सरदर्द को दूर करने के कुछ आसान उपाय

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सर दर्द एक बहुत बड़ी समस्या है। आज की भाग दौड़ की दिनचर्या में आम आदमी , बच्चे , इस समस्या से ग्रसित होते जा रहे है। हमेशा यदि सर दर्द बना रहता है तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। कई लोग तो बाम लगा कर , चाय पी कर , और आराम करके सिरदर्द को भगाने की कोशिश भी करते है।

सर दर्द के कुछ कारण:

कफ सर्दी ज़ुखाम हो तो सर दर्द के साथ भारीपन महसूस होता है।

पेट में जब गैस बनती है अथवा पित्त की वजह (अपच होना ) से भी सर दर्द होता है। पित्त से यदि सर दर्द है तो सबसे पहले तो उलटी कर दे जिससे की शरीर से पित्त निकल जाए और सर दर्द ठीक हो जाए।

देर तक मोबाइल में बात करने अथवा अनावश्यक किसी बात को लेकर सोचने से भी सर दर्द हो सकता है।

किसी किसी को परफ्यूम की गंध से भी सर दर्द होने लगता है।

सर दर्द अगर माथे के दोनों तरफ होता है तो वो किसी बात की टेंशन की वजह से होता है यदि सर के बीचो बीच हो तो माइग्रेन का दर्द भी हो सकता है।
हार्मोन बदलाव के कारण भी सर दर्द हो सकता है।

निदान

सर दर्द यदि कफ के कारण है तो सरसो के तेल या शर्वेन्दू की कुछ बूंदे नाक में डालें।
100 ग्राम पानी अथवा 1 चम्मच रीठा पाउडर + चुटकी भर सोंठ + 3-4 काली मिर्च डालकर पूरे एक दिन रखने के बाद , उसे छानकर नाक में 2-2 बूँद डालने से कफ पूरा निकल जाएगा जिससे सर दर्द में आराम मिलेगा (हालाँकि आप जैसे ही आप बूँद डालेंगे थोड़ा दर्द होगा)

100 ग्राम बादाम +50 ग्राम मिश्री / खांड + 20 ग्राम काली मिर्च मिलाकर पीस ले। सुबह शाम एक चम्मच लेने से कफ के साथ सर दर्द भी दूर हो जाएगा।

एलोवेरा जूस और गिलोय घनवटी से भी सर दर्द दूर होता है।

सर दर्द में 4-5 गरम जलेबी खाकर गरम गरम गाय का दूध पीने से भी सर दर्द दूर होता है।

एलोवेरा का लेप करने से भी सर दर्द दूर होता है। एलोवेरा में एंटी ऑक्सीडेंट और मिनिरल होते है जो दर्द और सूजन को काम करने में सहायक होते हैं। इसके लिए आपको सर्व प्रथम एक कटोरी में चुटकी भर हल्दी + 1/2 चम्मच एलोवेरा जेल और 2 बूँद लॉन्ग का तेल डालकर अच्छे से मिला कर पेस्ट बना ले। इस पेस्ट का अपने माथे में लगाकर 10-15 मिनट रखें। कुछ ही देर में सर दर्द दूर हो जाएगा।
एलोवेरा जेल को त्वचा पर लगाने से मांसपेशियों को आराम मिलता हैं।

मेघावटी की 2-2 गोली सुबह शाम लेना चाहिए। बच्चो को 1-1 गोली खिलाए।

बादाम रोगन 1-1 चम्मच दूध में डालकर ले सकते हैं। साथ में बादाम पाक ले तो अच्छा हैं।

दूध में शहद / हल्दी केसर डालकर पीने से भी सर दर्द में आराम मिलता हैं।

ध्यान देने वाली बात :

अलोएवेरा की पत्ती को हम जैसे ही काटते हैं उसमे से पीला द्रव्य निकलता हैं , उसे इस्तमाल नहीं करना चाहिए , उस द्रव्य से घातक बीमारी जैसे की कैंसर भी हो सकता हैं। इस पिले द्रव्य से बचने के लिए एलोवेरा की पत्ती को तोड़कर कुछ देर के लिए ऐसे ही छोड़ दे जब पूरा पीला द्रव्य निकल जाए तो पत्ती को पानी से अच्छे से धो कर इस्तेमाल कर सकते हैं।

किटो डाइट क्या है ?

