डिप्रेशन से कैसे बचें

हम सभी कभी न कभी उदास, मायूस या कम अच्छा महसूस करते है। कभी किसी काम के न बन पाने से या कोई महत्वपूर्ण काम या एग्जाम में अपने मन मुताबिक प्रदर्शन न कर पाने,किसी से झगड़ा या मनमुटाव होने पर या कोई गलती होने पर दुखी होना बहुत स्वाभाविक होता है। यह उदासी या मायूसी हो सकता है आप कई दिनों तक महसूस करें। पर यदि आप बिना वजह यह सब अनुभव कर रहें हैं और यह कई महीनो या सालों से हो रहा है तो हो सकता है आप डिप्रेशन में हों।

डिप्रेशन यानी अवसाद सिर्फ एक मनोदशा नहीं है यह एक समस्या है जिसको यदि समय पर ठीक न किया जाए तो यह काफी गंभीर रूप ले सकती है। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे किसी बीमारी के कारण , किसी गंभीर चिंता से , जीवन में हुए किसी बड़े बदलाव से या अचानक कोई बहुत बड़ा भावनात्मक या आर्थिक संकट हो जाने से , किसी अन्य मेडिकल कंडीशन या ट्रीटमेंट के साइड इफ़ेक्ट से।

अब हम बात करते हैं उन लक्षणों की जिनसे आप यह पता लगा सकते हैं की आप या आपका कोई अपना इस समस्या तो नहीं जूझ रहा है।

  • हमेशा उदास या चिंतित रहना
  • हर छोटी छोटी बात के लिए खुद को दोषी मानना
  • किसी बात में मन न लगना
  • हमेशा थकान लगना
  • नींद नहीं आना या नींद कम हो जाना
  • कही भी फोकस ना कर पाना या ध्यान न रहना , खोये खोये रहने लगना
  • वजन का अचानक बढ़ने या घटने लगना
  • खुद को नुकसान पहुंचाने के ख्याल आने लगना

डिप्रेशन को दूर करने के लिए सिर्फ दवाइओं पर निर्भर रहना ठीक नहीं है। इसके लिए कुछ तरीके अपना कर भी आप डिप्रेशन की समस्या को दूर कर सकते हैं। अब आप सोचेंगे ऐसा कैसे हो सकता है तो ध्यान दीजिये डिप्रेशन का मूल कारण है किसी भी वजह से मस्तिष्क में उन केमिकल्स का बढ़ना जो तनाव बढ़ाते है और मन को उदास रखते हैं। हमे उन तरीको को अपनाना है जो हमारे मस्तिष्क में हैप्पी केमिकल्स को बढ़ाते हैं इसके लिए हमें क्या करना होगा तो आइये जानते हैं उन तरीकों के बारे में!

रोज़ अपने आप को एक अच्छा कॉम्प्लीमेंट दें। अपने बारे में एक अच्छी आदत के बारे में सोचें और एक ऐसी अच्छी बात भी सोचें जिसे आप अपने व्यक्तित्व में लाना चाहते हैं। रोज़ ऐसा करने से आप अपने मस्तिष्क को अपने आप पॉजिटिव सोचने के लिए प्रेरित करते हैं। अनेक रिसर्च में यह साबित भी हुआ है, की आप अपने बारे में कैसा सोचते हैं, कैसा महसूस करते हैं, इसका बहुत गहरा प्रभाव आपकी मनोदशा में पड़ता है।

अपनी पसंद का काम करें। सोचें क्या करना आपको ख़ुशी देता है , क्योंकि जब आप तनाव में होते हैं तो आपको कोई भी बात या कोई भी चीज़ अच्छी नहीं लगती। हममें से कई लोगों को म्यूजिक पसंद होता है पर जब हम परेशान होते हैं तो वो भी अच्छा नहीं लगता , ऐसा होता है। इसलिए सोचिये अभी आप क्या करते तो आपको अच्छा लगता जैसे कुछ नया बनाइए वो कोई डिश भी हो सकती है कोई पेंटिंग हो सकती है। यदि आपको शॉपिंग पसंद है तो एक लिस्ट बनाइये की आप क्या क्या लेना चाहते हैं।

विचारों की पहचान करें – सोचें आप जब बहुत उदास होते हैं तो मन में क्या चल रहा होता है। आपको अपने दिमाग को एक तरह से चेक करते रहना है और उन विचारों को पहचानना है जो आपको दुखी कर देते हैं। मन में चल रहे हर विचार को चेक करने की आदत डालें। नेगेटिव विचार से आपका मूड ख़राब या डिप्रेस्ड होता है। यह नॉर्मली हमारा दिमाग ही अपने अनुमान से ही बना लेता है। इसके लिए आपको उन विचारों का मन में एनालिसिस करना है और फिर आप पाएंगे की वह बात इतनी बड़ी नहीं है जिसके लिए आप बहुत ज्यादा सोच रहे हैं।

