घर में धन समृद्धि लाने वाले 6 असरदार तरीके

आज के समय में पैसा कितना जरूरी है यह हम सभी जानते ही हैं। हम सभी उसके लिए खूब मेहनत भी करते हैं। पर कभी कभी ऐसा लगता है जैसे काफी मेहनत के बाद भी हमारे पास उतना पैसा नहीं आ रहा या आता है और खर्च हो जाता है। पैसा हमारे पास रुकता नहीं है।

इसके अलावा एक और बात यह भी है की यदि घर में आपसी प्यार और सामंजस्य होता है वहाँ पॉजिटिव एनर्जी होती है पर कोई भी सोचेगा की कौन चाहता है घर में क्लेश या तनाव वाला माहौल हो पर कभी कभी कुछ न कुछ कारण से घर के सदस्यों के बीच टकराव होता है। यदि यह हमेशा ही रहता है तो हम कुछ ऐसे उपाय कर सकते हैं जिससे हम अपने घर की पॉजिटिविटी को बढ़ा सकते हैं।

इसके लिए फेंगशुई और वास्तु में कुछ टिप्स हैं जो न सिर्फ हमारे घर में प्रोस्पेरिटी और पॉजिटिविटी लाते हैं बल्कि हमारी इनकम को भी बढ़ाते हैं। इनके पीछे यह लॉजिक होता है की हमारे ऊपर हमारे आस पास की चीज़ों और दिशाओं की एनर्जी का प्रभाव पड़ता है। यदि हमारे घर ऑफिस में पॉज़िटिव एनर्जी बढ़ती है तो यह हमे अच्छी हेल्थ , खुशहाली , सम्मान और धन दिलाती है। इसके विपरीत नेगेटिविटी घर में लड़ाई , अशांति , बीमारी , तनाव और गरीबी को बढाती है। तो उसके लिए हम आज ऐसे ही कुछ आसान और बेहद प्रभावी टिप्स के बारे में बताते हैं जो फेंगशुई और वास्तु पर आधारित हैं और दुनिया भर में इन्हे काफी अपनाया जा रहा है।

1 मिरर – लिविंग एरिया और ऑफिस में ईस्ट या नार्थ डायरेक्शन में मिरर लगाने से धन का आगमन होता है। फेंगशुई के अनुसार मिरर यानी शीशे या दर्पण को डाइनिंग रूम में रखने से सम्पन्नता बढ़ती है। मिरर लगाते समय इस बात का भी ध्यान रखें की उसे कार्नर में ना लगाएं। इसे हमेशा ऐसी दीवार पर लगाए जहा से उसमे सुन्दर दृश्य दिखे। ऐसा इसलिए माना जाता है क्यूंकि मिरर में अच्छी और पॉजिटिव वाइब्स वाली चीज़े दिखने पर वैसी ही एनर्जी बढ़ने लगती है। इसके अलावा यह भी ध्यान दिया जाता है की मिरर को कभी भी किचन या अपने वर्क प्लेस पर न लगाएं ऐसा करने पर आपका वर्क लोड बढ़ सकता है।

2 नेचुरल प्लांट्स – घर और ऑफिस के एंट्रेंस के दोनों तरफ प्लांट्स रखना वास्तु के अनुसार पैसे में वृद्धि करता है। वास्तु और फेंगशुई के अनुसार कई ऐसे प्लांट्स होते हैं जो धन के आगमन को बढ़ाते हैं। इन प्लांट्स को अपने घर और ऑफिस में रखना भी काफी अच्छा होता है। यह प्लांट्स घर की हवा को तो शुद्ध रखते ही हैं साथ ही प्रॉस्पेरिटी यानी समृद्धि को बढ़ाने के लिए भी जाने जाते हैं। मनी प्लांट , जेड प्लांट , लकी बैम्बू ऐसे ही प्लांट्स में से एक हैं। यह सभी इंडोर प्लांट्स है और इनकी देखरेख भी आसान होती है।

