अपने घर की हवा को कैसे रखें शुद्ध

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वायु प्रदुषण पिछले कई वर्षों से लगातार दनिया भर में चिंता का विषय बना हुआ है। इसके बारे में हम सभी जानते ही है , इसका कारण भी हम सबको पता है और इसके प्रभाव भी हम दिन प्रतिदिन देख ही रहे हैं। इसकी वजह से अस्थमा और अन्य सांस संबंधी समस्याओं में बहुत ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है। इसके कारण हमारा इम्यून सिस्टम कमज़ोर होता जा रहा है। छोटे छोटे बच्चों में सांस संबंधी रोग हो रहे हैं ,लंग्स में इन्फेक्शन हो रहा है , हमारे बुज़ुर्गों को अनेक समस्यांए सिर्फ प्रदूषित हवा में सांस लेने से हो रहीं हैं।हमारे देश के लगभग सभी बड़े शहर वायु प्रदुषण के खतरनाक स्तर पर पहुँच चुके हैं ।

जब हम बात करते हैं प्रदुषण की , तो हम देश दुनिया के शहरों की बात करते हैं पर क्या हमने कभी सोचा है हमारे घर की हवा कैसी है। हम ध्यान दें तो पाएंगे की हम घर के अंदर भी वायु प्रदुषण से बच नहीं पा रहे हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी की.स्वच्छ वायु दिवस अभियान द्वारा शुरू किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि इनडोर वायु प्रदूषण बाहरी वायु प्रदूषण से तीन गुना अधिक है। जब हम इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के साथ जोड़ते हैं, तो यह पता चलता है की दुनिया भर में सभी बीमारियों का लगभग 3% इनडोर वायु प्रदूषण के कारण होता है।

हालाँकि इसको कम किया जा सकता है बस इसके लिए हमे इंडोर वायु प्रदुषण के कारणों और उससे बचने के तरीकों को जानना और अपनाना होगा। यदि इसके कारणों पर गौर करें तो इसके प्रमुख कारण हैं

घर में काफी सारा क्लटर इकट्ठा होना

सही वेंटिलेशन का ना होना खासतौर पर किचन और बाथरूम में वेंटिलेशन का सही होना बहुत जरूरी है

स्मोकिंग

होम अप्प्लाइंसेस का सही मेंटिनेंस न होना

कार्पेट को कई दिनों तक साफ़ न करना।

स्वच्छ हवा न केवल महत्वपूर्ण है, बल्कि हम सभी के लिए अति आवश्यक है। हालांकि, कुछ लोग कह सकते हैं कि वायु प्रदूषण के कारण इन दिनों स्वच्छ हवा संभव नहीं है। सबसे साफ वातावरण, कमरा या हवा अभी भी अदृश्य और कभी-कभी दिखाई देने वाले कणों और प्रदूषक तत्वों से भरा हो सकता है जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होता है। अब हम बात करते हैं की कैसे हम इस परेशानी को कम कर सकते हैं और अपने घर को प्रदुषण मुक्त कर सकते हैं इसके लिए आप इन बातो का ध्यान रख सकते है जैसे-

