ड्राई स्किन की देखभाल कैसे करें

ड्राई स्किन की देखभाल काफी मुश्किल होती है और कभी कभी ड्राई स्किन के कारण कई अन्य स्किन प्रोब्लेम्स भी होने लगती हैं। यदि आपकी स्किन ड्राई है तो आप जानते होंगे की इसे मैनेज करना कितना मुश्किल काम है।

स्किन ड्राई होना मुख्य रूप से नेचुरल आयल की कमी के कारण होता है जो त्वचा में नमी प्रदान करते हैं। ये तेल त्वचा में स्वाभाविक रूप से पाए जाते हैं, लेकिन जब वे कम मात्रा में होते हैं तो स्किन में सूखापन आने लगता है।

ड्राई स्किन होने के बहुत से कारण होते हैं। लोग अक्सर ठंड के मौसम के साथ शुष्क त्वचा को जोड़कर भ्रमित हो जाते हैं। हालांकि, ठंड का मौसम ही एकमात्र कारण नहीं है , धूप में ज्यादा रहने या खाने में विटामिन्स और मिनल्स की कमी भी स्किन ड्राई होने का कारण हो सकते हैं।

ज्यादा देर तक नहाना और लूफा या स्क्रब का ज्यादा प्रयोग – ज्यादा देर तक नहाना और हार्श साबुन के इस्तेमाल से ड्राई स्किन की समस्या और बढ़ती है इसके लिए साबुन की जगह शावर जेल का प्रयोग करें और स्किन को ज़्यादा स्क्रब करने से बचें।

  • ज्यादा गर्म पानी से नहाना भी त्वचा में सूखापन बढ़ाता है
  • hypothyroid की समस्या की वजह से
  • जेनेटिक कारणों से
  • कॉफ़ी ,सिगरेट, शराब के अधिक सेवन के कारण
  • स्विमिंग पूल में ज्यादा स्विमिंग करने से – स्विमिंग पूल में स्विमिंग करने के बाद आपको नार्मल शावर ज़रूर लेना चाहिए जिससे आपकी बॉडी में क्लोरिनेटेड वाटर न रहे।
  • विटामिन की कमी से -विटामिन A और विटामिन डी की कमी से भी स्किन ड्राई होने लगती है इसके लिए आपको अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियों और लाल ऑरेंज रंग के फ्रूट्स और वेजटेबल्स को शामिल करना चाहिए।

ड्राई स्किन को सामान्य रखने के लिए हमे उसके कारण के साथ कुछ सावधानियों का भी ध्यान रखना होता है। अब हम कुछ आसान और असरदायक नुस्खों की बात करते हैं जिनसे आप अपनी स्किन को नार्मल और हैल्दी बना सकते हैं।

नहाने के पानी में कुछ बूंदें ओलिव आयल की मिलाएं। इससे आपकी स्किन को मॉइस्चर मिलता है और नहाने के तुरंत बाद हल्की नमीं रहते ही लोशन लगाएं।

वर्जिन कोकोनट आयल – सुबह या रात में सोने से पहले नियमित रूप से लगाएं। इसमें सैचुरेटेड फैटी एसिड्स होते हैं जो त्वचा को पोषण प्रदान करते हैं।

शहद और नारियल के तेल को बराबर मात्रा में मिलाकर चेहरे पर लगाएं और बीस मिनट बाद इसे गुनगुने पानी से धोलें। इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटी फंगल प्रॉपर्टी होती है।

फ्रेश एलोवेरा और मलाई को मिलाकर उसका फेस मास्क चेहरे पर लगाएं , आधे घंटे बाद गुनगुने पानी से फेस वाश करलें।

ओटमील , दूध और शहद का फेस पैक – 2 चम्मच ओटमील 2चम्मच दूध और 2 छोटे चम्मच शहद को 20मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लें। इसे आप हफ्ते में 3-4 बार लगा सकते हैं।

केला ,दही, शहद – 2 केले 1 बड़ा चम्मच शहद , एक चौथाई कप दही को मिलाकर 30 मिनट के लिए फेस पर लगाके रखें और फिर धो ले।इससे त्वचा हाइड्रेट होती है और चमकदार बनती है।

