जोड़ों के दर्द को दूर करने वाले 10 असरदार उपाय

जोड़ों का दर्द एक समय में बड़ी उम्र में होने वाली परेशानी मानी जाती थी पर आज कल यह हम कम उम्र में भी देख रहे हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे किसी चोट के कारण, फिज़िकल एक्टिविटी कम होना , खाने में कुछ न्यूट्रिएंट्स की कमी होना या फिर किसी कारण से उन न्यूट्रिएंट्स का शरीर में सही अब्सॉर्प्शन न होना, यह कारण किसी दवा के साइड इफ़ेक्ट या किसी हार्मोनल असंतुलन से भी हो सकता है।
अक्सर हमे इसके लिए योग या एक्सरसाइज की सलाह दी जाती है पर यदि दर्द पहले से ही है , तो यह करना मुश्किल हो जाता है। इसके लिए हम अपने खाने में उन चीज़ो को शामिल कर सकते है जो हमे इस दर्द से आराम देने में मदद करती हैं। इसके साथ ही कुछ ऐसे आसान और असरदार घरेलु उपाय भी होते हैं जिनसे हम इस समस्या से काफी हद तक निजात पा सकते हैं।

  • अखरोट , न्यूट्रिशनऔर ऐसे कंपाउंड्स से भरपूर होते हैं जो जॉइंट पेन और जोड़ों की सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। अखरोट में काफी मात्रा में ओमेगा -3 फैटी एसिड होते हैं, जो गठिया के लक्षणों को दूर करने के साथ-साथ सूजन को भी कम कर सकते हैं। अखरोट को रात भर पानी भीगा कर सुबह खाली पेट भीगे हुए अखरोट को खाने से घुटनो के दर्द में आराम मिलता है और उम्र बढ़ने के साथ होने वाले जोड़ों के दर्द से भी बचा जा सकता है।
  • Poppy seed / खसखस – कॉपर और कैल्शियम से भरपूर होने के कारण, खसखस ​​हड्डियों की सेहत को बेहतर बनाने में मदद करता है। बीजों में मौजूद मैंगनीज प्रोटीन कोलेजन के उत्पादन में मदद करता है जो हड्डियों को गंभीर नुकसान से बचाता है। खसखस का प्रयोग मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में दर्द, गठिया, और इस तरह की अनेक बीमारियों में दर्द निवारक के रूप में किया जाता है।
  • अदरक – चाय , सूप , सब्जी और अनेक व्यंजनों में स्वाद को बढ़ाने के आलावा अदरक में एंटी इन्फ्लैमटॉरी प्रॉपर्टीज होती है जो इसे एक असरदार नेचुरल पैन किलर बनाता है। अदरक को ताजे, पाउडर के रूप में या सूखे रूप यानी सोंठ के रूप में सेवन करने से गठिया के लक्षणों को कम करने में सूजन और सहायता कम होती है। 2001 में की गयी एक स्टडी के अनुसार ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित कुछ पैशेंट्स को अदरक का अर्क यानि उसका एक्सट्रेक्ट दिया गया और उसके प्रभाव का एनालिसिस किया गया। और यह पाया गया की 63% लोगों को घुटने के दर्द में इससे काफी आराम मिला।
  • गोंद , विटमिन डी की कमी को दूर करने के साथ ही जोड़ों को लुब्रिकेट करने में और बैक पेन के साथ ही सभी जोड़ों के दर्द को कम करने में बेहद प्रभावी माना जाता है। इसके साथ ही आयुर्वेद के अनुसार गोंद स्टैमिना और ओवरआल हेल्थ को बढ़ाता है।