3 विंड चाइम्स – वास्तु और फेंगशुई में विंड चाइम्स का बहुत महत्व है। विंड चाइम्स को घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, कोई भी वास्तु दोष के प्रभाव को कम करने और सामंजस्य लाने के लिए इनका उपयोग कर सकता है। ऐसा माना जाता है की मेटल विंड चाइम को नॉर्थ, वेस्ट या नॉर्थ वेस्ट जोन में लगाना चाहिए। जब हम पश्चिम दिशा में विंडचाइम को लगाते हैं, तो यह फ़ैमिली में सौभाग्य यानी फार्च्यून को बढ़ाता है और फ़ैमिली मेंबर्स को सम्मान दिलाता है। लकड़ी यानी वुडेन विंड चाइम्स पूर्व, दक्षिण पूर्व और दक्षिण दिशा में लगाना अच्छा होता है। ऐसा माना जाता है की वुडेन विंड चाइम्स को पूर्व यानि ईस्ट में लगाने से यह ग्रोथ को बढ़ाता है और दक्षिण पूर्वी यानी साउथ ईस्ट डायरेक्शन में लगाने पर पैसा लाता है जबकि दक्षिण यानी साउथ में रखने पर फेम यानी प्रसिद्धि बढ़ती है।

4 लाफिंग बुद्धा – इनको धन समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इनको अपने ड्राइंग रूम में इस तरह रखना चाहिए जिससे इनका फेस एंट्रेंस की तरफ हो। लाफिंग बुद्धा जो बोरी या गठरी लिए रहते है , यह माना जाता है कि वह बोरी धन और सौभाग्य का प्रतीक है। आमतौर पर लाफिंग बुद्धा की मूर्ति को दरवाजे के सामने रखा जाता है। उनका बड़ा पेट सुख, भाग्य और समृद्धि का प्रतीक है। इसे उपहार के रूप में प्राप्त करना आवश्यक नहीं है। आप इसे खरीद भी सकते हैं।

5. क्रिस्टल लोटस – फेंगशुई में, क्रिस्टल लोटस सकारात्मक ऊर्जा का उत्सर्जन करने और फ़ैमिली बॉन्डिंग को स्ट्रांग करने के लिए जाना जाता है क्योंकि क्रिस्टल पृथ्वी तत्व का है, यह धरती माता के आशीर्वाद का प्रतिनिधित्व करता है। यह पर्यावरण को शुद्ध करता है और परिवार के सदस्यों को एक शांत मानसिकता प्रदान करेगा और उन्हें जीवन में उनके लक्ष्य को प्राप्त करने में सक्षम बनाता है । इसे लिविंग रूम, मुख्य हॉल या बेडरूम के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में रखना वैवाहिक जीवन को भी सुखी बनाता है और जीवन साथी को वफादार बनाता है।

6. क्रिस्टल ट्री– फेंग शुई जेमस्टोन ट्री को फेंग शुई क्रिस्टल ट्री भी कहा जाता है। फेंगशुई के अनुसार जेम ट्री को साउथ ईस्ट यानी दक्षिण पूर्व कॉर्नर में रखा जाना चाहिए जिससे घर में संपत्ति और समृद्धि बढ़ती है। जबकि नार्थ वेस्ट यानी उत्तर पश्चिम में रखने से घर के मुखिया के करियर में ग्रोथ होने लगती है.

घर को हमेशा सुगन्धित और खुशबूदार रखें। फेंगशुई के अनुसार सुगन्धित वातावरण पॉजिटिविटी को आकर्षित करता है। जिसका संबंध धन और सम्पन्नता से भी होता है। इसके लिए आप ताजे फूलों , अगरबत्तियों , एसेंशियल ऑयल्स का प्रयोग कर सकते हैं।

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सर्दियों के 10 सुपरफूड जो आपको रखें स्वस्थ और एनर्जेटिक

सर्दियों का मौसम वैसे तो काफी अच्छा होता है पर यही वो टाइम भी होता है जब हमे अपने खान पान का खास ख्याल रखना चाहिए। चाहे छोटे बच्चे हों या बड़ी उम्र के लोग सर्दियों में कुछ समस्याएं जैसे जोड़ों में दर्द , सर्दी जुकाम , स्किन ड्राई होना , बालों का झड़ना और पुरानी चोट का दर्द वापस आना वगैरह बढ़ने लगती है। इसीलिए हमे अपने खाने में कुछ चीज़ों को शामिल करके इन समस्याओ को आसानी से कम कर सकते हैं। पारम्परिक इंडियन फ़ूड में कई ऐसी चीज़ें हैं जो सर्दियों में न सिर्फ हमारे शरीर को मौसम के अनुसार जरूरी पोषक तत्व प्रदान करके हमे सारा टाइम एनर्जेटिक और फिट रहने में मदद करती है बल्कि हमारे इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग बनाकर हमे बीमार होने से बचाते हैं।