ऑरेंज जूस और एलोवेरा जेल -इन दोनों को मिलाकर चेहरे पर लगाएं और 15 मिनट बाद धोलें। ऑरेंज जूस में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो स्किन की एजिंग प्रोसेस को धीमा करते है जिसके कारण आप यंग दिखतें है। एलोवेरा का प्रयोग स्किन को हाइड्रेट रखता है।

इन सभी नुस्खों के साथ ही अपनी त्वचा को हैल्दी रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, पर्याप्त नींद लेना पौष्टिक आहार लेना भी ज़रूरी होता है।

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गर्भावस्था का 25वां सप्ताह – Pregnancy in 25th week in Hindi

यदि आपने अभी तक गर्भकालीन डायबिटीज की जांच के लिए ग्लूकोज स्क्रीनिंग टेस्ट नहीं कराया है, तो अब आपको यह टेस्ट करा लेना चाहिए। आपके डॉक्टर भी इस टेस्ट को करवाने की सलाह देंगे, जो आम तौर पर 24-28 सप्ताह के बीच ही किया जाता है। आपके रक्त में एनीमिया या आयरन की कमी की जांच भी की जा सकती है। आप जिस प्रकार के वातावरण में रहती हैं, उसके आधार पर आपको काली खांसी का टीका भी लगाया जा सकता है। यदि आपका ब्लड ग्रुप आरएच नेगेटिव है, तो आपको उसका टीका भी लगाया जा सकता है। प्रेगनेंसी क्लासेज जाने का यह उपयुक्त समय है यदि अपने जाना शुरू नहीं किया है तो इस हफ्ते से इसकी शुरुआत भी कर सकती हैं।

25वें हफ्ते की गर्भावस्था में शरीर में होने वाले बदलाव – Body changes in 25th week of pregnancy in Hindi

जैसा जैसे आपके बच्चे के बाल बढ़ते हैं, आप अपने स्वयं के बालों के भी तेजी से बढ़ने का अनुभव करेंगी। लेकिन बच्चे के पैदा होने के बाद इनके झड़ने की संभावना भी बढ़ जाती है। निर्जलीकरण से बचने के लिए तरल पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन करें क्योंकि पानी की कमी के कारण चक्कर आना, थकान, सांस की तकलीफ और अन्य दर्द आदि समस्याएं होती हैं। अपनी पीठ के बल न लेटें।

आपकी त्वचा में खिंचाव के कारण वो शुष्क और खुजलीदार हो सकती है, लेकिन लोशन आदि से त्वचा का सूखापन दूर करने में मदद मिल सकती है। आपको आँखों में भी सूखेपन की शिकायत हो सकती है जिससे दृष्टि पर भी असर पड़ता है। हार्मोनों के स्तर में निरंतर वृद्धि और अस्थिरता के कारण आप हॉट फ्लैशेस का अनुभव भी कर सकती हैं। यदि आप कब्ज से पीड़ित हैं, तो अधिक फाइबर युक्त आहार खाने का प्रयास करें और नियमित रूप से व्यायाम करने की आदत डालें।

पचीसवें हफ्ते की गर्भावस्था में शिशु का विकास – Baby development in 25th week of pregnancy in Hindi

शिशु इस हफ्ते में 13½ इंच लंबा और वज़न में सिर्फ 680 ग्राम का होता है। बच्चे का विकास तेजी से हो रहा होता है। 25वें हफ्ते के दौरान, बच्चे की त्वचा में अंदर वसा एकत्रित होने लगती है, जिस कारण उसमें मांस (चर्बी) चढ़ने लगता है। 3-डी अल्ट्रासाउंड में तो आपका बच्चा बिलकुल नवजात शिशु की तरह दिखना शुरू हो जायेगा। इस स्तर पर, अधिकांश महिलाएं बच्चे की बहुत सारी गतिविधियां महसूस करती हैं। लेकिन इसमें चिंता करने वाली कोई बात नहीं है अधिक गतिविधियां भी एक अच्छी बात है। इसका यह अर्थ बिलकुल भी नहीं है कि आपका बच्चा आवश्यकता से अधिक सक्रिय हो रहा है।

