बॉडी डिटॉक्स और इसके तरीके

आजकल हमारी लाइफस्टाइल और हमारा वातावरण ये दोनों ही ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से हम कई तरह के टॉक्सिन्स के सम्पर्क में आ जाते हैं। यह टॉक्सिन्स यानि विषैले तत्त्व हमारे शरीर में कई तरह के रोग उत्पन्न करते हैं। यह साधारण सर्दी जुखाम , स्किन एलर्जी से लेकर कई बड़े रोगों का रूप भी ले सकते हैं। इनकी मौजूदगी ना सिर्फ हमारे कार्यक्षमता यानि एफिशिएंसी को कम करती है बल्कि हमारे इम्यून सिस्टम को भी कमजोर बना देती है। इसीलिए शरीर का डिटॉक्सिफिकेशन बहुत जरूरी होता है। डिटॉक्सिफिकेशन का मतलब है शरीर से सभी तरह के टॉक्सिन्स यानि विषैले तत्वों को बाहर करके शरीर को साफ़ करना।

हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से ही डिटॉक्सिफिकेशन सिस्टम होता है , इसका मतलब यह है की हमारा शरीर खुद ही अपने आप को detox कर सकता है इसके लिए हमे किसी बाहरी equipment या केमिकल की जरूरत नहीं होती। डिटॉक्सिफिकेशन सिस्टम में लिवर , किडनी ,इंटेस्टाइन , स्किन और फेफड़े प्रमुख अंग हैं। लिवर , हमारे शरीर के डिटॉक्सिफिकेशन सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण आंतरिक अंग है। इसके अलावा आंत यानि इंटेस्टाइन का काफी महत्वपूर्ण काम होता है बॉडी को डेटॉक्स करने में।

हम अब उन तरीकों के बारे में बात करेंगे जिनको अपनाकर आप बॉडी को डेटॉक्स करने में मदद कर सकते हैं। इन तरीकों के बारे में आपने सुना भी होगा और कुछ नए तरीके भी है जिनके बारे में आप जानना चाहते होंगे।

हैल्दी लाइफ स्टाइल अपनाकर – इस बारे में आपको पता ही है खाने में प्रोसेस्सेड और डिब्बाबंद चीज़ों का प्रयोग कम करके आप अपने भोजन में कई सारे केमिकल्स को कम कर सकते है। आप जानते ही है पैक्ड फूड्स की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए कई तरह के प्रिज़र्वेटिव्स का प्रयोग किया जाता है। इसी तरह जिन चीज़ों को कई तरह की प्रोसेसिंग के बाद खाने में प्रयोग किया जाता है उनमे भी नेचुरल पोषक तत्व खत्म हो जाते है इसके अलावा ऐसे खाने को डाइजेस्ट होने में बहुत ज्यादा समय लगता है और इनमे से कई पूरी तरह डाइजेस्ट भी नहीं होते और हमारे शरीर में टॉक्सिन्स के रूप में इकट्ठा होते रहते हैं। इसलिए खाने में नेचुरल फ़ूड को प्राथमिकता दें इसका अर्थ है खाने में फ्रूट्स वेजटेबल्स की मात्रा ज्यादा रखें।

योग और एक्सरसाइज करें – जैसा आपको पता ही है योग और एक्सरसाइज करने से बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है इससे हमारे फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और एक्सरसाइज करने से हम नेचुरल डिटॉक्सिफिकेशन की प्रक्रिया को किकस्टार्ट कर सकते हैं क्योंकि जब हम पसीना बहाते हैं तो वाइट ब्लड सेल्स को पंप करने के लिए बेहतर परिसंचरण को बढ़ावा देने वाला रक्त प्रवाह भी बढ़ता है और अंगों को प्रभावी ढंग से शुद्ध करने में मदद करता है।

इंटरमिटेंट फास्टिंग – यह तरीका आजकल वेट लॉस के लिए काफी लोग अपना रहें हैं। इसमें 24 घंटे में कुछ टाइम फास्टिंग रखना होता है इसका मतलब उस समय आपको उपवास रखना होता है। इसमें कई तरह के विकल्प होते है जैसे आप 16 घंटे फ़ास्ट रखें और 8 घंटे खाने के लिए होंगे उन आठ घंटो में आप जो चाहे खा सकते हो।इसे 16/8 कहते हैं। दूसरा विकल्प है एक दिन खाना और अगले 24 घंटे फास्टिंग और तीसरा तरीका होता है जिसमे सप्ताह में दो दिन आपको केवल 200 -300 कैलोरी ही लेना है इसे ज्यादा कैलोरी वाला खाना आपको नहीं खाना होता है। यह तरीका काफी पुराना है और लगभग सभी धर्मों में उपवास रखने का उल्लेख है चाहे वह हिन्दू धर्म हो , इस्लाम , ईसाई या बौद्ध धर्म। इसके पीछे एक सबसे बड़ा आधार है की जब शरीर फास्टिंग में होता है तो उस समय रिपेयर और डेटॉक्स का काम आसानी से करता है इसीलिए इंटरमिटेंट फास्टिंग वेट मैनेजमेंट के साथ ही कई तरह की मेटाबोलिक और हार्मोनल प्रोब्लेम्स को भी ठीक करने में प्रभावी होता है।