अब बात करते है उन 10 सुपर फूड्स की जो विंटर में हमे स्ट्रांग और फिट रखने में हेल्प करते हैं।

बाजरा बाजरा में प्रोटीन , फाइबर , आयरन , पोटाशियम , मैग्नीशियम , कैल्शियम, विटामिन बी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा यह ग्लूटेन फ्री होता है और डाइबिटीज़ , अस्थमा के रोगियों के लिए काफी अच्छा होता है। आयुर्वेद के अनुसार बाजरा गर्म तासीर का होता है। बाजरा लम्बे समय तक पेट भरा रखता है , इसके हाई फाइबर कंटेंट के कारण डाइजेशन को इम्प्रूव करता है , एनीमिया को दूर करता है , इम्युनिटी बूस्ट करता है , हड्डियों को मजबूत बनाने में हेल्प करता है। इन सब गुणों के कारण इसे सर्दियों में खाना काफी हैल्दी होता है। बाजरा को हम नार्मल आटे में मिलाकर, या बाजरे के आटे की रोटी या बाजरे के लड्डू के रूप में प्रयोग कर सकते हैं।

तिल – तिल को गर्म तासीर , हाई कैलोरी और बहुत सारे न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होने के कारण इसे विंटर फ़ूड की लिस्ट में रखा जा सकता है। इसमें कैल्शियम , मैग्नीशियम , आयरन , फॉस्फोरस के साथ ही पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड होते हैं जो एनर्जी लेवल को बूस्ट करते हैं। इसके साथ ही इसमें हाई फाइबर कंटेंट होता है जो डाइजेशन में हेल्प करता है और कॉन्स्टिपेशन को दूर करता है। तिल को हम कई तरीको से अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं जैसे तिल के लड्डू , सलाद में स्प्रिंकल करके , भून कर भी खा सकते हैं। हालाँकि जिनको किडनी स्टोन की प्रॉब्लम हो उनको तिल का प्रयोग कम करने की सलाह दी जाती है।

गोंद – अपनी गर्म तासीर के कारण , सर्दियों में गोंद शरीर की गर्मी को बनाए रखने में हेल्प करता है इसके साथ ही गोंद में घावों को भरने के गुण होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, गोंद स्टैमिना और ओवरआल हेल्थ को बढ़ाता है जो सर्दी खांसी की समस्या को दूर रखने में सहायक होता है। इसके अलावा कैल्शियम और प्रोटीन की मौजूदगी के कारण यह कमर दर्द , पीठ दर्द , और जोड़ों के दर्द को दूर करने में भी बेहद प्रभावी होता है।

हरी सब्जियां – ज्यादातर हरी पत्तेदार सब्ज़िया चाहे वो पालक हो , मेथी हो या बथुआ ,चौलाई , मूली के पत्ते सरसों यह गर्म तासीर की होती हैं। पत्तेदार हरी सब्जियां विटामिन, मिनरल्स और फाइबर से भरपूर होती है। पत्तेदार साग से भरपूर डाइट लेने से मोटापा, हृदय रोग, हाई बीपी और कमजोरी से राहत मिलती है। इसके साथ ही हरी सब्जियां आँखों को स्वस्थ रखती है , हड्डियों और बालों को मजबूत बनाती है। इनको हम साग के रूप में , सलाद , ग्रीन स्मूथी , वेजिटेबल स्टॉक , या आटे में मिलाकर पराठे या पूरी के रूप में भी ले सकते हैं।

घी – आयुर्वेद के अनुसार घी हमारी हेल्थ के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है इसमें एसेंशियल फैटी एसिड होते है जो हमारी सेहत के लिए लाभकारी होते है , इसके अलावा इसके सेवन से याददाश्त में सुधार होता है। घी में मौजूद ब्यूटेरिक एसिड के कारण इम्युनिटी यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और आंत यानि इंटेस्टाइन को हैल्दी रखता है। घी में विटामिन E ,D, K और विटामिन A पाए जाते हैं जो ब्रेन पावर , इम्यून सिस्टम , आँखों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी होते है। इसके साथ ही घी गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है।