पचीसवें हफ्ते के गर्भ का अल्ट्रासाउंड – Ultrasound of 25 weeks pregnancy in Hindi

अल्ट्रासाउंड में बच्चे के कान की करीबी तस्वीर से पता चलता है कि उसके चेहरे की आकृतियां कैसे बनी हैं। यद्यपि उसकी सुनने की क्षमता पूरी तरह से विकसित नहीं हुई है। जब तक बच्चा पैदा होता है, तब तक वह गर्भ में आपकी आवाज को लगातार सुनने की वजह से पहचानने में सक्षम हो जाता है।

25वें सप्ताह के गर्भधारण के लिए टिप्स – Tips for 25th week of pregnancy in Hindi

अगर आपने अभी तक बच्चे का नाम सोचना शुरु नहीं किया है तो अब समय आ गया है कि आप एक लड़की और एक लड़के का अच्छा सा नाम सोच लें। क्योंकि इन दोनों में से कोई भी आपकी ज़िंदगी में आ सकता है। इसके लिए आप परिवार के सदस्यों, दोस्तों या इंटरनेट की मदद ले सकती हैं। अपने पति की भी इस काम में मदद लें। ऐसा करने से आप कुछ क्षण के लिए तीसरी तिमाही की शुरुआत में होने वाले दर्द आदि को भूल जाएंगी। किसी भी प्रकार की तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

प्रेगनेंसी के पचीसवें हफ्ते में डाइट – Diet for 25th week pregnancy in Hindi

शिशु और स्वयं को स्वस्थ रखने के लिए आपको अपने शरीर को विभिन्न पोषण देने की आवश्यकता होती है। कुछ पोषक तत्व केवल खाद्य पदार्थों से ही प्राप्त होते हैं और उन पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए आपको अधिक से अधिक उनका सेवन करने के लिए अपने आहार में उनकी मात्रा बढ़ाने की आवश्यकता होती है। कैल्शियम एक ऐसा पोषक तत्व है जो आपके बच्चे के सम्पूर्ण विकास, विशेष रूप से हड्डी और दांतों के विकास में योगदान करता है।

दुग्ध उत्पाद, हरी सब्जियां, पालक और हरी बीन्स आदि कैल्शियम के बहुत अच्छे स्रोत हैं।
दालें, राजमा, बादाम, अखरोट और अंजीर भी कैल्शियम के प्रमुख स्रोत हैं।
विटामिन डी, खाद्य पदार्थों से कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है, इसके लिए आप विटामिन ऑयली मछली (Vitamin oily fish), अंडे और दूध का सेवन कर सकती हैं।
ठंडाई और छाछ आदि पानी के अलावा पेय पदार्थों के सेवन के अच्छे विकल्प हैं। 

गर्भावस्था का 24वां सप्ताह – Pregnancy in 24 weeks in Hindi

गर्भावस्था के 24वें सप्ताह में आने पर दूसरी तिमाही का अंत और तीसरी तिमाही की शुरुआत का समय निकट होता है। बच्चे के जन्म में किसी प्रकार की जटिलता न हो इसलिए नियमित रूप से जांच कराते रहना चाहिए। गर्भकालीन डायबिटीज (Gestational diabetes) की जांच के लिए ग्लूकोज टेस्ट कराएं क्योंकि यह गर्भावस्था के समय ही होती है। लगभग 2-5 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं इससे ग्रस्त होती हैं इसलिए यह स्क्रीनिंग (टेस्ट) गर्भावस्था के 24वें और 28वें सप्ताह के बीच किया जाता है।

24वें हफ्ते की गर्भावस्था में शरीर में होने वाले बदलाव – Body changes in 24 week pregnancy in Hindi

24वें सप्ताह में कुछ महिलाएं ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन (Braxton Hicks contractions) का अनुभव करना शुरू कर देती हैं। ये कभी कभी गर्भाशय के तन (Tightening) जाने के कारण हैं। आपका पेट संभवत: पहले से थोड़ा अधिक दिखाई देने लगेगा क्योंकि इस समय वो लगभग दो इंच तक और बढ़ जाता है। जैसे जैसे आपके पेट और स्तनों के चारों ओर की त्वचा फैलती है, शुष्क होने के कारण उसमें खुजली भी होने लगती है।

