आपके घर में बच्चे है तो इन 10 बातों का ध्यान रखें

बच्चे हमारी जान होते है और अपनी किलकारिओं से घर को और सुन्दर बनाते हैं। कभी कभी अपनी नादान हरकतों से सरदर्द भी बन जाते हैं , तो कभी अपनी भोली बातों से हमे खूब हसाते हैं। बच्चे मन के सच्चे होते हैं और दुनियादारी से अनजान होते हैं। इसलिए ये हमारा कर्तव्य बन जाता हैं की हम उनकी रक्षा करें।

बच्चो के अपहरण की घटनाएं तो आप सुनते ही रहते होंगे। कुछ माह से लेकर 13-14 वर्ष तक के बच्चो का अपहरण हो जाता है, कई बार कुछ बच्चे थोड़ी सी असावधानी के चलते भी खो जाते है।

अगर पूरे देश की बात की जाए तो नेशनल क्राइम ब्यूरो के अनुसार प्रति वर्ष हज़ारों की संख्या में बच्चो को अगवा कर लिया जाता है। इसमें से मात्र 25 से 30 प्रतिशत बच्चे वापस मिल पाते है।

  • तीन वर्ष से कम उम्र के बच्चों का ख़ास ध्यान रखना चाहिए। यह हमारी जिम्मेदारी होती है उन्हें बिल्कुल अकेला न छोड़ें। ये बच्चे बोल समझ नहीं पाते हैं। यदि आप कहीं बाहर, बाजार अथवा पार्क में जाते हैं उस समय भी ध्यान रखना ज़रूरी है।
  • कई बार ऐसा भी होता है की आप बच्चों को बाहर घुमाने ले जाते हैं और उस समय फ़ोन आने पर आपका ध्यान बच्चे से हटकर फ़ोन में ही हो जाता है इस स्थिति का फायदा उठा कर कोई बच्चे को उठाकर या फुसला कर वहां से गायब कर सकता है।
  • इसके अलावा छोटे बच्चों को कई बार चॉकलेट, टॉफ़ी या कोई और लालच देकर भी अपराधी बच्चा चोरी कर लेते हैं , ऐसे में बच्चों को किसी भी अनजान व्यक्ति से कुछ भी ना लेना सिखाएं।
  • 3 से 4 वर्ष तक के बच्चे कुछ बोल सकें, समझ सकें , उन्हें सर्वप्रथम पैरेंट का फ़ोन नंबर तथा घर का पता ज़रूर याद करा दें। इसका फायदा यह होगा की कभी यदि बच्चा कहीं खो जाता हैं तो कम से कम वो घर वापस आ सकता है।
  • कई बार देखा गया है स्टेशन या बस स्टैंड के प्रतीक्षालय में लोग बच्चो को लेकर खुद भी गहरी नींद में सो जाते है। बच्चा चोर इसी फ़िराक में रहते हैं , सोते समय वे बच्चे को लेकर चम्पत हो जाते हैं। इस बात का खास ध्यान रखें पब्लिक प्लेस में इस तरह बेफिक्र न रहें।
  • बच्चो का आधार कार्ड ज़रूर बनवाएं। जिससे बच्चो के फिंगर प्रिंट के साथ ही अन्य जानकारी भी रहेगी। बच्चा खोने या चोरी होने की स्तिथि में यह बहुत काम आएगी।
  • बच्चा यदि 5 वर्ष से 14 वर्ष के बीच हैं तो सर्वप्रथम आप एक कोड वर्ड बना लें , जिसकी जानकारी सिर्फ बच्चे एवं पैरेंट को होनी चाहिए।
  • यदि बच्चा पार्क या सोसाइटी में खेल रहा हैं , उस समय कोई अनजान व्यक्ति पास आकर कहे आपके पैरेंट का एक्सीडेंट हो गया हैं पापा हॉस्पिटल में हैं , मै तुम्हे लेने आया हूँ। उस वक़्त यदि बच्चा उस अनजान व्यक्ति से पहले पापा का पासवर्ड पूछता हैं उस स्तिथि में बच्चा चोर डर जाएगा फिर वो आगे ले जाने को कोशिश नहीं करेगा।
  • यदि बच्चे का हाथ भी पकड़ लिया उस स्थिति में बच्चा तुरंत उसके पैरों में मारने लगे या उसके पेट के नीचे मारे तो बच्चा छूट सकता है। फिर भी वह बच्चे को न छोड़े उस स्थिति में यदि बच्चा गिर जाए और उसके पैरो में लिपट जाए और शोर मचाने लगे उस स्थिति में वो भाग भी नहीं पाएगा और कोई न कोई मदद के लिए आ सकता है। कृपया नीचे वीडियो देखें :
  • बच्चे को समझाएं यदि घर पर वह अकेला है। कोई बाहर से दरवाज़ा खोलने के लिए बोले तो दरवाज़ा न खोले बल्कि तुरंत पैरेंट को फ़ोन करके अथवा पडोसी को फ़ोन करके बताए।
  • आजकल पैरेंट ऑफिस जाते हैं उस समय बच्चा घर पर अकेला रहता है। उस दौरान वो किसी को न बताए की वो इस वक़्त अकेला है। उस समय यदि कोई फ़ोन आए और पैरेंट से बात करना है ऐसा बोले तो बच्चे ये न बताएं की पैरेंट घर पर नहीं है। बल्कि बोले की पैरेंट अभी बिजी हैं थोड़ी देर में आपसे बात करेंगे। उनका नाम एवं फ़ोन नंबर पूछ कर डायरी में लिख लें।
  • आजकल कई तरह के जीपीएस ट्रैकर आते है जिनका प्रयोग करके आप अपने बच्चे का लोकेशन ट्रेस कर सकते हैं। यह डिवाइसेस काफी सुविधाजनक और किफायती होते हैं।

इन छोटी छोटी बातों के अलावा हमें बच्चों को हमेशा सतर्क रहना सिखाना चाहिए क्यूंकि आप हर जगह हर वक़्त उसके साथ मौजूद नहीं हो सकते। इसके आलावा बच्चों को सेल्फ डिफेन्स टेक्निक्स भी सिखानी जरूरी है जिससे वो किसी आपात स्थिति में अपना बचाव कर सके।

Subscribe

Published by

healthyme happyme

अगर अच्छा स्वस्थ्य आपकी मंज़िल है तो हम आपके इस सफर में आपके साथी है आप कैसा महसूस कर रहे हैं ये आपके हर दिन पे प्रभाव डालता है तो हम आपके साथ हैं आपके मार्गदर्शन के लिए और आपको प्रोत्साहित करने के लिए। आपका स्वस्थ्य आपके हाथ। HealthyMeHappyMe आपके स्वास्थय और शारीरिक क्षमताओं को और भी बेहतर बनाने के लिए आपकी मदद करता है।

Leave a Reply