कैसे करें डायबिटीज को कंट्रोल

आजकल के समय में कुछ समस्यांए इतनी आम हो गईं हैं की उनको हम ये मान कर चलते हैं की उम्र बढ़ने के साथ ये प्रोब्लेम्स तो होती ही हैं। डाइबिटीज़ भी उन्ही समस्याओं में से एक है।

डाइबिटीज़ /मधुमेह (शुगर) की बीमारी से देश के करोड़ों लोग पीड़ित हैं। लगभग हर किसी के घर परिवार में कोई न कोई शुगर पेशेंट तो होता ही है।पहले के समय में डाइबिटीज़ को बड़ी उम्र में होने वाला रोग माना जाता था पर आजकल ये कम उम्र में भी दिखने लगा है । मधुमेह के कारणों पर गौर करें तो पायेंगे की इसके लिए हमारी जीवन शैली सबसे बड़ा कारण है इसके अलावा कई मामलो में यह जेनेटिक भी होता है और कभी किसी मेडिकल स्थिति के कारण।

डाइबिटीज़ मतलब ब्लड में ग्लूकोस का सामान्य मात्रा से ज़्यादा होना। वैसे तो यह एक ही रोग है पर इसकी वजह से कई और गंभीर रोग होने का खतरा होता है जैसे रक्तचाप यानि बीपी का डिस्टर्ब होना, हार्ट रिलेटेड प्रोब्लेम्स ,किडनी रिलेटेड प्रोब्लेम्स ,आँखों की समस्या होना , कोई भी चोट या इन्फेक्शन का देर से ठीक होना, ब्रेन स्ट्रोक , पैरालिसिस , अल्ज़ाइमर का भी खतरा हो सकता है। इसलिए इसे कण्ट्रोल किया जाना बहुत ज़रूरी होता है।

डाइबिटीज़ के लक्षणों की अगर बात करें तो इसके शुरूआती लक्षण हैं-

ज़्यादा प्यास लगना

बार बार भूख लगना

जल्दी जल्दी इन्फेक्शन होना

थकान रहना

बार बार पेशाब आना

स्किन ड्राई होना और खुजली होना

वजन कम होने लगना

दवाइयों के साथ साथ डाइबिटीज़ को नियंत्रित रखने के मुख्य तरीके हैं – योग या एक्सरसाइज और सही आहार ।


योग अभ्यास जैसे कि आसन, प्राणायाम, मुद्राएं, बंध, ध्यान, ब्लड ग्लूकोस के स्तर को कम करने में सहायता करते है। शुगर को कण्ट्रोल करने के लिए नियमित रूप से प्राणायाम , सूर्य नमस्कार करें ।

सूर्य नमस्कार मधुमेह यानी डाइबिटीज़ से पीड़ित लोगों के लिए एक अत्यंत लाभकारी योगाभ्यास है क्योंकि यह ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करता है और शरीर में इंसुलिन के सेक्रीशन को ठीक करता है।

कपालभाति और प्राणायाम जैसे आसन का यदि नियमित रूप से अभ्यास किया जाए तो यह डाइबिटीज़ को नियंत्रित करने में काफी प्रभावी हैं। इसके लिए खाली पेट 15 से 30 बार तक इन आसनों का अभ्यास करना चाहिए।

अनुलोम विलोम 10 मिनट , मंडूक आसान 5-5 बार करें।रिसर्च में ये पाया गया है की योग के नियमित अभ्यास से टाइप 2 डाइबिटीज़ को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है इससे ब्लड ग्लूकोस के स्तर पर काफी सकारात्मक सुधार होता है।

अर्ध मत्स्येन्द्रासन ,धनुरासन (धनुष मुद्रा), वक्रसाना, मत्स्येन्द्रासन (आधा-रीढ़ की हड्डी को मोड़), हलासन (हल के मुद्रा) करने से पेट संकुचित होता है और पेन्क्रियास में इन्सुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाओं को ठीक करता है जिससे इंसुलिन का स्राव होने लगता है और इस तरह बिना किसी परिश्रम के मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