शहद शहद को भी गर्म प्रकृति का माना गया है। शहद आपके पूरे शरीर को गर्माहट प्रदान करता है। कई रिसर्च में यह पाया गया है की शहद सर्दी जुकाम खांसी में तुरंत राहत देता है और किसी भी कफ सिरप के मुकाबले तेजी से आराम देने के साथ ही सर्दी खांसी से पीड़ित बच्चों में जल्दी नींद आने में भी प्रभावी होता है। इसके अलावा शहद में एंटी बैक्टीरियल , एंटी वायरल प्रॉपर्टीस होती हैं। इसीलिए इसका प्रयोग कई तरह की होम रेमेडीज में किया जाता है। शहद को काली मिर्च के साथ , दालचीनी के साथ लेने से गले की खराश में राहत मिलती है। सुबह खाली पेट गर्म पानी में शहद डाल कर पीने से बॉडी डेटॉक्स होती है और इम्युनिटी बढ़ती है। दूध में शहद का प्रयोग करने से स्टैमिना बढ़ता है और इसके साथ ही शहद का प्रयोग ड्राय स्किन की प्रॉब्लम को दूर करने में भी होता है। शहद में कई एंटीऑक्सीडेंट्स होते है जो हमे कई तरह के इन्फेक्शन से बचाते है।

मसाले – हल्दी , दालचीनी , काली मिर्च , अदरक , लहसुन , लौंग , लाल मिर्च तेज पत्ता , अजवाइन , जीरा , हींग, केसर । ज्यादातर मसाले गर्म प्रकृति के होते है और इनका सेवन भी शरीर को गर्म रखने में मदद करता है। इसके साथ ही इन सभी मसालों में इम्युनिटी बढ़ाने के गुण होते है। ज्यादातर मसाले कई तरह के मेडिसिनल प्रॉपर्टी से भरपूर होते हैं। इसीलिए इनके सामान्य खाने में प्रयोग के साथ ही काढ़े और सूप में लेना भी सर्दियों में शरीर की रोग रोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। हल्दी कफ को दूर करती है इसमें एंटीसेप्टिक , एंटी बायोटिक और एंटी एलर्जिक गुण होते है। इसके अलावा हल्दी में दर्दनाशक गुण भी पाया जाता है।

गुड़ हमारी इम्युनिटी को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, साथ ही हमारे शरीर में आवश्यक मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट और मिनरल्स का निर्माण करता है। गुड़ में ज़िंक, आयरन और सेलेनियम अच्छी मात्रा में पाया जाता है। भोजन के बाद थोड़ी मात्रा में गुड़ खाने से डाइजेशन में हेल्प मिलती है क्योंकि यह पाचन प्रक्रिया में एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य कर सकता है। गुड़ की गर्म तासीर के कारण इसे सर्दियों में ज्यादा खाया जाता है। इसके साथ ही कई सारे डॉयफ्रुइट्स के साथ इसे मिलाकर खाने से यह एनर्जी और न्युट्रिशन से भरपूर होते है।

नवरंगी या नौरंगी दल, उत्तराखंड की एक विशेष दाल है। यह प्रोटीन और फाइबर में भरपूर होती है और मैंगनीज, फॉस्फोरस, पोटेशियम, आयरन और तांबा जैसे कई महत्वपूर्ण मिनरल्स ,अच्छी मात्रा में फोलेट और बी-विटामिन होते हैं। यह भी गर्म तासीर की होती है इसीलिए इसे सर्दियों में ही खाया जाता है। इसका बनाने का तरीका काफी कुछ राजमा जैसा होता है पर इसका स्वाद थोड़ा अलग होता है।

कुलथी दाल एक प्रकार की दाल है, जिसे हार्स ग्राम के नाम से भी जाना जाता है। इसका रंग गहरा भूरा होता है और देखने में मसूर की दाल की तरह लगती है। दक्षिण भारत के कुछ प्रमुख व्यंजनों जैसे रसम आदि बनाने के लिए इसे प्रयोग में लाया जाता है। बुखार और सर्दी के लिए इस दाल का प्रयोग पारंपरिक दवाई के रूप में सदियों से किया जा रहा है। कुलथी दाल न सिर्फ सर्दी-बुखार से निजात दिलाने का काम करती है, बल्कि गले के संक्रमण को दूर करने का काम भी कर सकती है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार कुलथी की दाल का पानी भी सर्दी-खांसी से छुटकारा दिला सकता है।

इनसब के साथ ही गाजर , चुकंदर , शकरकंद , जैसे और कंद सब्जिओ को भी हम कई तरह से अपने आहार में शामिल कर सकते हैं। इसके अलावा ड्राई फ्रूट्स और हाई कैलोरी फूड्स का भी प्रयोग हम इस मौसम में कर सकते है।

