सर्दी खांसी के उपाय

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मौसम का बदलना वैसे तो बहुत ही खुशगवार होता है, पर स्वास्थ्य के हिसाब से ऐसे समय काफी सजग रहने की जरूरत होती है क्योंकि कई लोगों को इस समय सर्दी, खांसी , जुकाम जैसी समस्याएँ होने लगती है। सर्दी के लक्षणों में खांसी आना , गले में खराश , हल्का बुखार होना, नाक बंद होना , नाक बहना और छींक आना शामिल होता है।

वैसे तो खांसी की समस्या सर्दि‍यों में ज़्यादा होती है, लेकिन यह कई अन्य बीमारियों के कारण भी हो सकती है-

जैसे साधारण सर्दी जुकाम ,

अस्थमा ,

वायरल इन्फेक्शन ,

टीबी,

किसी तरह की एलर्जी

आपकी खांसी का प्रकार आपको इसके कारण का संकेत दे सकता हैं।

जैसे- आपकी खांसी कैसी महसूस होती है जैसे गीली या सूखी ,

खांसी कब होती है, रात में, खाने के बाद, या व्यायाम करते समय

आपको खांसी कितने समय से चल रही है जैसे १५ दिन से कम है या एक डेढ़ महीने से है या २ महीने से ज्यादा हो गया है।

यदि आपको गीली खांसी है, तो आपको खांसी के साथ मुंह में बलगम आएगा। गीली खाँसी कम से कम 3 सप्ताह या इससे पुरानी हो सकती है और बड़ों में ये 8 सप्ताह से अधिक और बच्चों में 4 सप्ताह तक रह सकती है।

सूखी खांसी अक्सर ज़्यादा मुश्किल होती है और लंबे समय तक बनी रह सकती है। सूखी खांसी में साँस लेने के मार्ग में सूजन या जलन होती है, लेकिन बलगम नहीं आता है।

अब बात करते है कुछ घरेलु उपायों के बारे में जिन्हे अपनाकर हमें खांसी में राहत मिल सकती है।

गीली खांसी होने पर बच्चो को सोने से आधे घंटे पहले १चम्मच शहद देने से उसे खांसी में आराम मिलता है और नींद आ जाती है।

बड़ों को गीली खांसी में २-४ दाने काली मिर्च पीस कर १ चम्मच शहद में मिला कर खाना चाहिए।

सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी घोल कर पीना चाहिए। इसका कारण है हल्दी में कर्क्यूमिन नामक तत्त्व का पाया जाना, जिसमे एंटी-वायरल, एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो संक्रमण को खत्म करने में हमारी मदद करता है , इससे सर्दी खांसी से राहत मिलती है।

सूप , चाय और कॉफ़ी जैसी गर्म तरल पदार्थ गले में खराश और खरोंच को तुरंत राहत प्रदान करते हैं।

नमक पानी का गरारा भी सूखी खांसी में राहत देता है इसके लिए आपको १ गिलास गुनगुने पानी में चुटकी भर नमक डाल कर उससे गरारा करें। इसे आपको दिन में कई बार करना होता है।

सुबह खाली पेट एक गिलास हल्दी वाला गर्म पानी पियें इससे आपका इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और इन्फेक्शन जल्दी ख़त्म होता है।

अदरक के रस को हल्का सा गर्म करके उसे शहद के साथ मिला कर खाने से भी सूखी खांसी में आराम मिलता है।

दालचीनी , लोंग ,अदरक , काली मिर्च और तुलसी के पत्तो को चाय में डाल कर काढ़ा पियें।

मुलेठी की चाय पीने से सूखी खांसी में आराम मिलता है। इसके लिए दो बड़ी चम्मच मुलैठी की सूखी जड़ को एक मग में रखें और इस मग में उबलता हुआ पानी डालें। 10-15 मिनट तक रखें। दिन में दो बार इसे लें। आप रेडीमेड मुलेठी चाय भी ले सकते हैं।

पीपल की गांठ को भी सूखी खांसी में लाभकारी माना गया है। इसके लिए एक पीपल की गांठ को पीस लें और उसे एक चम्मच शहद में मिलाकर खा लें या फिर पीपल की छाल का पाउडर लें। इससे कुछ ही दिन में सूखी खांसी ठीक हो जाएगी।