  • अजवाइन में एंटी इंफ्लेमेटरी कंपाउंड की मौजूदगी के कारण यह जोड़ों के दर्द और गठिया रोग से राहत के लिए काफी असरदार होता है इसमें ऐसे गुण भी होते हैं जो सर्दियों के दौरान अत्यधिक दर्द से राहत देने में मदद करते हैं। इसके लिए हम एक चम्मच कैरम सीड या अजवाइन को पीसकर पेस्ट बनाकर इसे दर्द वाली जगह पर लगा सकते हैं। इसके अलावा अजवाइन का पानी पिया जा सकता है।
  • एप्पल सिदार विनेगर – एक चम्मच एप्पल सिदार विनेगर को ओलिव आयल में मिक्स करके दर्द वाले स्थान पर मसाज करने से जॉइंट पैन में राहत मिलती है। एप्पल सिडार विनेगर में कैल्शियम ,मैग्नीशियम, पोटेशियम और फास्फोरस पाया जाता है और यह जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने में बेहद प्रभावी होता है।
  • हल्दी शहद और चूने का लैप – इसके लिए आधा चम्मच हल्दी , एक चम्मच शहद और थोड़ा सा खाने वाला चूना मिलाकर एक-दो चम्मच पानी मिलाकर एक स्मूथ पेस्ट तैयार कर लें। इस पेस्ट को एक चम्मच लेकर इसे घुटनो पर मालिश करे और किसी कॉटन के कपड़े को उसके ऊपर बांध कर रात भर के लिए लगा रहने दें।
  • 150ml तिल के तेल में एक चम्मच मेथी के बीज , कलोंजी के बीज और आधा चम्मच हल्दी को मिलाकर इसे गिलास कंटेनर में स्टोर करके बीस दिनों के लिए ऐसी जगह रखें जहाँ धूप न लगे। बीस दिन तक इसे इस तरह रखने पर तेल में मेथी , कलोंजी और हल्दी के गुण अच्छे से मिल जाते हैं। इस तेल को किसी साफ़ कॉटन की पट्टी में लेकर ऐसे दर्द वाली जगह पर बाँध लें। घुटनो के दर्द या किसी भी हड्डी से सबंधित दर्द में यह उपाय काफी लाभकारी होता है।
  • 2-3 कच्चे निम्बू लेकर उन्हें छीलकर पतले पतले स्लाइस कट करके एक गिलास के जार में रखें अब इसमें 100ml एक्स्ट्रा वर्जिन ओलिव आयल डाल कर किसी डार्क कपड़े या रेपर में लपेट कर ऐसी जगह रखें जहाँ सनलाइट न आती हो। इस लेमन वाले आयल को 20 दिनों तक रखें। उसके बाद इसे दर्द वाली जगह पर लगा कर मालिश कर लें और फिर उसके बाद इसके ऊपर प्लास्टिक रेपर या इलास्टिक बैंडेज लगा लें। जिससे वह पर आयल का मैक्सिमम अब्सॉर्प्शन हो सके। इस आयल को लगाने से पहले दर्द वाली जगह को हल्के गुनगुने पानी से क्लीन करना है। इस रेमेडी का प्रयोग सुबह शाम या कभी भी कर सकते हैं।
  • यूकेलिप्टस आयल और विंटरग्रीन आयल को मिलाकर दर्द वाले स्थान पर लगाकर मालिश करने से भी दर्द में आराम मिलता है। यूकेलिप्टस आयल को डायरेक्ट स्किन में लगाने पर यह जलन कर सकता है इसीलिए इसे किसी कैरियर आयल के साथ ही प्रयोग किया जाता है। शोध बताते हैं कि यूकेलिप्टस आयल जोड़ों के दर्द को कम करता है। कई पैन रिलीफ ऑइंटमेंट और लोशन्स में इसका प्रयोग काफी पहले से होता रहा है। यह तेल जॉइंट पेन को कम करने के साथ ही सूजन को भी कम करता है।

हड्डियों और जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना कुछ योग और वॉक करने के साथ ही विटमिन B12 , कैल्शियम , विटमिन डी के डेली इन्टेक का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है इसके लिए हम दूध और दूध से बनी चीज़े , हरी सब्जियाँ, फोर्टिफाइड अनाज , और सीड्स जैसे अलसी , कद्दू के बीज , तिल को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।