  • अपने घर को क्लटर फ्री रखें रेगुलर डीप क्लीनिंग करते रहे। घर में हम कई सारा अनावश्यक सामान रखे रहते है जिनमे धूल के कण जमा होते रहते है।
  • किचन में चिमनी और खिड़कियों की नियमित रूप से सफाई करते रहें।
  • घर में वेंटिलेशन का पूरा ध्यान रखें सभी कमरों में खिड़की हो और ताज़ी हवा आनी चाहिए।
  • सोफे के कवर्स और पर्दों को नियमित रूप से साफ़ करें। सोफे को थोड़े थोड़े दिनों में वैक्यूम क्लीनिंग ज़रूर करते रहें।
  • अपने कार्पेट की वैक्यूमक्लीनिंग हर 15 दिन में जरूर करें।
  • खिड़कियों में नेट की जाली लगवा लें जिससे बाहर की डस्ट घर में न आ सके।
  • धूम्रपान ना करें।
  • हवा को साफ़ करने वाले इंडोर प्लांट्स लगाएं।
  • नासा की एक स्टडी के मुताबिक़ कुछ ऐसे इंडोर प्लांट्स हैं जो आपके घर को डिटॉक्स करते है और हवा को शुद्ध करते हैं जैसे इंग्लिंश आइवी, स्पाइडर प्लांट्स, स्नेक प्लांट्स पीस लिली और गुलदाउदी। ये प्लांट्स नेचुरल एयर प्यूरीफाइयर की तरह काम करते हैं।
  • आजकल एयर प्यूरिफायर का प्रयोग भी घरों और ऑफिसों में किया जाने लगा है। एयर प्यूरीफायर ऐसे उपकरण होते हैं जो वायु प्रदूषकों को हटाने में सहायता करते हैं।
  • एयर प्यूरिफायर में HEPA फिल्टर होते हैं जो कमरे में मौजूद हवा को साफ करने और शुद्ध करते हैं। कंस्यूमर सर्च विशेषज्ञ परीक्षणों की एक रिपोर्ट के अनुसार, HEPA फ़िल्टर वायु, पराग, मोल्ड, बैक्टीरिया, पालतू पशुओं की रूसी या धूल के कण सहित हवा से लगभग 99.9% धूल कणों और अशुद्धियों को निकालता है।
  • घर की सफाई में बच्चों को भी शामिल करें उनको खिड़की दरवाजे साफ करने जैसे काम दीजिए। इससे उनमे भी सफाई रखने की आदत बनेगी। काम के बाद उनको शाबाशी देना बिलकुल ना भूलें। बच्चों को उनके अपने सामान जैसे बैग , खिलौने , साफ़ करके सलीके से रखने को कहें।

यदि आप अस्थमा, एलर्जी, या किसी अन्य सांस संबंधी रोग से पीड़ित हैं, तो एयर प्यूरिफायर आपको काफी राहत प्रदान कर सकता है। एयर प्यूरीफायर घरों में विशेष रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे एलर्जी और अन्य कणों को जल्दी और अच्छी तरह से साफ करते हैं और प्रदूषकों को प्रभावी ढंग से हटाते हैं।

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दिमाग को तेज करने के कुछ असरदार वैज्ञानिक तरीके

हम सामान्यतः एक ही तरह का रूटीन हमेशा फॉलो करते हैं जिससे हमारा दिमाग उनसभी कामों की प्रोग्रामिंग एक तरह से सेव करलेता है। अब सोचिये, आप सुबह उठते हैं ,ब्रश करते हैं, नहाते है , ब्रेकफास्ट करते हैं ,ऑफिस जाते हैं। इन सभी में आपको अपने दिमाग में कोई ज़ोर नहीं देना होता है, आपके दिमाग को पता है आपको ब्रश कैसे करना है ,आप को ऑफिस कैसे जाना है। इसके लिए दिमाग को ज़्यादा मेहनत नहीं करनी होती। अब इसपर गौर करें तो हम पाएंगे की हमारे डेली रूटीन में हमारे दिमाग को बहुत ज़्यादा एक्सरसाइज नहीं करनी पड़ती। इनसब के साथ ही हमारी टेक्नोलॉजी पर निर्भरता ने भी दिमाग की कसरत को सीमित कर दिया है। हमारा ज़्यादातर याद रखने का काम हमारा मोबाइल कर लेता है, वो चाहे कोई महत्वपूर्ण मीटिंग हो या कोई पता या फ़ोन नंबर।

इन कारणों से आजकल जो सबसे ज़्यादा होने वाली समस्या है वह है भूलने की। हममे से कई लोग इस परेशानी को अनुभव करते हैं। हमे कई बार चीज़े याद रखने में परेशानी होती है हम छोटी छोटी चीज़े भूल जाते हैं। अब अगर हम अपने दिमाग को तेज़ बनाना चाहें तो क्या करें जिससे हम अपने मस्तिष्क को और ज़्यादा शार्प बना सकें। उसके लिए हम अब कुछ ऐसी ब्रेन एक्सरसाइज की बात करेंगे जिनसे आप अपना ब्रेन पॉवर बढ़ा सकें।

