मोबाइल रेडिएशन के खतरे को कैसे कम करें

आज के समय में मोबाइल हम सब की अनिवार्य आवश्यकता बन गया है। हमारे लिए मोबाइल फ़ोन की जरूरत वैसे ही हो गयी है जैसे खाना और पानी। हमारा छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा काम आजकल हम अपने स्मार्ट फ़ोन से कर लेते हैं।

मोबाइल को बीसवीं सदी की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण खोज माना जा सकता है इसने न केवल हमारे काम को आसान बनाया है बल्कि हमारी बहुत सी जरूरतों को रिप्लेस कर दिया है। आपने ध्यान दिया होगा पहले के टाइम में लोगो को अलार्म घडी , कैलकुलेटर , टेबल पर एक छोटा सा कैलेंडर रखते हुए। आज के टाइम में इन सब के लिए आपका एक मोबाइल ही काफी है उसमे आप सब कुछ कर लेते है। मोबाइल फ़ोन के फायदे और खूबियों के बारे में हम सब जानते ही है पर क्या हम इनके डायरेक्ट और इनडायरेक्ट खतरों को जानते हैं।

एक अनुमान के मुताबिक हर साल लगभग सात मिलियन पक्षी मोबाइल टावर रेडिएशन से मारे जाते हैं । ये टावर टीवी और रेडियो का प्रसारण करते है और सेल फोन के सेलुलर नेटवर्क के लिए भी जरूरी होते हैं। कई बार इनसे रेयर बर्ड्स यानि दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों को भी नुक्सान होता है। रेडियोफ्रीक्वेंसी वेव्स, पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र यानि मैग्नेटिक फील्ड को डिस्टर्ब कर देती हैं, जिसका प्रयोग पक्षी अपने नेविगेशन के लिए करते हैं।

हाल के अध्ययनों से ये भी पता चलता है कि एक सेल फोन टॉवर और मोबाइल फोन हैंडसेट के रेडिएशन उत्सर्जन के कारण मधु मक्खियों पर भी दुष्प्रभाव हो रहे हैं। अधिकांश शोधकर्ताओं ने विकिरण प्रभाव यानि रेडिएशन के कारण मधुमक्खी में जैविक और व्यवहार संबंधी परिवर्तनों को भी बताया है।

स्पेन और बेल्जियम में हुए अध्ययनों ने पक्षियों पर सेल फोन मास्टर्स द्वारा उत्सर्जित इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन (ईएमआर) के दुष्प्रभाव को बताया है, पंजाब यूनिवर्सिटी में एक टीम द्वारा किये गए एक अध्ययन में पाया गया है कि ईएमआर पक्षी के अंडे और भ्रूण को नुकसान पहुंचा सकता है।

पक्षियों और एनवायरमेंट को बचाने के लिए हम कुछ कदम उठा सकते है जिससे उनपर रेडिएशन के खतरे को कम किया जा सके जैसे –

  • मल्टीपल सिम कार्ड्स का प्रयोग को कम करें क्योंकि ज्यादा सिम कार्ड्स के कारण ज्यादा रेडिएशन होता है।
  • निर्धारित सीमा से अधिक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन का उत्सर्जन करने वाले टावरों का निरीक्षण करें और गवर्मेंट इसे कम करने का प्रयास करें।
  • हर शहर में स्थापित किए जाने वाले टॉवर की अधिकतम संख्या को सीमित किया जाना चाहिए।

कुछ चिकित्सा उपकरणों यानि मेडिकल इक्विपमेंट जैसे पेसमेकर, इम्प्लांटेबल डिफिब्रिलेटर, के प्रयोग के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करने की सलाह दी जाती है ऐसा इसलिए क्योंकि इससे उनके संचालन यानि ऑपरेशन में व्यवधान उत्पन्न होने की संभावना होती है।

कुछ देशों ने उड़ान के दौरान विमानों पर केवल लाइसेंस प्राप्त मोबाइल फोन के इस्तेमाल को ही अनुमति दी हुई है ऐसा इसलिए है क्यूंकि मोबाइल फ़ोन्स के सिग्नल विमान के कम्युनिकेशन सिग्नल में बाधा डाल सकते हैं।

यह तो बात हुई की मोबाइल और मोबाइल टावर के रेडिएशन से हमारे आसपास क्या फर्क पड़ रहा है , अब बात करते हैं की इसके रेडिएशन का हमारी हैल्थ पर क्या प्रभाव हो रहा है ।