यदि खांसी काफी समय से चल रही है तो उसके लिए आप गिलोय के रस को 2 चम्मच पानी में डाल कर रोजाना सुबह पियें ।इससे धूम्रपान, प्रदूषण या पराग से एलर्जी के कारण होने वाली खांसी में राहत मिलती है।

इसके अलावा खुद को हाइड्रेट रखें , ज़्यादा से ज़्यादा गर्म चीज़ो का सेवन करें ,

आधा चम्मच शहद में, नींबू की कुछ बूंद और एक चुटकी दालचीनी मिलाकर लें।

खाने में उन चीज़ो को शामिल करें जिनसे जिंक मिलता है जैसे साबुत अनाज, टोफू , फलियां, नट्स और बीज,फोर्टिफाइड ब्रेकफास्ट अनाज और डेयरी उत्पाद।

वैसे तो इनसब उपायों को अपनाकर आप सर्दी खांसी से आसानी से छुटकारा पा सकते है लेकिन यदि आपको इन सब उपायों से आराम नहीं मिल रहा है तो आपको डॉक्टर की सलाह ज़रूर लेनी चाहिए।

दाँतों में दर्द

दाँतों में दर्द होना , दाँतों की सामान्य समस्या है। इसमें कभी तो दांत में कीड़ा लग जाने अथवा मसूड़ों में सूजन की वजह से हो सकता है।

अकसर दाँतों में दर्द गंदगी इकट्ठा होने से सड़न होने लगती है , सड़न ही अम्ल पैदा करने वाले बैक्टीरिया में बदल जाते हैं, जिससे दाँतों की जड़ें प्रभावित होने से दांत में दर्द होने लगता है। कभी दांत टूटने अथवा नए दांत आने से भी दांत में दर्द हो सकता है।

कभी-कभी ज़्यादा ठंडी या ज़्यादा गरम चीज़ें खाने के कारण दांत संवेदनशील हो जाते है और दर्द होने लगता है। संक्रमण के कारण लोगों के दांत और मसूड़ों से खून आने लगता है। अगर दर्द तेज़ होने लगे और मसूड़ों में सूजन आने लगे तो तुरंत उसका इलाज डॉक्टर से कराना चाहिए।

मुख्य कारण

  • अधिक अम्लीय चीज़ों का सेवन करना भी दांत दर्द का कारण हो सकता है।
  • मसूड़ों और दाँतों के आस पास फोड़ा होने से संक्रमण हो सकता है।
  • जब अक्ल दाढ़ निकलती है उस समय मसूड़ों में दबाव बढ़ जाता है, उससे भी दर्द हो जाता है।
  • दांत पीसने अथवा चबाने की आदत से भी दाँतों में फ्रेक्चर हो सकता है , उससे भी दर्द हो सकता है।
  • दाँतों में दरार आने या टूटने के कई कारण हो सकते है जैसे – गिरने से , कोई फेंकी गई चीज़ लगने से।
  • खेल कूद के दौरान या किसी कठोर चीज़ को दाँतों से काटने की कोशिश करने से। फ्रेक्चर हुए दांत में दर्द हो रहा है इसका मतलब दांत का फ्रैक्चर नीचे नसों तक हो गया है, इसी कारण दर्द हो रहा है।

दाँतों में दर्द न हो इसके लिए कुछ ध्यान में रखने वाली बाते।

• दाँतों की नियमित सफाई करना।
• खेल कूद या अन्य गतिविधियों के दौरान यदि डेंटल गॉर्ड पहन ले तो दाँतों में होने वाली चोट या घाव से बचा जा सकता है।
• खाना खाने के बाद भोजन के कुछ कण दाँतों में फंसे रह जाते है, इसके लिए खाने के बाद ब्रश करें या अच्छे से कुल्ला करें , तो भी यदि कुछ कण रह जाए तो डेंटल फ्लॉस (दांत साफ़ करने का धागा ) की मदद से निकाल सकते है।