कब्ज दूर करने के 7 असरदार उपाय

कॉन्स्टिपेशन आजकल काफी कॉमन प्रोब्लेम्स में से एक है। कॉन्स्टिपेशन यानी हमारे डायजस्टिव सिस्टम का ठीक प्रकार से काम न करना। हर किसी को कभी न कभी यह प्रॉब्लम होती ही है पर कई बार यह प्रॉब्लम इतनी ज्यादा होती है की इसकी वजह से कई और हेल्थ प्रॉब्लम होना स्टार्ट हो जाती है।

हम जो भी खाते है हमारा डाइजेस्टिव सिस्टम उसको डाइजेस्ट करके उसे एनर्जी में बदल देता है। यानी हम जो भी भोजन लेते है उससे हमारा शरीर nutrients यानि पोषक तत्वों को अब्सॉर्व कर लेता है और इस प्रक्रिया में जो भी टॉक्सिन्स और वेस्ट पदार्थ होते है उनको मल यानी स्टूल के रूप में शरीर से बाहर कर देता है पर जब इस सिस्टम में कुछ प्रॉब्लम हो जाती है तो ऐसा नहीं हो पाता जिसे कॉन्स्टिपेशन या कब्ज कहा जाता है।

इसकी वजह से सुस्ती , आलस रहना, किसी काम में मन न लगना , कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कॉन्स्टिपेशन के कारणों की अगर बात करें तो इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे – पानी कम पीना , नींद पूरी न होना , खाने में फाइबर की कमी , किसी दवाई के साइड इफ़ेक्ट के कारण , ठंडा भोजन करने से, ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी न करने से , स्मोकिंग या शराब के ज्यादा सेवन से , भोजन में हैल्दी फैट की कमी के कारण , मेदा और जंक फ़ूड के ज्यादा सेवन , इसके अलावा चिंता या तनाव में रहना भी हमारे डाइजेस्टिव सिस्टम को बिगाड़ सकता है इसका कारण यह है की हमारे ब्रेन और डाइजेस्टिव सिस्टम एक दूसरे को प्रभावित करते है।

हम इन कारणों को जान कर उससे जुड़ी सावधानियों को अपनाकर इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं जैसे नींद पूरी लें , खाने में सलाद को जरूर शामिल करें , हैल्दी फैट जैसे दूध और घी और संतुलित मात्रा में वेजिटेबल आयल का प्रयोग करें , रेगुलर एक्सरसाइज या वाक या योग करें , कोशिश करें की खाना कम मसाले और कम तेल में बना हुआ लें और जंक फ़ूड का सेवन ज्यादा न करें। इसके साथ ही कम से कम 10 गिलास पानी जरूर पियें। मैदा और फ्रोजेन मीट का प्रयोग कम करें।

खाने का टाइमिंग फिक्स रखें यानी अपने ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर का टाइम फिक्स करें और उसी समय पर खाना खाये। खाने का रूटीन सही नहीं होने से भी कब्ज और दूसरी डाइजेस्टिव सिस्टम रिलेटेड प्रोब्लेम्स होने लगती है।
अपनी डाइट में एक से अधिक अनाजों को शामिल करें जैसे गेहूं , चावल , मुंग , रागी , ज्वार , बाजरा , मक्का , चना। इससे आपको सभी के पोषक तत्व मिल पाते हैं और फाइबर भी पर्याप्त मात्रा में मिलता है।

खाना खाते समय जल्दबाजी न करें। खाना आराम से बैठकर और अच्छे से चबा कर खाएं। इसके अलावा अपने खाने में दही और फर्मेन्टेड फ़ूड को शामिल करें , यह नेचुरल प्रोबिओटिक्स से भरपूर होते है प्रोबिओटिक्स यानी गुड बैक्टीरिया जो हमारे डाइजेशन में हेल्प करते हैं। इसके अलावा टोमेटो सूप , वेजिटेबल स्टॉक्स का सेवन भी कॉन्स्टिपेशन को कम करने में प्रभावी होता है। खाने के बाद अजवाइन या सौंफ चबा कर खाएं।

अब बात करते है कुछ घरेलु उपायों की जिनको अपना कर आप अपनी कॉन्स्टिपेशन यानि कब्ज की समस्या को कम कर सकते हैं।

डेट्स यानी खजूर को रात भर पानी में भीगाकर रखें और सुबह इसको मसलकर उसी पानी के साथ इसको खाली पेट पियें।