सेल फोन उपयोग के समय नॉन आयोनाइज़्ड रेडिएशन को उत्सर्जित यानि एमिट करते हैं। सेल फोन द्वारा उत्सर्जित रेडिएशन के प्रकार को रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) ऊर्जा भी कहा जाता है। यदि आरएफ रेडिएशन काफी अधिक है, तो इसका एक ‘थर्मल’ प्रभाव होता है, जिसका अर्थ है कि यह शरीर के तापमान को बढ़ाता है।

हालाँकि नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट का यह मत है की वैसे तो इस बात को कोई ठोस सबूत नहीं मिला है की नॉन आयोनाइज़्ड रेडिएशन से मनुष्यों में कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। फिर भी फोन द्वारा उत्सर्जित आरएफ रेडिएशन के निम्न स्तर से सिरदर्द या ब्रेन ट्यूमर जैसी समस्याएं हो सकती हैं ।

इस रेडिएशन के ह्यूमन ब्रेन यानि मानव मस्तिष्क पर पड़ने वाले प्रभाव को जानने के लिए वैज्ञानिकों ने कई रिसर्च की है, जिसमे ब्रेन एक्टिविटी में कुछ बदलाव , रेस्पॉन्ड टाइम यानी प्रतिक्रिया समय और नींद के पैटर्न पर इसके साइड इफेक्ट्स को पाया गया है।

सभी मोबाइल फ़ोन के रेडिएशन की मात्रा उस फ़ोन के मॉडल के आधार पर अलग अलग होती है। आप इसे स्पेसिफिक अब्सॉर्प्शन रेट यानि SAR के माध्यम से नाप सकते है। आपके फ़ोन की SAR वैल्यू जितनी कम होती है उससे उतना ही कम रेडिएशन होता है।

आप यूएसएसडी कोड * # 07 # डायल करके अपने स्मार्टफोन के SAR के संदर्भ में रेडिएशन लेवल की जांच कर सकते हैं, यदि एसएआर 1.6 वाट प्रति किलोग्राम (1.6 W/Kg) से नीचे दिखाता है तो यह ठीक है अन्यथा आपको अपना स्मार्टफोन तुरंत बदलने की सलाह दी जाती है।

मोबाइल फ़ोन के रेडिएशन के साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए हम कुछ महत्वपूर्ण बातो को ध्यान में रख सकते है जैसे –

  • जब नेटवर्क कम हो या बैटरी कम हो तब मोबाइल फ़ोन का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्यूंकि इस समय मोबाइल से रेडिएशन कई गुना ज्यादा एमिट होता है। इसलिए फ़ोन को चार्ज करके ही बात करें।
  • कॉल करते समय स्पीकरफ़ोन या हेडसेट का उपयोग करें।
  • अपना फ़ोन अपने शरीर के पास न रखें, जैसे कि जेब में न रखें।
  • मोबाइल को लेकर न सोएं , मोबाइल को कभी भी अपने तकिया के नीचे या सिरहाने न रखें।
  • कॉल लगाने के बाद कुछ सेकण्ड्स रुक कर मोबाइल को कान में लगाए, क्यूंकि मोबाइल कॉल कनेक्ट करने के पहले काफी इन्टेन्स रेडिएशन एमिट करता है और कनेक्ट होने के बाद इसकी तीव्रता कम हो जाती है।
  • जितना हो सके मोबाइल को एयरप्लेन मोड पर रखें। जैसे रात में मोबाइल को एयरप्लेन मोड में रख कर सोएं।
  • चार्जिंग के दौरान मोबाइल पर बात न करें क्योंकि ऐसे में मोबाइल से निकलने वाला रेडिएशन लेवल 10 गुना तक बढ़ जाता है।
  • यदि आप फ़ोन को अपनी जेब में वाइब्रेट मोड में रखते हैं तो यह आपके शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। कुछ रिसर्च में यह साबित हुआ है कि इसके कारण सिर में दर्द, पेट की समस्याओं और संतुलन में समस्या आने का खतरा बढ़ जाता है। लम्बे समय तक कंपन यानि वाइब्रेशन से tendons, मांसपेशियों, हड्डियों और जोड़ों में परिवर्तन हो सकते हैं, और यह तंत्रिका तंत्र यानि नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं। इसको हैंड-आर्म वाइब्रेशन सिंड्रोम (एचएवीएस) के रूप में जाना जाता है।
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