अगर त्वचा के सूखेपन की बात करें तो कुछ महिलाओं को इस स्तर पर आंखें सूखने की शिकायत भी होती है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए चिकित्सक से परामर्श करके आंखों की ड्रॉप्स (Eye drops) का उपयोग करें। कई गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान दृष्टि के धुंधले होने का अनुभव होता है, लेकिन यह कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं है। म्यूकस झिल्ली (Mucous membranes) में सूजन के कारण, इस समय महिलाएं सर दर्द और बंद नाक से पीड़ित हो जाती हैं। डॉक्टर से सुझाव लेकर ही इनका उपचार करें।

चौबीसवें हफ्ते की गर्भावस्था में शिशु का विकास – Baby development in 24th week of pregnancy in Hindi

शिशु इस सप्ताह लम्बाई में लगभग एक फुट और आकार में मक्के की बाली के समान, लगभग 680 ग्राम (पिछले हफ्ते से लगभग 113 ग्राम अधिक) का होता है। मस्तिष्क के विकास के साथ साथ उसकी स्वाद ग्रंथियां और फेफड़े भी विकसित हो रहे होते हैं। फेफड़ों में मासपेशियां और कोशिकायें भी विकसित होने लगती हैं जिनसे एक रासायनिक एजेंट उत्पन्न होता है जिसे सर्फेक्टेंट (Surfactant) कहते हैं, जिसकी शिशु को गर्भ के बाहर सांस लेने के लिए आवश्यकता होती है। अगर एक बच्चा समय से पहले इस सप्ताह या आने वाले कुछ हफ्तों में जन्म लेता है तो इसकी कमी की वजह से साँस लेने में समस्या हो सकती है। उसकी आंखें अभी भी बंद होती हैं लेकिन वो अपने हाथों और पैरों से गतिविधियां करता है और स्पर्श पहचानने की योग्यता विकसित करता है। सिर के बाल अभी भी बढ़ रहे होते हैं और बच्चा अपने फेफड़ों से सांस लेने के अभ्यास करना शुरु कर देता है।

चौबीसवें हफ्ते के गर्भ का अल्ट्रासाउंड – Ultrasound of 24 weeks pregnancy in Hindi

अल्ट्रासाउंड में बाईं ओर बच्चे के हृदय के चारों कक्ष दिखाई देते हैं। दायीं ओर हृदय के ऊपरी कक्षों (एट्रिया) से निचले कक्षों (वेन्ट्रिकल्स) में बहने वाले रक्त का चित्र दिखाई देता है। वेन्ट्रिकल्स (Ventricles) की दीवारें एट्रिया (Atria) से अधिक मोटी होती हैं, क्योंकि बच्चे के फेफड़ों और शरीर के बाकी हिस्सों में रक्त इन्हीं के द्वारा पहुंचाया जाता है।

24वें सप्ताह के गर्भधारण के लिए टिप्स – Pregnancy tips for 24th week in Hindi

यदि आपने अभी तक प्रेगनेंसी योगा क्लासेस जाना शुरु नहीं किया है तो अब जाना शुरु कर दें। अगर आपको ऐसी क्लासेज का पता नहीं लग रहा है तो अपने डॉक्टर से इस बारे में बात करें।

प्रेगनेंसी के चौबीसवें हफ्ते में डाइट – Diet for 24th week of pregnancy in Hindi

इस समय सभी पोषक तत्वों की आवश्यकता बढ़ जाती है, जिसके लिए आपको विभिन्न प्रकार के फलों के साथ साथ कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और डेयरी खाद्य पदार्थ आदि का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा, कोलेस्ट्रॉल और विटामिन ए भी इस तिमाही में बहुत आवश्यक होते हैं।

विटामिन ए दृष्टि बढ़ाता है और कोशिकाओं के विकास में मदद करता है। विटामिन ए के लिए अपने दैनिक आहार में अंडे की जर्दी, दूध और दूध से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
गाजर, शकरकंद, पपीते और संतरों का सेवन करें जो विटामिन ए के भी बहुत अच्छे स्रोत हैं। 
कोलेस्ट्रॉल स्तर को बनाए रखें इससे समय से पहले डिलीवरी होने की संभावना कम होती है।
स्वस्थ पेय पदार्थों में आप तरबूज का रस, चुकंदर और गाजर का रस पी सकती हैं। लेकिन जहां तक संभव हो घर के बने जूस का ही सेवन करें। 