रात में सोने से पहले भुने हुए जीरे और अजवाइन को पीसकर रखलें। एक चम्मच इस पाउडर को गुनगुने पानी के साथ लें। इसके अलावा अलसी को भूनकर उसका पाउडर बना कर रख लें और रात में सोने से पहले अलसी के पाउडर को गर्म पानी के साथ ले सकते हैं। ये दोनों तरीके इंटेस्टाइन को साफ़ करने के साथ ही पूरे डाइजेस्टिव सिस्टम को ठीक करते हैं।

किशमिश को रात भर पानी में भिगो कर रखें और सुबह खाली पेट इन भीगी हुई किशमिश को खालें। इससे कब्ज से राहत मिलती है। यहाँ आप किशमिश की जगह मुनक्के का प्रयोग भी कर सकते है।

दोपहर में खाने के बाद थोड़ा गुड़ व घी मिलाकर खाएं। गुड़ में आयरन और घी में वसा यानी फैट होता हैं। इन दोनों का मेल आंतों को साफ रखने में हेल्प करता है। इसके अलावा 3 से 4 बजे के आसपास तरबूज या नाशपाती खाना भी पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में हेल्प करता है।

अंजीर में भरपूर मात्रा में फाइबर्स होते है जो की पाचन के लिए काफी अच्छा होता है। अंजीर को 2-3 बादाम के साथ कुछ घंटे भीगा कर रखें और रात में सोने से पहले इन भीगी हुई अंजीर और बादाम का पेस्ट बनाकर एक चम्मच शहद के साथ खाएं। इससे कब्ज दूर होता है।

सौंफ का प्रयोग भी कब्ज को दूर करने में काफी प्रभावी होता है। इसके लिए सौंफ को थोड़ा सा भूनकर उसका पाउडर बनाकर किसी एयरटाइट डब्बे में रखलें और नियमित रूप से आधा चम्मच इस पाउडर को गर्म पानी के साथ लें।

सेब , अमरूद , पपीता , पालक , मेथी को नियमित रूप से लें। यह सभी पाचन को अच्छा बनाते हैं और कब्ज को दूर करते हैं। इसके अलावा इसबगोल और त्रिफला चूर्ण का प्रयोग भी कब्ज दूर करने में किया जाता है।

ये कुछ घरलू उपाय हैं जिनको अपना कर हम कॉन्स्टिपेशन की प्रॉब्लम को दूर कर सकते हैं। यदि आपको लगातार कई दिनों तक कब्ज की समस्या रहती है और किसी भी उपाय से आपको कोई फायदा नहीं होता तो आपको डॉक्टर से सलाह जरूर लेना चाहिए। इसके अलावा यदि आपको सीवियर कॉन्स्टिपेशन के साथ ही पेट दर्द या वजन तेजी से कम होने जैसे लक्षण हो तो आपको तुरंत मेडिकल सलाह की जरूरत है।

Q. कब्ज या कॉन्स्टिपेशन किस स्थिति को कहा जाता है?

Ans. यदि लगातार तीन या इससे ज्यादा दिन तक पेट साफ़ नहीं होता तो इसे कॉन्स्टिपेशन कहा जाता है। इससे ज्यादा समय तक मल के शरीर के अंदर रहने से स्टूल यानी मल बहुत ज्यादा सख्त हो जाता है जिससे उसका बाहर निकलना और भी दर्द दायक होता है।

Q. डॉक्टर को कब दिखाना जरूरी हो जाता है?

Ans. यदि लगतार एक सप्ताह से ज्यादा समय तक पेट साफ़ नहीं हुआ और पेट में अकड़न , दर्द हो या टॉयलेट के टाइम बहुत ज्यादा दर्द और खून आता हो इसके साथ ही तेजी से वजन कम हो रहा हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाया जाना चाहिए।

Q. कॉन्स्टिपेशन या कब्ज में कौन से ड्रिंक्स फायदा करते हैं ?

Ans. गुनगुने पानी में नीम्बू डाल कर पियें या अदरक को पानी में उबाल कर उसमे शहद और एक चुटकी काला नमक डाल कर पियें। इसके अलावा छाछ , सौंफ का पानी , अजवाइन का पानी , एलोवेरा जूस भी कब्ज दूर करने में प्रभावी होते है। इसके अलावा गर्म दूध में थोड़ा सा घी डाल कर सोने से पहले पियें।

Q. कौन से योगासन से कब्ज / कॉन्स्टिपेशन दूर होता है ?

Ans. पवनमुक्तासन , मालाआसन , बालासन, मत्स्यासन ,नौकासन

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