रमुख एंटीऑक्सिडेंट है।
  • मालिश भी डिटॉक्सिफिकेशन का काम करती है. मालिश करने से शरीर में रक्त संचार तेज़ होता है और विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं. अतः आप भी नियमित मसाज से अपनी बॉडी को डिटॉक्स करते रहे।
  • नींद पूरी लें इससे शरीर और दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ती है और बॉडी फिट रहती है और टॉक्सिन्स को बेहतर तरीके से खत्म करने में मदद मिलती है। नींद की कमी होने पर आपके शरीर के पास उन कार्यों को करने का समय नहीं होता है, इसलिए विषाक्त पदार्थों यानि टॉक्सिन्स को पहचानना और उनको पूरी तरह खत्म करना नहीं हो पाता।
  • आंत यानि intestine के हैल्दी होने के लिए उसमे प्रोबिओटिक्स नामक गुड बैक्टीरिया का मौजूद होना बहुत जरूरी है इसके लिए प्रीबायोटिक्स फ़ूड लेना जरूरी होता है। प्रीबायोटिक्स के साथ, हमारे गुड बैक्टीरिया, शॉर्ट-चेन फैटी एसिड नामक पोषक तत्वों को बनाने में सक्षम होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं।
  • प्रीबायोटिक्स से भरपूर आहार खाने से आपका पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है, जो उचित डिटॉक्सिफिकेशन और प्रतिरक्षा स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
  • पानी शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है, जोड़ों को चिकनाई देता है, पाचन और पोषक तत्वों को अवशोषित करता है, और अपशिष्ट उत्पादों को हटाकर आपके शरीर को डिटॉक्स करता है। इसलिए पर्याप्त पानी पीना बेहद जरूरी होता है।
  • सुबह ग्रीन टी , निम्बू पानी , शहद अदरक की चाय भी डिटॉक्स के लिए प्रयोग किये जाते हैं। यह मेटाबोलिज्म को तेज करके टॉक्सिन्स को शरीर से दूर करने में सहायक होते हैं।
  • चुकंदर और गाजर को मिलाकर इसका जूस बनाकर पीना भी हेल्थ के लिए अच्छा होता है। चुकंदर शरीर में ग्लूटेथिओन की मात्रा को बढ़ाने में मदद करता है। यह तत्व शरीर को डिटॉक्सिफाई करने में मदद कर सकता है। हालांकि इसमें काफी मात्रा में मिनरल्स की मौजूदगी के कारण इसका बहुत ज्यादा सेवन नुक्सान कर सकता है।
  • खीरा और पुदीना स्मूथी में थोड़ा सा निम्बू मिलाकर पीना भी बॉडी के डेटोक्सिफिकेशन में हेल्प करता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स फ्री रेडिकल्स को खत्म करते हैं।

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