गर्भावस्था का 23वां सप्ताह – Pregnancy in 23 weeks in Hindi

आपने गर्भावस्था के 23वें सप्ताह में कदम रख लिया है और इस दौरान मां और बच्चे दोनों का वजन बढ़ना चाहिए। इसका मतलब है कि इस हफ्ते में आपका पेट यानी बेबी बंप और ब्रेस्ट दोनों ही कुछ और बड़े हो जाएगें। यह इस बात का संकेत है कि आपका शिशु गर्भ के अंदर बेहतर तरीके से विकसित हो रहा है। अगर आप गर्भावस्था के दौरान अपनी डाइट का ध्यान रख रही हैं, गर्भावस्था के दौरान बताए जाने वाले व्यायाम कर रही हैं और अपनी डॉक्टर की सलाह के मुताबिक प्रेगनेंसी में नियमित रूप से चेकअप के लिए जा रही हैं तो आपकी प्रेगनेंसी में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
वैसे तो प्रेगनेंसी के 23वें हफ्ते तक आते-आते गर्भवती महिलाओं का वजन भी बढ़ जाता है। लेकिन अगर कोई आपसे यह कह रहा हो कि प्रेगनेंसी के हफ्तों के हिसाब से आपका वजन बहुत कम या बहुत अधिक है तो दूसरों की बात सुनने की बजाए सिर्फ इतना याद रखें कि हर महिला का शरीर का गर्भावस्था का अनुभव अलग-अलग होता है। जब तक आपकी डॉक्टर आपसे ये कह रही हैं कि आप और आपका बच्चा पूरी तरह से ठीक है तो आपको वजन बढ़ने को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है।
अगर आप प्रेगनेंसी के इस समय पर पोषक तत्वों से भरपूर चीजों का सेवन करेंगी, सही तरीके से एक्सर्साइज करेंगी, अपनी और अपने होने वाले बच्चे की सेहत का ध्यान रखेंगी तो प्रेगनेंसी के बाद आपके लिए गर्भावस्था के दौरान बढ़े वजन को कम करना आसान होगा। 

बच्चे के विकास की बात करें तो इस समय तक आपका बच्चा किक करने लायक हो जाता है और बच्चे की श्रवण इंद्रियां भी इतनी विकसित हो चुकी होती हैं कि बच्चा, गर्भ में रहते हुए भी आपकी बातों को सुन सकता है। लिहाजा इस समय जितना हो सके अपने बच्चे से बातें करें, उसे गाना सुनाएं, और इन बातों को नोट करें कि कब आपका बच्चा सबसे ज्यादा ऐक्टिव रहता है और आपकी किन बातों पर प्रतिक्रिया देता है। प्रेगनेंसी के 23वें हफ्ते में वैसे तो भ्रूण का अल्ट्रासाउंड नहीं होता लेकिन अगर प्रेगनेंसी में कोई जटिलता हो या आपके गर्भ में एक से ज्यादा बच्चे हों तो अल्ट्रासाउंड हो सकता है। लिहाजा इस हफ्ते में आप रिलैक्स करें, गर्भावस्था की रूटीन को फॉलो करें और अपने बच्चे को बेहतर तरीके से जानने की कोशिश करें।
गर्भावस्था के 23वें सप्ताह में महिला को अपना और बच्चे का स्वास्थ्य जानने के लिए नियमित रूप से प्रसव पूर्व जांचों (Antenatal check ups) के लिए जाना चाहिए। जैसे जैसे दूसरी तिमाही समाप्त होने वाली होती है डॉक्टर के लिए ये जांचें करना आवश्यक हो जाता है।

23वें हफ्ते की गर्भावस्था में शरीर में होने वाले बदलाव – Changes in body during 23rd week of pregnancy in Hindi

