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गर्भावस्था का बारहवां सप्ताह – Pregnancy 12th week in Hindi

बारहवां हफ्ता गर्भवती महिला के लिए एक महत्वपूर्ण सप्ताह होता है। इस हफ्ते पहली तिमाही के साथ ही आपके बच्चे की वृद्धि तथा विकास के महत्वपूर्ण चरण का भी अंत हो जाता है। तीन महीने (12 हफ़्तों) की प्रेगनेंसी पूरी होने के बाद अधिकतर गर्भवती महिलाएं ये खबर सबको सुनाने में अधिक सुरक्षित महसूस करती हैं। अगर माँ सही खाना खाती हैं, स्वस्थ रहती हैं, व्यायाम करती हैं और सभी चिकित्सकों के आदेशों का पालन करती हैं तो इस चरण में आने के बाद मिसकैरेज की संभावना भी कम हो जाती है।

बारहवें हफ्ते की गर्भावस्था में शरीर में होने वाले बदलाव – Body changes during 12th week of pregnancy in Hindi

बाहरवें हफ्ते में आपका गर्भाशय प्यूबिक हड्डी के ऊपर निकलने लगता है और 12-16 हफ्तों के बीच आपका पेट निश्चित रूप से दिखाना शुरू हो जायेगा।
कुछ महिलाओं का चेहरा तो खिल जाता है लेकिन कुछ को उनकी त्वचा में अधिक नकारात्मक परिवर्तन महसूस होते हैं। एरियोला (Areola) और निपल्स का रंग सामान्य से अधिक गहरा हो जाता है और शरीर पर झाई और दाग धब्बे दिखाई देते हैं।

दुर्भाग्यवश इस हफ्ते कुछ महिलाओं के चेहरे पर गहरे भूरे रंग के धब्बे पड़ने लगते हैं। हालांकि विटामिन ए का अधिक मात्रा में सेवन करने से इसका इलाज किया जा सकता है लेकिन प्रेगनेंसी में विटामिन ए का अत्यधिक सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करना अन्य चीजों के अलावा लिवर को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के स्तर में वृद्धि के कारण छाती में जलन होती है जो दिन पर दिन बढ़ती है।

आपके शरीर में अतिरिक्त रक्त बनने की वजह से आपकी हृदय गति बढ़ सकती है। आपके कूल्हे गर्भाशय के विकास के लिए और अधिक बढ़ बढ़ेंगे।
सीने की जलन को कम करने के लिए, आप थोड़ी थोड़ी मात्रा में अधिक बार भोजन करने की कोशिश कीजिये। ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन न करें जो आमतौर सीने की जलन होने का कारण बनते हैं या उच्च फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ होते हैं।

बारहवें हफ्ते की गर्भावस्था में भ्रूण का विकास – Baby development in 12th week of pregnancy in Hindi

यह हफ्ता आपके बच्चे के लिए एक बहुत ही रोमांचक होता है। इसी हफ्ते के दौरान उसमें स्वरतंत्र (Vocal cords) विकसित होते हैं। उसकी हाथ और पैर की पूरी 20 उंगलियां और उन पर नाखून दिखाई देने लगते हैं और आंतें विकासशील होती हैं।
इस सप्ताह से चेहरे की बनावट समझ में आने लगती है जैसे कि भौहें और होंठ आदि। मस्तिष्क के विकास के साथ साथ उसके हार्मोनों का भी विकास होने लगता है क्योंकि मस्तिष्क अपने हार्मोन स्वयं बनाता है और तंत्रिका कोशिकाएं तेजी से वृद्धि करती हैं। मासपेशियां, मस्तिष्क के प्रति प्रतिक्रिया करना शुरू कर देती हैं।

जैसे जैसे मस्तिष्क और मांसपेशियां एक साथ विकसित होती हैं बच्चा हाथ मोड़ना, मुट्ठी खोलना और बंद करना तथा कलाई और कोहनी को घुमाना आदि शुरु कर देता है।

बारहवें हफ्ते के गर्भ का अल्ट्रासाउंड – Ultrasound of 12th week pregnancy in Hindi

इस सप्ताह के अल्ट्रासाउंड में बच्चे का सिर दाहिनी ओर होता है और आप उसके चेहरे की बनावट अधिक स्पष्ट रूप से देख पाएंगी जैसे आप एक नवजात शिशु में देखने की उम्मीद करती हैं। विकासशील बच्चे का एक हाथ उसके चेहरे पर होता है जैसे कि वो अपनी आंखें छुपा रहा हो।

बारहवें सप्ताह के गर्भधारण के लिए टिप्स – Tips for 12 week pregnancy in Hindi

बारहवें सप्ताह के दौरान महिला का स्वयं और अपने बच्चे का ख्याल रखना बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान गर्भावस्था के परेशान कर देने वाले लक्षण जैसे थकान, मॉर्निंग सिकनेस, और मतली आदि खत्म होने लगते हैं।

यह एक अच्छा संकेत है। इसका मतलब होता है कि प्रेगनेंसी अच्छी तरह से चल रही है। यदि ये लक्षण दूर या कम नहीं होते हैं तो आपको अपने डॉक्टर को इस बारे में बताना चाहिए क्योंकि यह मोलर प्रेगनेंसी (Molar pregnancy) का संकेत भी हो सकता है जो कि एक असामान्य गर्भावस्था होती है खासकर तब जब इसमें रक्तस्राव या स्पॉटिंग होती है।

मोलर प्रेगनेंसी का अर्थ है गर्भाशय में सिस्ट या अल्सर बनना। ऐसा प्लेसेंटा के असामान्य विकास के कारण होता है और गर्भावस्था के इस चरण में मिसकैरेज होने का प्रमुख कारण बनता है।