काम का तरीका बदलें – यदि आप राइट हैंडर हैं यानि सभी काम दाएं हाथ से करते हैं तो कुछ छोटे छोटे काम कभी बाएं हाथ से करें जैसे ब्रश करना , बाल ठीक करना, दरवाजा खोलना या न्यूज़ पेपर उठाना। अपने नॉन डोमिनेंट हैंड से काम करना ब्रेन की एक्टिविटी को बढ़ा देता है। यकीन मानिये आपको ये ट्रिक जितनी आसान लग रही है वो जब आप पहली बार ट्राय करेंगे तो आपको काफी मुश्किल लगेगी।

चीज़ों को उल्टा या ऊपर नीचे करके देखे – जैसे अखबार या किसी किताब को कभी उल्टा रखके पढ़ने की कोशिश करें , कभी अपनी वाच को उल्टा पहनकर टाइम देखिये या कैलेंडर को उल्टा लटका दीजिये। इस तरह जब भी आप उसे देखेंगे आपके ब्रेन को थोड़ी मेहनत करनी होगी। ये ट्रिक आपके दिमाग को अच्छी एक्सरसाइज करवाएगी।

कोई किताब को अपने किसी साथी या बच्चे के साथ मिलकर पढ़ें या ऐसा संभव ना हो तो ऑडियो बुक के साथ सुनके पढ़ने की कोशिश करें। इसके लिए कोई बुक बच्चे या आपके दोस्त को पढ़ने दीजिये और बीच में कही वो रुके और आप आगे का भाग पढ़ना शुरू करें। यह प्रैक्टिस आपके इमेजिनेशन पावर को बढ़ाती है। इसमें आपका ब्रेन एक ही शब्द को पढ़ भी रहा है सुन भी रहा है और सोच भी रहा होता है।

नया रास्ता लें – हमेशा एक ही रूट या रास्ते से आना जाना करने से आपके ब्रेन को ज़्यादा मेहनत नहीं लगती। कोई नया या अलग रास्ता लेकर चलना ब्रेन में कोर्टेक्स और हिप्पोकैम्पस को एक्टिवेट करता है। ये दोनों हमारे दिमाग के वह भाग है जो इमोशंस , लर्निंग और मेमोरी को रेगुलेट करते हैं। इस प्रैक्टिस से हमारी सीखने और याद रखने की क्षमता बेहतर होती है।

कुछ नया सीखिए या करिये – नयी भाषा सीखना ,या कोई नया जो आपने कभी नहीं किया। जैसे यदि आपने कभी डांस नहीं किया तो डांस करें या यदि आपको तैरना नहीं आता तो स्विमिंग सीखें, कोई म्यूजिक या म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाना सीखें । कुछ नया करना या सीखना ब्रेन में डोपामाइन के रिलीज़ को ट्रिगर करता है और नए न्यूरॉन्स के बनने को प्रेरित करता है।

मेडिटेशन– सभी ब्रेन एक्सरसाइज में ध्यान यानि मेडिटेशनसबसे ज़्यादा चुनौतीपूर्ण है और सबसे अच्छा है। हमारा दिमाग एक नॉन स्टॉप थिंकिंग मशीन है जिसमे प्रतिदिन लगभग 70000 विचार चलते रहते हैं। इनमे से 90 प्रतिशत विचार रोजमर्रा के काम और घटनाओं से जुड़े होते हैं। ऐसे में दिमाग को कुछ टाइम के लिए शांत रहने की प्रैक्टिस करना वास्तव में काफी मुश्किल काम होता है। इसे हम ब्रेन का पुशअप्स कह सकते हैं। दुनिया भर में एक हजार से भी ज्यादा रिसर्च में ये साबित हुआ है मेडिटेशन से तनाव में कमी होती है ,याददाश्त बढ़ती है , सीखने की क्षमता बढ़ती है , कंसंट्रेशन बेहतर होता है और यहां तक की कई मामलों में मानसिक रोगों में भी फायदा हुआ है।