बच्चे के बढ़ते वजन की वजह से आपका गर्भाशय लगभग 1½ इंच ऊपर आ जायेगा और जैसे-जैसे आपका गर्भाशय बड़ा होता जाता है आपको अपने फेफड़ों और ब्लैडर पर ज्यादा दबाव महसूस होने लगेगा। फेफड़ों पर दबाव की वजह से सांस फूलने लगती है जबकी ब्लैडर पर दबाव की वजह से प्रेगनेंसी के दौरान बार-बार पेशाब जाने की जरूरत महसूस होती है। इन दोनों ही चीजों की वजह से आपकी परेशानी बढ़ सकती है।
इस समय के आसपास अमीनियोटिक फ्लूइड लीक होने की भी आशंका रहती है जो कि चिंता का विषय है। हालांकि यह पहचानना मुश्किल होता है कि जो लीक हो रहा है वह यूरिन है या अमीनियोटिक फ्लूड। लिहाजा इस बात की जांच करते रहें और अमीनियोटिक फ्लूइड लीक हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

कई बार कमजोर गर्भाशय ग्रीवा की वजह से भी अमीनियोटिक फ्लूइड लीक होने लगता है, लिहाजा प्रेगनेंसी के 23वें हफ्ते के आसपास ग्रीवा के खुलने को चेक करवाना जरूरी होता है। इस दौरान अपनी पेल्विक मासंपेशियों को मजबूत बनाने के लिए पेल्विक फ्लोर एक्सर्साइज करना भी जरूरी होता है। इस हफ्ते आपको अपने पैरों को ऊपर रखना चाहिए ताकि सूजन न हो, पूरा आराम करना चाहिए, अच्छी तरह से स्वस्थ और संतुलित डाइट का सेवन करना चाहिए, एक्सर्साइज करनी चाहिए और पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

तेईसवें हफ्ते की गर्भावस्था में शिशु का विकास – Baby development in 23rd week of pregnancy in Hindi

गर्भावस्था के 23वें हफ्ते में गर्भ में पल रहे आपके शिशु की लंबाई सिर से लेकर पैर तक 28.9 सेंटिमीटर या 11.4 इंच के आसपास होती है। वैसे तो इस समय शरीर के बाकी हिस्सों की तुलना में शिशु का सिर बहुत बड़ा होता है लेकिन बाकी के अंग भी अब तक विकसित हो जाते हैं। बच्चे के वजन की बात करें तो इस समय तक बच्चे का वजन करीब 500 ग्राम हो जाता है और यहां से प्रेगनेंसी के बाकी के हफ्तों में बच्चे का वजन बढ़ना शुरू होता है। 
बच्चे की त्वचा में अब भी काफी झुर्रियां होती हैं लेकिन यह धीरे-धीरे भरने लग जाती है जैसे-जैसे बच्चे का वजन बढ़ने लगात है। आपके बच्चे की त्वचा पर मौजूद बाल अब गहरे रंग का होने लगता है और यह अल्ट्रासाउंड में नजर भी आने लगता है।
इस हफ्ते आप अपने गर्भ में बच्चे को घूमते हुए और किक मारते हुए महसूस कर सकती हैं। आपका बच्चा दिन के किस समय सबसे ज्यादा ऐक्टिव रहता है, कौन सी बातें उसे उत्तेजित करती हैं और कब वह प्रतिक्रिया देता है, इन सारी चीजों को नोट करके रखें। ऐसा करना इसलिए जरूरी है क्योंकि अगर आपका बच्चा कम किक मारता है या कम सक्रिय हो जाता है तो यह किसी खतरे का संकेत हो सकता है। ऐसे समय में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

तेईसवें हफ्ते के गर्भ का अल्ट्रासाउंड – Ultrasound at 23 weeks of pregnancy in Hindi

सोनोग्राफी में बच्चे के पैर उसकी छाती की ओर होते हैं। आप उसकी लगभग पूरी छवि देख सकती हैं। बच्चे के पूरे शरीर का चित्र निकालना अब मुश्किल हो सकता है क्योंकि अब वह लंबाई में 8 इंच से अधिक लम्बा हो गया है। आने वाले हफ्तों में उसका वजन बढ़ सकता है लेकिन अभी के लिए वह अपेक्षाकृत काफी पतला होता है।