आयल पुल्लिंग , जिसे “कवला” या “गुंडुशा” के रूप में भी जाना जाता है, एक प्राचीन आयुर्वेदिक डिटॉक्स तकनीक है जिसमें लगभग 20 मिनट के लिए खाली पेट मुंह में एक बड़ा चम्मच तेल रखना है यहां आप नारियल का तेल या तिल या जैतून का तेल का प्रयोग कर सकते हैं। इस तेल को मुँह के अंदर भरकर उसे पूरे मुँह में घुमाते रहना है इसमें यह ध्यान रखना है की यह तेल आपको पीना नहीं है। 20 मिनट बाद इसे बाहर थूक देना है और समान्य या हल्के गुनगुने पानी से कुल्ला करलें। आयुर्वेद के अनुसार यह क्रिया मुख्य रूप से आपके शरीर में विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालती है, मुख्य रूप से डेंटल हेल्थ में सुधार करने के साथ साथ पूरे स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए काफी प्रभावी है।

क्योंकि हमारा बॉडी का डेटोक्सिफिकेशन सिस्टम खुद ही काफी प्रभावी है इसलिए अलग से कुछ करने के बजाये उन चीज़ों को हम अपनाकर अपने आपको डिटॉक्स कर सकते हैं जो बॉडी को डिटॉक्स करने में हेल्प करती है जैसे

  • अंडे, ब्रोकोली और लहसुन जैसे सल्फर युक्त खाद्य पदार्थ खाने से ग्लूटाथियोन के कार्य को बढ़ाने में मदद मिलती है, जो आपके शरीर द्वारा उत्पादित एक प्रमुख एंटीऑक्सिडेंट है।
  • मालिश भी डिटॉक्सिफिकेशन का काम करती है. मालिश करने से शरीर में रक्त संचार तेज़ होता है और विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं. अतः आप भी नियमित मसाज से अपनी बॉडी को डिटॉक्स करते रहे।
  • नींद पूरी लें इससे शरीर और दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ती है और बॉडी फिट रहती है और टॉक्सिन्स को बेहतर तरीके से खत्म करने में मदद मिलती है। नींद की कमी होने पर आपके शरीर के पास उन कार्यों को करने का समय नहीं होता है, इसलिए विषाक्त पदार्थों यानि टॉक्सिन्स को पहचानना और उनको पूरी तरह खत्म करना नहीं हो पाता।
  • आंत यानि intestine के हैल्दी होने के लिए उसमे प्रोबिओटिक्स नामक गुड बैक्टीरिया का मौजूद होना बहुत जरूरी है इसके लिए प्रीबायोटिक्स फ़ूड लेना जरूरी होता है। प्रीबायोटिक्स के साथ, हमारे गुड बैक्टीरिया, शॉर्ट-चेन फैटी एसिड नामक पोषक तत्वों को बनाने में सक्षम होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं।
  • प्रीबायोटिक्स से भरपूर आहार खाने से आपका पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है, जो उचित डिटॉक्सिफिकेशन और प्रतिरक्षा स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
  • पानी शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है, जोड़ों को चिकनाई देता है, पाचन और पोषक तत्वों को अवशोषित करता है, और अपशिष्ट उत्पादों को हटाकर आपके शरीर को डिटॉक्स करता है। इसलिए पर्याप्त पानी पीना बेहद जरूरी होता है।
  • सुबह ग्रीन टी , निम्बू पानी , शहद अदरक की चाय भी डिटॉक्स के लिए प्रयोग किये जाते हैं। यह मेटाबोलिज्म को तेज करके टॉक्सिन्स को शरीर से दूर करने में सहायक होते हैं।
  • चुकंदर और गाजर को मिलाकर इसका जूस बनाकर पीना भी हेल्थ के लिए अच्छा होता है। चुकंदर शरीर में ग्लूटेथिओन की मात्रा को बढ़ाने में मदद करता है। यह तत्व शरीर को डिटॉक्सिफाई करने में मदद कर सकता है। हालांकि इसमें काफी मात्रा में मिनरल्स की मौजूदगी के कारण इसका बहुत ज्यादा सेवन नुक्सान कर सकता है।
  • खीरा और पुदीना स्मूथी में थोड़ा सा निम्बू मिलाकर पीना भी बॉडी के डेटोक्सिफिकेशन में हेल्प करता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स फ्री रेडिकल्स को खत्म करते हैं।
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