शारीरिक व्यायाम करें – ब्रेन एक्सरसाइज की जब हम बात करते हैं तो उसमे फिजिकल एक्सरसाइज की बात तो करनी ही होगी। एक्सरसाइज से मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह अच्छे से होता है जिससे अधिक ऑक्सीजन और पोषक तत्व यानि न्यूट्रिएंट्स का सर्कुलशन होता है और मेटाबोलिक वेस्ट को अधिक कुशलता से हट जाता है। एक्सरसाइज से फील गुड ब्रेन केमिकल जैसे सेरोटोनिन , डोपामिन , नोरएपिनेफ्रीन बढ़ता है और तनाव कम होता है। इसके साथ ही एक्सरसाइज करने से क्रिएटिविटी,एकाग्रता बढ़ती है , टाइम मैनेजमेंट और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार आता है।

दिमाग को तेज़ रखने के लिए ये 11 चीज़े ज़रूर खाएं

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दिमाग को तेज़ रखने के लिए ये 11 चीज़े ज़रूर खाएं

मस्तिष्क हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। हमारा सारा काम करना , चीज़ों को समझना, सीखना, बोलना सब कुछ मस्तिष्क से ही होता है। इसके सुचारु रूप से काम करने के लिए नींद , योग , मैडिटेशन यानी ध्यान के अतिरिक्त कुछ भोज्य पदार्थ भी है जिनके सेवन से हम दिमाग को तेज कर सकते हैं। चीज़ें याद ना रहना , कही ध्यान केंद्रित ना कर पाना , नयी चीज़ सीखने में परेशानी होना , कुछ भी पढ़ा हुआ भूल जाना ये सब समस्याओं को दूर करने का एक आसान तरीका है अपने आहार में ब्रेन फ़ूड को बढ़ाना। तो आइये अब बात करते है उन खाद्य पदार्थों की जिनसे दिमाग को पोषण मिलता है।