23वें हफ्ते में गर्भावस्था के लक्षण – Pregnancy week 23 symptoms

गर्भावस्था की पहली तिमाही में जो लक्षण आपको महसूस होते थे जैसे- मॉर्निंग सिकनेस आदि वह सब आपको 23वें हफ्ते में महसूस नहीं होगा लेकिन आपको कई दूसरी चीजें अनुभव करनी पड़ सकती हैं। इन लक्षणों से पेश आने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि आप प्रसवपूर्व अपना पूरा ध्यान रखें, आराम करें और किसी भी तरह की जटिलता नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। गर्भावस्था के 23वें हफ्ते के सामान्य लक्षण ये हैं:
साइटिक तंत्रिका में दर्द: जैसे-जैसे आपके बच्चे का वजन बढ़ने लगता है, उसकी वजह से आपके साइटिक तंत्रिका (नसों में) पर अतिरिक्त भार पड़ने लगता है। यह नस, गर्भाशय के नीचे से शुरू होकर नीचे पैरों तक जाती है। इस वजह से साइटिक तंत्रिका नस के रास्ते में दर्द महसूस हो सकता है। यह दर्द लगातार बना रह सकता है या फिर आता-जाता भी रह सकता है।
वेरिकोज वेन्स: बच्चे के बढ़ते वजन और हार्मोन्स में होने वाले बदलाव की वजह से कुछ महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान वेरिकोज वेन्स की भी समस्या हो सकती है। इस स्थिति में पैरों की नसों में, योनिमुख या मलाशय की नसों में सूजन आ जाती है और त्वचा पर आपको ये नसें नीली या बैंगनी रंग की नजर आने लगती हैं। 
राउंड लिगामेंट पेन: प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में बहुत सी महिलाओं को ग्रोइन यानी पेड़ू और जांघ के जोड़ के हिस्से में या फिर पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द महसूस होता है जिसे राउंड लिगामेंट पेन कहते हैं। राउंड लिगामेंट एक स्ट्रेक्चर होता है जिसमें खिंचाव की वजह से यह दर्द होता है और चलने या गतिविधियां करने पर ज्यादा महसूस होता है। वैसे तो यह दर्द पूरी तरह से सामान्य है लेकिन फिर भी अगर आपको ज्यादा तकलीफ महसूस हो रही हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।
ब्रैक्सटन हिक्स संकुचन: वैसे तो इस तरह का गर्भाशय संकुचन गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में देखने को मिलता है लेकिन कई बार यह दूसरी तिमाही में भी हो सकता है। जब प्रेगनेंसी के दौरान इस तरह का संकुचन महसूस होता है तो गर्भाशय की दीवारें 30 या 60 सेकंड के लिए टाइट हो जाती हैं। कुछ संकुचन 2 मिनट तक का भी हो सकता है। अगर इस तरह का संकुचन बार-बार हो और साथ में तेज दर्द भी हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।
नींद से जुड़ी दिक्कतें: गर्भावस्था और लेबर पेन को लेकर तनाव और बेचैनी महसूस होने की वजह से दूसरी तिमाही में नींद से जुड़ी दिक्कतें भी हो सकती हैं। इसके अलावा दर्द, क्रैम्प्स, गर्भ में भ्रूण की गतिविधियां आदि भी गर्भवती महिला की नींद को खराब करने का काम करती हैं।
थकान: इस हफ्ते में थकान भी आपको ज्यादा महसूस होगी। वैसे तो दूसरी तिमाही में महिलाओं को कम थकान महसूस होती है लेकिन अगर आपको ज्यादा थकान लग रही हो तो परेशान न हों, आखिर आप अपने अंदर एक जीवन को बढ़ने में मदद कर रही हैं।
मेलास्मा: इसे मास्क ऑफ प्रेगनेंसी भी कहते हैं। गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में बहुत सी महिलाओं को मेलास्मा का अनुभव होता है। इस दौरान माथे पर, गाल में, नाक या होंठों पर अनियमित और गहरे रंग के निशान बन जाते हैं। गर्भावस्था के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से मेलास्मा होता है।
कई दूसरे लक्षण: ऊपर बताए गए सभी लक्षण आमतौर पर दूसरी तिमाही में होते हैं लेकिन पहली तिमाही के कुछ लक्षण भी हो सकता है कि बरकरार रहें या फिर ज्यादा गंभीर हो जाएं। वे लक्षण हैं- मसूड़ों से खून आना, मसूड़ों में सूजन, सीने में जलन, अपच और बदहजमी, पेट फूलना, कब्ज, ब्रेस्ट में सूजन, सिर में दर्द, नाक से खून आना, मूड स्विंग्स आदि।