• स्वस्थ आहार ले

•चीनी और स्टार्च के पदार्थ यदि आपके दाँतों में चिपका रह जाए तो इनसे बैक्टीरिया पनपते है , इसलिए इन चीज़ों का इस्तेमाल सावधानी से करें और नियमित रूप से नरम ब्रश द्वारा ब्रश करें।
• धूम्रपान ना करें , यह बहुत ही हानिकारक होता है। इससे दाँतों में पीलापन तथा मसूड़ों में तकलीफ हो सकती है। और दांत कमज़ोर होते है।

घरेलू उपाय

  • गुनगुने पानी में थोड़ा नमक डाल कर कुल्ला करने से आपको होने वाले इन्फेक्शन से बचा जा सकता है, दाँतों के बीच फ़सा भोजन भी निकलता है और मसूड़ों के बैक्टीरिया भी ख़त्म होते है।
  • लौंग को थोड़ा कूट कर दर्द वाले स्थान पर रखकर मुंह में दबाने से अथवा लौंग के तेल को रुई में लगा कर दाँतों में दबा कर रखने से राहत मिलती है।
  • अदरक के टुकड़े में थोड़ा नमक लगा कर उसे दाँतों के बीच रख सकते है, उससे भी राहत मिलती है। अदरक में एंटी बैक्टीरियल प्रॉपर्टी होती है।
  • लहसुन का एक छोटा टुकड़ा ले कर दाँतों के बीच रखने से भी राहत मिलती है।
  • गर्म उबले पानी में टी बैग रख कर फिर उसे निकलकर दर्द वाले भाग की सिंकाई करने से , दाँतों के दर्द में आराम मिलता है।
  • कुछ बूंदें सरसों के तेल में चुटकी भर नमक मिलकर दाँतों व् मसूड़ों की मसाज करें , इससे दांत दर्द में तो आराम मिलता ही है साथ ही मसूड़े भी मजबूत होते है।

गंभीर लक्षण

  • मुँह खोलने में भी यदि दर्द महसूस हो तो।
  • घरेलु उपचार करने के दो दिन बाद भी दर्द बना रहे तो।
  • असहनीय दर्द हो तो।
  • दर्द के कारण बुखार हो अथवा कानो तक दर्द होने लगे तो।
  • उक्त लक्षणों के होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाए।

परहेज़

  • डिस्प्रिन, ब्रुफिन या दर्द की कोई भी दवा सीधे दाँतों या फिर मसूड़ों पर न रखें , ये दवाई रखे हुए स्थान को जला सकती है।
  • गरमागरम चीज़ें का खाएं।
  • कुछ समय के लिए मीठा खाना बंद कर दें क्यूंकि मिठाई वगैरह बैक्टीरिया बढ़ाने का काम करती है।
  • खुद किसी प्रकार का पैन किलर दवाई न लें, डॉक्टर की सलाह पर ही लें।

नोट :

अधिक दर्द होने पर कुछ भी खाने में दिक्कत होती है और दर्द भी बढ़ता है अतः

  • कोई भी सूप लें सकते है।
  • दाल, दलिया, खिचड़ी लें सकते हैं।
  • उबला आलू या सिका हुआ आलू लें सकते है या फिर आलू को दही के साथ मिलाकर भी खा सकते है।
  • पनीर भी खा सकते हैं।
  • ब्रेड भी लें सकते हैं, चाय अथवा दूध के साथ या फिर सैंडविच अंडा, पनीर ,पीनट बटर के साथ लें सकते हैं।

5 कारण हम दर्द भरे नग्मे क्यों पसंद करते है

दुःख एक ऐसी भावना है जो प्रारम्भ से ही इंसानी सभ्यता में सामान रूप से दिखाई देती है। फिर चाहे वो इंसान किसी भी धर्म का हो या किसी भी देश का हो। क्रोध, खुशी, और उदासी जैसी बुनियादी भावनाएं इंसान जन्म से ही अनुभव करता आया है और आगे भी करता रहेगा। संगीत या गानो में इन बुनयादी भावनाओ को समझना काफी आसान होता है । उदाहरण के लिए, एक उदास और दर्द भरा गीत सुनने से किसी श्रोता में उदासी की भावना उत्पन्न हो सकती है । उदासी को आमतौर पर एक नकारात्मक भावना के रूप में देखा जाता है। लेकिन हम इसे एक तरह से आनंददायक भी पाते हैं, आज हम इसी विरोधाभास के बारे में बात करेंगे ।