  1. अखरोट , ओमेगा -3 फैटी एसिड, प्राकृतिक फाइटोस्टेरोल और एंटीऑक्सिडेंट का अच्छा स्रोत है। डीएचए, विशेष रूप से एक प्रकार का ओमेगा -3 वसा है जो दिमाग को तेज करने के लिए जाना जाता है। अखरोट में विटामिन ई, फोलेट और मेलाटोनिन सहित कई न्यूरोप्रोटेक्टिव यौगिक भी होते हैं। अखरोट का सेवन तर्कशक्ति को बढ़ाता है। अखरोट जैसे उच्च एंटीऑक्सीडेंट खाद्य पदार्थों का सेवन ऑक्सीडेटिव तनाव के लिए अतिसंवेदनशील को कम करता है जो उम्र बढ़ने में होता है और इसलिए उम्र बढ़ने में संज्ञानात्मक और मोटर फ़ंक्शन को बढ़ाता है।
  2. डार्क चॉकलेट में शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट गुण होते हैं, इसमें कैफीन सहित कई प्राकृतिक उत्तेजक होते हैं जो फोकस और एकाग्रता को बढ़ाते हैं। यह एंडोर्फिन के उत्पादन को उत्तेजित करने में भी मदद करता है जो मूड को बेहतर बनाने में मदद करता है। डार्क चॉकलेट का उपयोग वस्कुलर इम्पेयरमेंट के इलाज के लिए किया जाता रहा है, जिसमें डिमेन्शिया और स्ट्रोक शामिल हैं।
  3. ब्लूबेरी में, एंटीऑक्सिडेंट और अन्य फाइटोकेमिकल्स होते हैं जो न्यूरोडीजेनेरेटिव ऑक्सीडेटिव तनाव में कमी करने के साथ-साथ सीखने, सोच और याद्दाश्त में सुधार करते हैं। ब्लूबेरी, क्रैनबेरी और स्ट्रॉबेरी जैसे बेरीज़ बढ़ती उम्र में मस्तिष्क को कई तरह से लाभ पहुंचाते हैं।
  4. बादाम लंबे समय से याददाश्त बढ़ाने के लिए जाने जाते है। बादाम, एसीटी (एसिटाइलकोलाइन) के स्तर को बढ़ाता है, जो एक न्यूरोट्रांसमीटर है और याददाश्त को बढ़ाने और अल्जाइमर रोग जैसी स्थितियों से लड़ने में मदद करता है। बादाम में कई पोषक तत्व होते हैं जो मस्तिष्क की शक्ति को बनाए रखने में मदद करते है।
  5. तिल के बीज अमीनो एसिड टायरोसिन का बढ़िया स्रोत हैं, जिसका उपयोग मस्तिष्क को चौकन्ना और याददाश्त को तेज रखने के लिए जिम्मेदार एक न्यूरोट्रांसमीटर डोपामाइन का उत्पादन करने के लिए किया जाता है। तिल के बीज  जिंक, मैग्नीशियम और विटामिन बी -6, सहित अन्य पोषक तत्वों से भी भरपूर होते हैं।
  6. कद्दू के बीजों में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर और मस्तिष्क को फ्री रेडिकल क्षति से बचाते हैं। वे मैग्नीशियम, लोहा, ज़िंक और तांबा का एक उत्कृष्ट स्रोत भी हैं। मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए इन पोषक तत्वों में से सबसे महत्वपूर्ण है: ज़िंक : यह नर्व सिग्नलिंग के लिए महत्वपूर्ण है।
  7. कॉफी दिमाग को एकाग्र करने में और मनोदशा को ठीक करने में मदद करती है। इसमें मौजूद कैफीन और एंटीऑक्सिडेंट्स अल्जाइमर के खतरे को भी कम करने में सहायक होते हैं।
  8. एवोकैडो एक वसायुक्त फल है जो रक्त के स्वस्थ प्रवाह में योगदान देता है और रक्त के स्वस्थ प्रवाह का मतलब है स्वस्थ मस्तिष्क। एवोकैडो में मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड की उच्च मात्रा होती है। 2012 में किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड मस्तिष्क में ग्लोरियल कोशिकाओं को एस्ट्रोसाइट्स की रक्षा करने में मदद करते हैं, जो सूचना देने वाली तंत्रिकाओं को सहायता प्रदान करते हैं।
  9. अलसी यानी फ्लैक्स सीड्स भी ब्रेन के लिए टॉनिक की तरह काम करते हैं इनमे पाया जाने वाला ओमेगा 3 फैटी एसिड्स और विटामिन्स दिमाग के कार्य कुशलता को बढ़ाते है और कन्सेंट्रेशन पावर को बढ़ाते हैं।
  10. बीन्स से प्राप्त बी-विटामिन शरीर की कोशिकाओं को ऊर्जा प्रदान करने और एक दूसरे के साथ प्रभावी ढंग से संवाद करने में मदद कर सकते हैं। ये विटामिन शरीर को आनुवंशिक कोड पढ़ने में भी मदद कर सकते हैं ताकि वे आपके सर्वोत्तम कार्य करने में सक्षम हों। बीन्स जैसे काला राजमा , मुंग , मसूर और छोले में बी-विटामिन प्रचुर मात्रा में होते हैं।
  11. ब्रोकोली और फूलगोभी मस्तिष्क के लिए बहुत आवश्यक भोजन है। भोजन में इनके सेवन से अल्जाइमर रोग के बढ़ने या होने के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। यह उम्र से संबंधित परेशानियों जैसे याददाश्त कमजोर होने को कम करता है। गर्भावस्था के दौरान इसका सेवन मस्तिष्क में कॉग्निटिव कार्य को बढ़ावा दे सकता है और सीखने और याद रखने की क्षमता में सुधार कर सकता है।

इनके साथ ही साल्मन फिश , अंडे, ओलिव आयल ,शकरकंद ,पालक और नारियल में भी कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो दिमाग को तेज करने और एक्टिव रखने में सहायक होते हैं। इन को आप अपने आहार में शामिल करके अपने दिमाग को स्वस्थ और तंदरुस्त बना सकते हैं।

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