मेडिटेशन करने के सही तरीके

मेडिटेशन यानी ध्यान का काफी प्राचीन समय से अलग अलग मान्यताओं और धर्मों में काफी महत्त्व रहा है परन्तु पिछले कुछ दशकों में यह प्रैक्टिस पूरी दुनिया में बहुत ज्यादा पॉपुलर हुई है। इस बात के कई प्रमाण मिले हैं की ध्यान करने से हम वह सब अचीव कर सकते हैं जो हम सोच सकते हैं। मेडिटेशन न सिर्फ हमारी क्षमता को बढ़ाता है बल्कि हमारा फोकस और विज़न में क्लैरिटी लाता है। यह भी साबित हुआ है की ध्यान करने से इंसान की सही निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ती है।

हमारा मस्तिष्क कितना काम्प्लेक्स ऑर्गन है यह हम सभी जानते है और आज के समय में हमे मल्टीटास्किंग और परफेक्ट होना बहुत जरूरी हो गया है ऐसे में यदि हम अपने दिमाग को और भी अधिक कुशलता से काम करने के लिए तैयार करना चाहें तो मेडिटेशन हमारे लिए एक वरदान की तरह काम करता है। हमारा दिमाग एक कंप्यूटर की तरह है जिसमे बहुत सारा डाटा स्टोर रहता है। एक सामान्य कंप्यूटर या मशीन की तरह ही दिमाग को भी कुछ देर का ब्रेक देना उसकी एफफिशिएंसी को बढ़ा देता है। ध्यान करना इसी का अभ्यास है। जब आप जागते हुए अपने विचारों से अपने मन को अपने दिमाग को थोड़ा ब्रेक देते हैं।

मेडिटेशन के फायदे –

मेडिकल साइंस भी यह मानता है की मेडिटेशन से ना सिर्फ हमारी फिजिकल हेल्थ इम्प्रूव होती है बल्कि मेन्टल और इमोशनल हेल्थ भी अच्छी होने लगती है। कई मामलों में मेडिटेशन से काफी असाध्य रोगों को भी ठीक करने में भी सफलता मिली है।

मेडिटेशन तनाव और अवसाद को दूर करने में बेहद प्रभावी है , अनिद्रा यानि इन्सोम्निया को दूर करता है। इसके साथ ही यह इच्छाशक्ति यानि विलपॉवर को बढ़ाने, भावनाओं और आवेगों को नियंत्रित करने और नशे की लत के कारणों को समझने में सहायता करता है। इससे पीठ का दर्द, लकवा, मांसपेशियों में खिंचाव, मधुमेह व अस्थमा जैसे रोगों का उपचार भी संभव है। याददाश्त बढ़ाने, मन-मस्तिष्क को एकाग्र करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और आज के कॉम्पिटिटिव माहौल में दबावों का सामना करने के लिए मेडिटेशन बहुत प्रभावी होता है।

2015 में की गयी एक रिसर्च के अनुसार रिसर्च में यह साबित हुआ है की इन सभी प्रोब्लेम्स को मेडिटेशन से काफी प्रभावी तरीके से कम किया जा सकता है। मेडिटेशन करने और न करने वाले कुछ लोगों का ब्रेन मैपिंग करने पर यह पाया गया की जो लोग रेगुलर मेडिटेशन यानी ध्यान करते है उनके ब्रेन में अल्फ़ा वेव्स की मात्रा उन् लोगो की तुलना में ज्यादा पायी गयी जो लोग मेडिटेशन नहीं करते। यह अल्फ़ा वेव्स क्रिएटिविटी को बढ़ाने और तनाव को कम करने के लिए जानी जाती हैं।