कुछ अध्ययनों से पता चलता है की उदास संगीत की प्रतिक्रिया में आनंद एक या अनेक कारणो से हो सकता है।

नास्टैल्जिया

उदास संगीत, हमारे पास्ट या अतीत की यादों को ट्रिगर केर देता है। जिससे हमारी पुरानी यादे ताज़ा हो जाती है और ये हमारे मुड़ को भी बदल देता है। इसका असर तब ज़यादा होता है जब ये यादें हमारे महत्वपूर्ण पलो से जुडी होती है जैसे की हमारी स्कूल या कॉलेज के टाइम की यादें। हम कल्पनाओं के माध्यम से इन यादों की मिठास का आनंद लेते हैं। अच्छे समय को याद करने में हमें ख़ुशी तो महसूस होती ही है , साथ ही साथ उस वक़्त के चले जाने का दुःख भी होता है।

प्रोलैक्टिन

जैविक स्तर पर, उदास संगीत हार्मोन प्रोलैक्टिन से जुड़ा हुआ है। जो रोने की भावना से जुड़ा है और दुःख को रोकने में मदद करता है। दुःख भरे गीत से हमारा मस्तिष्क प्रोलैक्टिन हार्मोन को सक्रिय केर देता है और वास्तविक स्थिति में अगर हम दुखी नहीं है तो ये हार्मोन हमें मानसिक सुख और मन को शांति का अनुभव कराता है।

सहानुभूति

उदास सगीत हमको इसलिए भी अच्छा लगता है क्योकि ये हमे सहानभूति का अनुभव कराता है। सहानुभूति को मोटे तौर पर एक ऐसी प्रक्रिया के रूप में हम देख सकते है जिसके द्वारा हम दूसरे व्यक्ति के दुःख को अनुभव करते है। यदि हम किसी का दुःख देखते है तो हमे उससे सहानभूति होती है और हमारे अंदर सहायता करने की या फिर दुःख बाटने की भावना पैदा होती है। वैसे ही दुःख बारे नग्मे सुनने से भी हमारे अंदर सहानभूति की बह्व्ना उत्पन्न होती है।

मूड रेगुलेशन

उदास संगीत, मूड रेगुलेशन के माध्यम से मनोवैज्ञानिक लाभ प्रदान करता है। यदि कोई व्यक्ति दुखी हो तो उसका घ्यान उसकी परिस्थितिओ से हट के संगीत की मधुरता पर केंद्रित करता है। इसके अलावा ,अगर गाने के बोल व्यक्ति की वर्तमान स्थिति को स्पष्ट करते है तो , वे अपनी भावनाओं या अनुभवों को आवाज दे सकते हैं, खुद दुःख को व्यक्त न कर पा रहे हो।

एक दोस्त

संगीत में साथी या दोस्त का अनुभव और आराम प्रदान करने की क्षमता है। जब लोग इमोशनल परेशानी में होते हैं या अकेलापन महसूस करते हैं, या जब वे खराब मनोदशा में होते हैं, तो लोग उदास संगीत अधिक सुनते हैं। उदास संगीत को एक काल्पनिक दोस्त के रूप में अनुभव किया जा सकता है जो किसी दुखद घटना या अकेलेपन के अनुभव के बाद समर्थन और सहानुभूति का अनुभव प्रदान करता है।

संक्षेप में, संगीत में भावनाओं, मनोदशा, स्मृति और ध्यान को प्रभावित करने की क्षमता होती है। यहां तक की संगीत का उपयोग मनोविज्ञानिक एक थेरेपी की तोर पे भी करते है। म्यूजिक या संगीत को सुनने से किसी तनाव या दुःख को झेलने में मदद मिलती है। एक तुलनात्मक अध्ययन में लोगो को दो ग्रुप में बाँट दिआ गया , एक ग्रुप को स्ट्रेस और डिप्रेशन की दवाइआ दी गई और दूसरे ग्रुप को मधुर संगीत सुनाया गया। और ये पाया गया की जिस ग्रुप को संगीत सुनाया गया वो दूसरे ग्रुप के मुकाबले जल्दी प्रतिक्रिया देने लगा और ठीक होने के लक्षण दिखाने लगा।