केटोजेनिक डाइट या कीटो आहार ऐसा आहार होता है जिसमे वसा कीअधिक मात्रा , प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में और कार्बोहायड्रेट कम मात्रा में लिया जाता है। इस प्रकार की डाइट में अनाज , दूध और कुछ फलो और कुछ सब्जियों जैसे आलू ,केला, शकरकंद आदि का सेवन नहीं किया जाता है और ज्यादा वसा वाले खाने को ऊर्जा के मुख्य स्त्रोत की तरह उपयोग किया जाता है।

20 से अधिक अध्ययनों से पता चलता है कि इस प्रकार का आहार आपको अपना वजन कम करने और आपके स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद कर सकता है। हालाँकि इस प्रकार की डाइट का प्रयोग किसी डॉक्टर या डिएटिशियन से सलाह लेके ही करना चाहिए ।

किटो आहार से मधुमेह, कैंसर, मिर्गी और अल्जाइमर रोग में भी लाभ मिलता है

सामान्य तौर पर हमारा शरीर कार्बोहायड्रेट से ही ऊर्जा प्राप्त करता है परन्तु जब शरीर में कार्बोहायड्रेट की कमी होती है तो वसा का प्रयोग ऊर्जा के लिए होने लगता है । केटोजेनिक डाइट इसी सिद्धांत पर काम करती है और आपका शरीर ऊर्जा के लिए वसा को केटोन्स में बदल देता है, जो मस्तिष्क के लिए ऊर्जा की आपूर्ति करता है ।

किटो आहार में किन चीज़ो का उपयोग वर्जित है?

अब यहाँ हम बात करते है उन चीज़ो की जिनका प्रयोग कीटो डाइट में कम से कम किया जाता है या जिनका प्रयोग वर्जित है । यहां हम उन खाद्य पदार्थों की एक सूची है जिन्हें किटोजेनिक डाइट के अनुसार कम करने की ज़रूरत है

मीठे पदार्थ: चॉकलेट, मिठाइयाँ, सोडा, फलों का रस, स्मूदी, केक, आइसक्रीम, कैंडी, आदि।
अनाज या स्टार्च: गेहूं , चावल, पास्ता, आदि।
बीन्स या फलियाँ: मटर, राजमा, दाल, छोले, आदि।
जड़ वाली सब्ज़िया: आलू, शकरकंद, गाजर, आदि।
कम वसा वाले या आहार उत्पाद: नमकीन और रेडी मेड खाने का सामान जैसे चिप्स और कुरकुरे जिनमे कार्बोहाइड्रेट ज़्यादा होता है।
किटो आहार में शराब का सेवन भी नहीं करना चाहिए। चीनी मुक्त आहार खाद्य पदार्थ भी वर्जित है।

किटो आहार में किन चीज़ो को बढ़ावा दिआ गया है ?

अब बात करते है इस केटोजेनिक डाइट में किन चीज़ो को अपने आहार में शामिल करना होता है :


वसायुक्त मछली: जैसे सैल्मन, ट्राउट, ट्यूना और मैकेरल।
अंडे: पास्ता या ओमेगा -3 से भरपूर अंडे।
मक्खन और क्रीम
पनीर:
नट और बीज: बादाम, अखरोट, सन बीज, कद्दू के बीज, चिया बीज, आदि।
स्वस्थ तेल: मुख्य रूप से एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल, नारियल तेल और एवोकैडो तेल।
एवोकाडोस:
लो-कार्ब सब्जियाँ: हरी सब्जियाँ, टमाटर, प्याज, मिर्च, आदि।
मसाले: आप नमक, काली मिर्च और विभिन्न स्वस्थ जड़ी बूटियों और मसालों का उपयोग कर सकते हैं।

मांस: अगर आप नॉनवेज खाते है तो आपको इन चीज़ों का सेवन अधिक करना चाहिए रेड मीट यानि लाल मांस, सॉसेज, चिकन और पेरू पक्षी

किटो आहार के साइड इफेक्ट्स ?

हालांकि केटोजेनिक आहार स्वस्थ लोगों के लिए सुरक्षित है, लेकिन आपके शरीर के अनुकूल होने पर कुछ प्रारंभिक दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

इसे अक्सर कीटो फ्लू के रूप में जाना जाता है और आमतौर पर कुछ दिनों के भीतर खत्म हो जाता है।

किटो फ़्लू में ऊर्जा की कमी और मानसिक कमज़ोरी , भूख में वृद्धि, अनिद्रा , मतली, पाचन की गड़बड़ी और व्यायाम करने में परेशानी शामिल है।

इसे कम करने के लिए, आप पहले कुछ हफ्तों तक नियमित कम कार्ब आहार खाने की कोशिश करें । यह करने से आपके शरीर को अधिक वसा जलाने का आदत बन जाएगी और साइड इफेक्ट्स का असर कम होगा ।

किटो आहार सभी के लिए नहीं है

किटो आहार उन लोगों के लिए बहुत अच्छा हो सकता है जो अधिक वजन, मधुमेह या अपने मेटाबोलिक स्वास्थ्य में सुधार चाहते है।