मेडिटेशन को करने का सबसे अच्छा समय सुबह का माना गया है। ऐसा इसलिए है क्यूंकि सुबह सोकर उठने के बाद हमारा दिमाग थोड़ा शांत होता है और उस समय ध्यान करना आसान होता है। ध्यान यानी मेडिटेशन करने के लिए एक आरामदायक स्थिति में ध्यान मुद्रा में बैठें। अपनी आँखों को बंद करें और अपने सांस लेने पर ध्यान केंद्रित करें। सांस लेना यानी ब्रीथिंग होना हमारे जीवित होने का प्रमाण है। जैसे हम सांस लेते हैं तो यह विचार करें की इस पूरे ब्रम्हांड से पॉज़िटिव एनर्जी आप अपने अंदर ले रहे हैं और सांस छोड़ते हुए यह विचार करें की हमारे अंदर की सारे रोग , गलत विचार , गलत आदतें सभी तरह की नेगेटिविटी को हम अपने आप से दूर कर रहे हैं।

मेडिटेशन कई प्रकार का होता है।

माइंडफुलनेस मेडिटेशन – इसमें हमे ध्यान करते हुए अपने विचारों पर ध्यान देना होता है जो भी विचार हमारे दिमाग में आ रहे होते हैं इस समय हमे उनको जज नहीं करना बस हमे अपने थॉट्स को ऑब्ज़र्व करना होता है। इस प्रैक्टिस से हमे एकाग्र होने और अपने वर्तमान के प्रति जागरूक होने में मदद मिलती है। इसके साथ ही इससे मन और मस्तिष्क रिलैक्स होता है तनाव दूर होता है और बहुत ज्यादा सोचने जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।

स्पिरिचुअल मेडिटेशन – यह प्रकार की प्रार्थना की तरह होता है। इसमें आप किसी शांत जगह पर बैठ कर ध्यान करते हैं और अपने ईश्वर का ध्यान करते हैं और अपने आप को यूनिवर्स से कनेक्ट करने की कोशिश करते हैं।

मंत्र मेडिटेशन – ध्यान का यह प्रकार हिन्दू और बौद्ध सहित कई परम्पराओ में काफी प्रचलित होता है। इसमें हमें किसी मंत्र या ध्वनि का बार बार उच्चारण करके उसपर ध्यान केंद्रित करना होता है जैसे ॐ ध्वनि। या फिर कोई मंत्र।

विज़ुअलाइज़ेशन मेडिटेशन – इसमें हमे पॉजिटिव चीज़ों और बातों को सोचना होता है और मन में शांति अनुभव करने पर ध्यान देना होता है। इस मेडिटेशन में हमे इस प्रकार कल्पना करना होता है जो हम करना चाहते हैं या जैसा बनना चाहते है। इस ध्यान में हमे अपने आप को जैसे उस लक्ष्य को प्राप्त कर लिया हो ऐसे कल्पना करना है। विज़ुअलाइज़ेशन मेडिटेशन से फोकस बढ़ता है और मोटिवेशन बढ़ता है।

फोकस मेडिटेशन – फोकस या केंद्रित ध्यान में पांचो इन्द्रियों में से किसी भी एक का प्रयोग करते हुए ध्यान करने की प्रैक्टिस की जाती है। इसमें हम माला में मोतियों को गिनने , साँस लेने छोड़ने में या किसी दीपक या मोमबत्ती की लौ को देखते हुए ध्यान करते हैं। मेडिटेशन की यह तकनीकी भी काफी पुरानी है। शुरुआत में यह मेडिटेशन थोड़ा सा मुश्किल लगता है पर धीरे धीरे प्रैक्टिस के बाद कोई भी इसे आसानी से कर सकता है। इससे मन एकाग्र होने में मदद मिलती है और लर्निंग कैपेसिटी बढ़ती है।

Transcendental Meditation या भावातीत ध्यान – इसमें हमे किसी भी विचार या भावना से ऊपर उठना होता है। दरअसल हमारी भावना हमारे विचार हमारे आस पास की बातों, घटनाओं और हमारी मान्यताओं से बनते हैं। इस मेडिटेशन से हमे अपने विचारों को दूर करने का अभ्यास करना होता है। इस तरह के ध्यान में हमे भावनाओ और किसी भी चीज़ों के बारे में नहीं सोचना होता है। इस ध्यान के अभ्यास से धीरे धीरे हम इमोशनली और फिजिकली फिट होने लगते हैं।