बहुत इमोशनल ना बने – कई बार हम ऑफिस में होने वाले काम या व्यवहार या बॉस की बहुत ज्यादा टोकने की या अक्सर होने वाली आलोचनाओं से बहुत आहत महसूस करने लगते है। कई बार घर में ही कई कामों में या बातों में किसी का बहुत ज्यादा गलतियां निकालना या हर बात के लिए हमे दोषी बताया जाता है तो हम न केवल दुखी हो जाते हैं बल्कि यह मान लेते है की मैं किसी काम का नहीं, मुझसे कुछ अच्छा नहीं होता , मुझे कोई काम करना नहीं आता। कई लोग इन सब परिस्थितियों में बेहद हताश और निराश हो जाते हैं।

खुद को प्रोत्साहित करें – अगर आपने कुछ बनाया और वह अच्छा नहीं बना तो कोई बात नहीं। आपने कही प्रेजेंटेशन दिया जो अच्छा नहीं रहा तो कोई बात नहीं। यह बिल्कुल ज़रूरी नहीं है की आप हमेशा बेस्ट करो। आपने कोशिश की यह अच्छी बात है। यह एक एक्सपीरियंस था, इससे सीख लेकर आगे बढ़िए। कभी गलती होना या कभी कोई काम औसत दर्जे का होना सामान्य है।

फैमिली से बात करें – अपनी परेशानी छुपाएं नहीं। अपने माता पिता ,भाई बहन या किसी अपने दोस्त से अपनी परेशानी शेयर जरूर करें। इससे आपका मन तो हल्का होता ही है साथ में उस समस्या का समाधान भी मिलता है। कई बार हम यह सोचकर की कोई समझेगा नहीं या कोई परेशान हो जाएगा या उनको दुःख होगा यह सब सोचकर अपनी प्रोब्लेम्स शेयर नहीं करते। आपकी फैमिली , आपके माता पिता आपको जरूर समझेंगे उन्हें बताइये आप किस बात को लेकर और क्यों परेशान हैं। हो सकता है जो प्रॉब्लम आप बहुत बड़ी मान रहे हो वह बहुत छोटी हो। इसलिए फैमिली में डिसकस जरूर करें।

आहार में बदलाव करें – अब हम यह बात जानते ही है की मन के उदास और दुखी होने का संबंध हमारे मस्तिष्क में पाए जाने वाले न्यूरोट्रांस्मीटर और कुछ केमिकल्स से भी होता है। यदि हम उन चीज़ों को खाने में शामिल करें जिनसे हैप्पी हॉर्मोन्स का सेक्रेशन बढ़ जाता है और हमे डिप्रेशन से लड़ने में काफी मदद मिलती है।

शोधकर्ताओं ने भी यह माना है कि हमारे भोजन का हमारे मन और मस्तिष्क पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। जैसे

  • विटामिन बी 6 ट्रीप्टोफन को सेरोटोनिन में बदलने के लिए महत्वपूर्ण हैं, सेरोटोनिन एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो मूड, सीखने, भूख जैसी भावनाओं के नियंत्रण में प्राथमिक भूमिका निभाता है।केला , पत्तागोभी , गाजर ,अंडे ,पिस्ता ,एवोकाडो ,पालक , अखरोट सभी अनाज में यह पाया जाता है।
  • मैग्नीशियम , हरे पत्तेदार सब्जियों , नट्स ,बीज ,एवोकाडो,साबुत अनाज और दही में पाया जाता है। मैग्नीशियम अनेक मेटाबोलिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और सेरोटोनिन को संतुलित करने में मदद करता है।
  • विटामिन डी मूड को अच्छा करता है और इसमें अवसाद रोधी यानी एंटी डिप्रेसेंट गुण होते हैं। वैसे तो धूप विटामिन डी का सर्वोत्तम स्त्रोत है और इसके साथ ही मशरूम में भी विटमिन डी पाया जाता है।
  • फोलिक एसिड की कमी से भी सेरोटोनिन के स्तर में गिरावट आती है। इसके लिए पालक , शलजम और उन चीज़ों को अपने खाने में शामिल करें जिनसे फोलिक एसिड मिलता है।
  • डार्क चॉकलेट भी मन अच्छा करती है क्योंकि यह एंडोर्फिन के स्तर को बढ़ाती है। डार्क चॉकलेट में भावनात्मक तनाव को कम करने की क्षमता होती है। इनसब के साथ ही अंगूर, संतरा, ब्लूबेरी, एवोकाडो, अलसी में भी मूड अच्छा करने वाले तत्व होते हैं।

स्थिर और शांत मन के लिए अच्छी नींद बेहद महत्वपूर्ण है । इसके लिए जरूरी है सुबह जल्दी उठें और रात में ज्यादा देर तक जागते ना रहें। सुबह जल्दी उठने से तनाव कम होने में मदद मिलती है।

प्राणायाम करें – रोज़ अपने आप को 10 मिनट दीजिये और घर में ही किसी शांत जगह पर प्राणायाम कीजिये यह मस्तिष्क के लिए किसी टॉनिक से कम नहीं है।

इनसब से भी अगर आपको कोई मदद नहीं मिलती तो आपको किसी मनोचिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।

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