जो लोग अपना वज़न बढ़ना चाहते है उनके लिए किटो डाइट नहीं है।

और यह तभी काम करता है जब आप इसे लम्बे समय तक प्रयोग में लाए।

सीने में दर्द

सीने में दर्द या छाती में दर्द वैसे तो काफी आम समस्या है लेकिन इसको नजरंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सीने में दर्द अचानक ही होता है और यह दर्द अलग अलग प्रकार का हो सकता है जैसे सीने में दबाव महसूस होना या जलन, चुभन जैसा महसूस होना ।कभी कभी यह दर्द गर्दन या हाथो तक जाता है।

सीने में दर्द के पीछे कई कारण हो सकते है जैसे गैस या अपच , मांसपेशियों में खिचाव , सांस से सम्बंधित परेशानी या फिर हृदय रोग । क्योंकि सीने में दर्द एक गंभीर समस्या का संकेत देता है, इसलिए तत्काल चिकित्सा सहायता लेना महत्वपूर्ण है।

दिल से संबंधित सीने में दर्द

हालाँकि सीने में दर्द को हम हार्ट अटैक से जोड़ देते है मगर जिनको हार्ट अटैक होता है उनका कहना है की उन्हें सीने में तकलीफ तो होती है मगर उसे सिर्फ दर्द नहीं कहा जा सकता।

सामान्य तौर पर, दिल का दौरा या किसी अन्य दिल की समस्या हो जाने पर कुछ इस प्रकार के लक्षण दिखाई देते है जैसे छाती में दबाव या जकड़न महसूस होना, छाती में तीव्र दर्द होने के साथ-साथ पीठ, गर्दन, जबड़े, कंधे और भुजाओं तक दर्द महसूस होना, दर्द कुछ देर अधिक रहना फिर कम हो जाना फिर बार-बार वापसआना, सांस लेने में कठिनाई होना, पसीना आना और ठण्ड लगना, चक्कर आना या कमजोरी महसूस करना , उलटी अथवा मितली आना।

अन्य प्रकार के सीने में दर्द

हालांकि दिल से संबंधित छाती के दर्द को अन्य प्रकार के सीने में दर्द से अलग करना मुश्किल है पर हम ऐसे लक्षणों को देख सकते है जो दिल की बीमारी से नहीं जुड़े है जैसे मुंह में खट्टापन महसूस करना, निगलने में परेशानीहोना , सीने में दर्द का बढ़ना या घटना और शारीरिक हलचल से दर्द कम हो जाना, जोर से छींकने या खांसने पर सीने में दर्द होना या सीने में कई घंटों तक लगातार दर्द महसूस होना ।

सीने में दर्द के कारण

सीने में दर्द के कई संभावित कारण होते है, जिनमें से सभी को चिकित्सा की आवश्यकता होती है।

दिल से संबंधित कारण

सीने में दर्द के दिल से संबंधित कारणों में शामिल हैं:
दिल का दौरा -यह हृदय की मांसपेशियों में अच्छे से ब्लड सप्लाई न होने या ब्लड फ्लो में किसी रूकावट की वजह से होता है।

एनजाइना – एनजाइना सीने में दर्द के लिए शब्द है जो हृदय में रक्त प्रवाह में गड़बड़ी के कारण होता है।यह अकसर धमनियों की आंतरिक दीवारों पर कोलेस्टेरोल के अधिक होने के कारण होता है ये धमनिया रक्त को हृदय में ले जाती हैं। कोलेस्टेरोल के ज्यादा या फिर गाढ़े होने से ये धमनियों को संकीर्ण कर देते हैं और विशेष रूप से परिश्रम के दौरान हृदय में रक्त आपूर्ति में अवरोध पैदा करते हैं।

पेरिकार्डिटिस दिल के आसपास की थैली की सूजन है। जब आप सांस लेते हैं या जब आप लेटते हैं तो तेज दर्द का एहसास होता है जो समय के साथ और बदतर हो जाता है।

पाचन संबंधी कारण

पाचन तंत्र या डाइजेस्टिव सिस्टम में खराबी के कारण भी सीने में दर्द हो सकता है, जैसे एसिडिटी की समस्या जिसमे एसिड ज्यादा बनने की वजह से सीने में जलन महसूस होती है, इसके आलावा एसोफैगस में किसी विकार के कारण खाना निगलने में परेशानी होने से भी सीने में चुभन या दर्द महसूस होता है । गॉलब्लेडर की सूजन पेट दर्द का कारण बन सकती है जो आपकी छाती तक पहुंच जाती है।

अन्य कारण

पैनिक अटैक – सीने में दर्द के साथ अचानक से किसी चीज़ का भय होना, तेज़ धड़कन, तेज़ साँस आना, पसीना आना, सांस में तकलीफ, मितली, चक्कर आना, ये सब पैनिक अटैक के संकेत है।