घर में धन समृद्धि लाने वाले 6 असरदार तरीके

आज के समय में पैसा कितना जरूरी है यह हम सभी जानते ही हैं। हम सभी उसके लिए खूब मेहनत भी करते हैं। पर कभी कभी ऐसा लगता है जैसे काफी मेहनत के बाद भी हमारे पास उतना पैसा नहीं आ रहा या आता है और खर्च हो जाता है। पैसा हमारे पास रुकता नहीं है।

इसके अलावा एक और बात यह भी है की यदि घर में आपसी प्यार और सामंजस्य होता है वहाँ पॉजिटिव एनर्जी होती है पर कोई भी सोचेगा की कौन चाहता है घर में क्लेश या तनाव वाला माहौल हो पर कभी कभी कुछ न कुछ कारण से घर के सदस्यों के बीच टकराव होता है। यदि यह हमेशा ही रहता है तो हम कुछ ऐसे उपाय कर सकते हैं जिससे हम अपने घर की पॉजिटिविटी को बढ़ा सकते हैं।

इसके लिए फेंगशुई और वास्तु में कुछ टिप्स हैं जो न सिर्फ हमारे घर में प्रोस्पेरिटी और पॉजिटिविटी लाते हैं बल्कि हमारी इनकम को भी बढ़ाते हैं। इनके पीछे यह लॉजिक होता है की हमारे ऊपर हमारे आस पास की चीज़ों और दिशाओं की एनर्जी का प्रभाव पड़ता है। यदि हमारे घर ऑफिस में पॉज़िटिव एनर्जी बढ़ती है तो यह हमे अच्छी हेल्थ , खुशहाली , सम्मान और धन दिलाती है। इसके विपरीत नेगेटिविटी घर में लड़ाई , अशांति , बीमारी , तनाव और गरीबी को बढाती है। तो उसके लिए हम आज ऐसे ही कुछ आसान और बेहद प्रभावी टिप्स के बारे में बताते हैं जो फेंगशुई और वास्तु पर आधारित हैं और दुनिया भर में इन्हे काफी अपनाया जा रहा है।

1 मिरर – लिविंग एरिया और ऑफिस में ईस्ट या नार्थ डायरेक्शन में मिरर लगाने से धन का आगमन होता है। फेंगशुई के अनुसार मिरर यानी शीशे या दर्पण को डाइनिंग रूम में रखने से सम्पन्नता बढ़ती है। मिरर लगाते समय इस बात का भी ध्यान रखें की उसे कार्नर में ना लगाएं। इसे हमेशा ऐसी दीवार पर लगाए जहा से उसमे सुन्दर दृश्य दिखे। ऐसा इसलिए माना जाता है क्यूंकि मिरर में अच्छी और पॉजिटिव वाइब्स वाली चीज़े दिखने पर वैसी ही एनर्जी बढ़ने लगती है। इसके अलावा यह भी ध्यान दिया जाता है की मिरर को कभी भी किचन या अपने वर्क प्लेस पर न लगाएं ऐसा करने पर आपका वर्क लोड बढ़ सकता है।

2 नेचुरल प्लांट्स – घर और ऑफिस के एंट्रेंस के दोनों तरफ प्लांट्स रखना वास्तु के अनुसार पैसे में वृद्धि करता है। वास्तु और फेंगशुई के अनुसार कई ऐसे प्लांट्स होते हैं जो धन के आगमन को बढ़ाते हैं। इन प्लांट्स को अपने घर और ऑफिस में रखना भी काफी अच्छा होता है। यह प्लांट्स घर की हवा को तो शुद्ध रखते ही हैं साथ ही प्रॉस्पेरिटी यानी समृद्धि को बढ़ाने के लिए भी जाने जाते हैं। मनी प्लांट , जेड प्लांट , लकी बैम्बू ऐसे ही प्लांट्स में से एक हैं। यह सभी इंडोर प्लांट्स है और इनकी देखरेख भी आसान होती है।