घरेलु उपचार

एक बड़ा चम्मच मेथी दाना एक गिलास पानी में डालकर रात भर के लिए रख दें , सुबह खाली पेट इस पानी को पियें और मेथी को चबाचबा कर खाएं। इसे लेने के पहले और बाद में 40-45 मिनट तक कुछ ना खाएं।

सावधानी – गर्मी के मौसम में मेथी कम खाना चाहिए। जिन्हे कफ, बदहज़मी ,अस्थमा, थाइरॉइड की शिकायत हो उन्हें मेथी नहीं लेना चाहिए। इसे लम्बे समय तक नहीं लेना है 3 महीने लेने के बाद 1 महीने रुक कर फिर शुरू कर सकते हैं।

मेथी – 200 gm ,अजवाइन– 100 gm , काली जीरी – 50gm । इस तीनो को अलग अलग भून लीजिये। अब इसे अच्छे से पीस कर मिलाकार चूर्ण बना लें। रात के खाने के दो घंटे बाद एक चम्मच इस चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ खाएं।

मेथी दाना1 बड़ा चम्मच , हल्दी – आधी छोटी चम्मच , दालचीनी – चुटकी भर
एक गिलास पानी में इनसब को डालकर उबाल लें और जब पानी आधा हो जाए , तो उसे रख लें । यह सुबह खाली पेट लेना है और इसके एक घंटे बाद तक कुछ नहीं लेना है।

करेले में एक इंसुलिन जैसा यौगिक होता है जिसे पॉलीपेप्टाइड-पी या पी-इंसुलिन कहा जाता है जो प्राकृतिक रूप से डाइबिटीज़ को नियंत्रित करने में सहायता करता है।

करेले का जूस पीने से ब्लड शुगर लेवल को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है। करेले को छीलकर उसमे से बीज और सफेद भाग हटा कर छोटे छोटे टुकड़े काट लें और इसे आधा घंटे के लिए ठंडे पानी में भीगा कर रखें और फिर इसमें आधा चम्मच नमक और निम्बू का रस डालकर जूस बना लें। इसे सुबह खाली पेट लें।

जौ के पानी में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में उपयोगी होते है। इसके लिए जौ को पानी में डालकर 15 मिनट के लिए गर्म करके रख लें और रोज़ इसे खाने के बाद पियें।

जामुन और इसके पत्ते ब्लड ग्लूकोस के स्तर को कम करने में काफी मददगार हैं। रोज़ लगभग 100 ग्राम जामुन का सेवन करने से आपके ब्लड ग्लूकोस लेवल में जबरदस्त सुधार आता है।

दालचीनी में एक बायोएक्टिव कंपाउंड होता है जो डाइबिटीज़ को रोकने में मदद कर सकता है। दालचीनी , इंसुलिन को प्रेरित करता है और ब्लड ग्लूकोस लेवल कम कर देता है। इसके लिए एक गिलास पानी में 2 इंच दालचीनी का टुकड़ा या या पाउडर भिगोएँ। इसे रात भर छोड़ दें और सुबह खाली पेट इसे पी लें।इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए इसका अधिक सेवन हानिकारक होता है।

गिलोय की २-२ गोली सुबह शाम लें या गिलोय का काढ़ा बनाकर भी पी सकते हैं।

इसके अलावा डाइबिटीज़ को नियंत्रित रखने के लिए हमें कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए जैसे तली हुई चीज़े , जंक फ़ूड , शहद , मिठाई,गुड़ ,कोल्ड ड्रिंक , मीठे बिस्कुट ,सॉस ,सूजी ,साबूदाना ,मखाने पैक्ड फ़ूड,मीठे फल नहीं खाना चाहिए।

प्रतिदिन पानी 8-10 गिलास पानी पियें और अपनी डाइट में हरी सब्जियों, फली वाली सब्जियों, शिमला मिर्च , टमाटर ,लोकि ,तोरई, गोभी,मटर , प्याज, लहसुन को शामिल करें। फलों में संतरा , मौसमी , अनार,जामुन ,पपीते का सेवन करें।

इस बात का ध्यान रखें की आप भूखे न रहें और एक बार में बहुत ज़्यादा न खाएं। छोटे छोटे मील्स लें और दिन में 4-5 बार खाएं। ब्रेकफास्ट बिलकुल स्किप ना करें।

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