गर्भावस्था के 23वें सप्ताह में ये चीजें जरूर करें – Tips for 23 weeks pregnancy in Hindi

गर्भावस्था के 23वें हफ्ते में कुछ चीजें ऐसी हैं जिन्हें आपको निश्चित तौर पर करना चाहिए ताकि प्रेगनेंसी का यह हफ्ता और गर्भावस्था के बाकी बचे दिन भी बेहतर तरीके से गुजरें:

अपने डॉक्टर से बात करें और पेल्विक फ्लोर एक्सर्साइज करना शुरू करें ताकि आपकी पेल्विक मांसपेशियां मजबूत बनें। साथ ही अपने गर्भाशय ग्रीवा की ओपनिंग को भी डॉक्टर से चेक करवा लें ताकि आपकी प्रेगनेंसी के बाकी बचे दिन सुरक्षित तरीके से गुजरें। वैसी महिलाएं जिनका सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) कमजोर होता है उन्हें डॉक्टर सर्वाइकल सरक्लाज यानी कमजोर ग्रीवा में टांके लगवाने की सलाह देते हैं ताकि सर्विक्स बहुत जल्दी न खुल जाए।
अगर आपको किसी भी तरह के संक्रमण का खतरा हो, अगर आपको खुद में डिप्रेशन या किसी और जटिलता के कोई भी लक्षण नजर आ रहे हों तो डॉक्टर से बात करें और उनसे पूछें कि क्या आप चेकअप के लिए आ सकती हैं। यह जरूरी है कि क्योंकि इलाज में देरी से बीमारी के लक्षण और भी गंभीर हो सकते हैं। लेकिन अगर समय पर इलाज हो जाए तो आपकी और बच्चे दोनों की सेहत बेहतर बनी रहेगी।
जहां तक संभव हो अपने लिए मैटरनिटी कपड़ों की व्यवस्था कर लें और टाइट-फिटिंग वाले कपड़े बिलकुल न पहनें क्योंकि इनकी वजह से पैरों में सूजन बढ़ सकती है जिस कारण दर्द ज्यादा होता है।

प्रेगनेंसी के तेईसवें हफ्ते का डाइट प्लान – Diet plan for 23 weeks pregnancy in Hindi

23वें हफ्ते का डाइट प्लान 21वें और 22वें हफ्ते की तरह ही होता है। अपने भोजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और डेयरी खाद्य पदार्थों को शामिल करें। इसके अलावा, विटामिन ए और कोलेस्ट्रॉल का सेवन भी ज़रूर करना चाहिए।

शरीर में कोलेस्ट्रॉल स्तर को बनाए रखना बहुत आवश्यक होता है क्योंकि यह प्लेसेंटा को स्वस्थ रखने में मदद करता है। 
तरल पदार्थों में तरबूज का रस, खुबानी शेक, चुकंदर और गाजर का रस पिएं लेकिन घर के बने जूस का ही सेवन करें इससे संक्रमण से बचने में मदद मिलती है। 
बीटा कैरोटीन के लिए गाजर, शकरकंद, पपीते और संतरों का सेवन करें। 
विटामिन ए लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करता है। अपने दैनिक आहार में अंडे की जर्दी, मक्खन और दूध आदि को शामिल करके आप विटामिन ए की पूर्ति कर सकती हैं।
ये चीजें न खाएं- गर्भावस्था के दौरान ऐसी चीजें न खाएं जो मना हो। खासकर कच्चे खाद्य पदार्थ जैसे- कच्ची मछली, कच्चा अंडा या कच्चा सीफूड और सॉफ्ट चीज। इन चीजों के सेवन से सैल्मोनेला और लिस्टेरिओसिस जैसे इंफेक्शन का खतरा अधिक होता है।

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