3 विंड चाइम्स – वास्तु और फेंगशुई में विंड चाइम्स का बहुत महत्व है। विंड चाइम्स को घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, कोई भी वास्तु दोष के प्रभाव को कम करने और सामंजस्य लाने के लिए इनका उपयोग कर सकता है। ऐसा माना जाता है की मेटल विंड चाइम को नॉर्थ, वेस्ट या नॉर्थ वेस्ट जोन में लगाना चाहिए। जब हम पश्चिम दिशा में विंडचाइम को लगाते हैं, तो यह फ़ैमिली में सौभाग्य यानी फार्च्यून को बढ़ाता है और फ़ैमिली मेंबर्स को सम्मान दिलाता है। लकड़ी यानी वुडेन विंड चाइम्स पूर्व, दक्षिण पूर्व और दक्षिण दिशा में लगाना अच्छा होता है। ऐसा माना जाता है की वुडेन विंड चाइम्स को पूर्व यानि ईस्ट में लगाने से यह ग्रोथ को बढ़ाता है और दक्षिण पूर्वी यानी साउथ ईस्ट डायरेक्शन में लगाने पर पैसा लाता है जबकि दक्षिण यानी साउथ में रखने पर फेम यानी प्रसिद्धि बढ़ती है।

4 लाफिंग बुद्धा – इनको धन समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इनको अपने ड्राइंग रूम में इस तरह रखना चाहिए जिससे इनका फेस एंट्रेंस की तरफ हो। लाफिंग बुद्धा जो बोरी या गठरी लिए रहते है , यह माना जाता है कि वह बोरी धन और सौभाग्य का प्रतीक है। आमतौर पर लाफिंग बुद्धा की मूर्ति को दरवाजे के सामने रखा जाता है। उनका बड़ा पेट सुख, भाग्य और समृद्धि का प्रतीक है। इसे उपहार के रूप में प्राप्त करना आवश्यक नहीं है। आप इसे खरीद भी सकते हैं।

5. क्रिस्टल लोटस – फेंगशुई में, क्रिस्टल लोटस सकारात्मक ऊर्जा का उत्सर्जन करने और फ़ैमिली बॉन्डिंग को स्ट्रांग करने के लिए जाना जाता है क्योंकि क्रिस्टल पृथ्वी तत्व का है, यह धरती माता के आशीर्वाद का प्रतिनिधित्व करता है। यह पर्यावरण को शुद्ध करता है और परिवार के सदस्यों को एक शांत मानसिकता प्रदान करेगा और उन्हें जीवन में उनके लक्ष्य को प्राप्त करने में सक्षम बनाता है । इसे लिविंग रूम, मुख्य हॉल या बेडरूम के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में रखना वैवाहिक जीवन को भी सुखी बनाता है और जीवन साथी को वफादार बनाता है।

6. क्रिस्टल ट्री– फेंग शुई जेमस्टोन ट्री को फेंग शुई क्रिस्टल ट्री भी कहा जाता है। फेंगशुई के अनुसार जेम ट्री को साउथ ईस्ट यानी दक्षिण पूर्व कॉर्नर में रखा जाना चाहिए जिससे घर में संपत्ति और समृद्धि बढ़ती है। जबकि नार्थ वेस्ट यानी उत्तर पश्चिम में रखने से घर के मुखिया के करियर में ग्रोथ होने लगती है.

घर को हमेशा सुगन्धित और खुशबूदार रखें। फेंगशुई के अनुसार सुगन्धित वातावरण पॉजिटिविटी को आकर्षित करता है। जिसका संबंध धन और सम्पन्नता से भी होता है। इसके लिए आप ताजे फूलों , अगरबत्तियों , एसेंशियल ऑयल्स का प्रयोग कर सकते हैं।

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