प्रेगनेंसी के बारहवें हफ्ते की डाइट – Diet during 12th week of pregnancy in Hindi

प्रेगनेंसी के 12 वें सप्ताह तक के समय का डाइट प्लान 9वें, 10वें और 11वें सप्ताह के समान ही होता है। कैल्शियम, विटामिन बी और मैग्नीशियम आदि पोषक तत्व आपके और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए अतिआवश्यक होते हैं। मैग्नीशियम बच्चे की हड्डियों को मज़बूत बनाने में मदद करता है।

विटामिन बी12, का इस दौरान अधिक से अधिक सेवन करें।
पेय पदार्थों का पर्याप्त मात्रा में सेवन करें। अदरक की चाय, आम का पना, जल जीरा और टमाटर का सूप आदि भी पेय पदार्थों के बेहतर विकल्प हैं। 

मैग्नीशियम आपके बच्चे का सही वजन बनाए रखने में मदद करता है। हरी पत्तेदार सब्जियां, सूखे मेवे, डेयरी उत्पाद, मछली और मांस आदि मैग्नीशियम के अच्छे स्रोत हैं।
विटामिन बी6 आपके शरीर में स्टोर खाद्य पदार्थों से ऊर्जा का उपयोग करने में मदद करता है। उनका अधिक से अधिक सेवन करें।

गर्भावस्था का चौथा सप्ताह – Pregnancy 4th week in Hindi


यदि आपको अभी भी संदेह है कि आप गर्भवती हैं या नहीं, तो सर्वप्रथम अपने गर्भवती होने की पुष्टि करें। अगर असुरक्षित यौन सम्बन्ध बनाने के बाद आपको मासिक धर्म न हो, मतली और उल्टी का अनुभव या हार्मोनल परिवर्तन महसूस हो तो तुरंत स्त्री रोग चिकित्सक से संपर्क करें या घर पर ही गर्भावस्था जांच करें। प्रेगनेंसी की पुष्टि करने के लिए ये दोनों ही बेहतर तरीके हैं। डॉक्टरों के अनुसार, असुरक्षित यौन सम्बन्ध बनाने के बाद आपको 21 दिन या पीरियड्स न होने के एक हफ्ते बाद प्रेगनेंसी टेस्ट करना चाहिए। 

अगर आप गर्भवती हैं या आपका गर्भावस्था का चौथा हफ्ता चल रहा है तो आपको आहार और जीवन शैली में महत्वपूर्ण परिवर्तन करने की ज़रूरत है। गर्भावस्था का चौथा हफ्ता इसलिए क्योंकि गर्भधारण के लगभग एक सप्ताह बाद भी अगर आपने प्रेगनेंसी टेस्ट किया और वो पॉजिटिव आया है तो भी आरोपण (Implantation) के समय से गिनती करने पर इस समय आप लगभग एक महीने की गर्भवती होती हैं। अर्थात यह आपकी पहली तिमाही चल रही है और यह आपके बच्चे के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण समय है। पहली तिमाही का समय, आपकी आखिरी माहवारी से लेकर 12वें हफ्ते के अंतिम दिन तक गिना जाता है।
इस समय भ्रूण के विकास में असामान्यतायें होने का अधिक जोखिम रहता है क्योंकि इस समय भ्रूण के मस्तिष्क, हृदय, सिर, रीढ़ की हड्डी, हड्डियों, मांसपेशियों, ऊतकों, और दांत सभी का विकास होता है। यदि आप अल्कोहल या अन्य विषाक्त (Poisnous) पदार्थों का सेवन करती हैं तो बच्चे के स्वास्थ्य के लिए अब उनका सेवन करना बंद कर दें।

चार हफ्ते की गर्भवती महिला के शरीर में होने वाले बदलाव – Body changes when 4 weeks pregnant in Hindi

गर्भावस्था के चौथे हफ्ते में, आपका शरीर गर्भावस्था हार्मोन एचजीसी (HGC) का उत्पादन करता है, जिससे चिंता, उल्टी, मितली, चक्कर, बेहोशी, थकावट और मूड बदलना आदि का अनुभव हो सकता है।

आपको स्तनों में असहजता और पीड़ा होगी। इस समय कुछ महिलाओं की सूंघने की शक्ति बढ़ जाती है या उनको किसी भी चीज़ की महक अधिक और जल्दी लगती है।  

खराब महक के कारण मतली या उल्टी होने की सम्भावना अधिक होती है। लेकिन इनके कारण चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। जैसे ही आप प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में प्रवेश करती हैं ये लक्षण जल्द ही कम हो जाते हैं।

चार हफ्ते की गर्भावस्था में भ्रूण का विकास – Baby development in 4th week of pregnancy in Hindi

गर्भावस्था के चौथे सप्ताह के दौरान भ्रूण का विकास बहुत तेज़ी से होता है। इस समय तक गर्भधारण, निषेचन, और आरोपण हो चुका होता है।
भ्रूण में दो परतें हो जाती हैं, जिन्हें एपिब्लास्ट और हाइपोबलास्ट कहा जाता है। इसके अलावा, इस हफ्ते के दौरान भ्रूणावरण (Amniotic sac – भ्रूण को बाहर से सुरक्षा प्रदान करने वाली थैली) और योल्क सैक (Yolk sac – भ्रूण तक रक्त और पोषक तत्वों का स्थानांतरण करने वाली थैली) का भी विकास होता है। भ्रूणावरण में एम्नियोटिक द्रव भरा रहता है, जो भ्रूण की रक्षा करता है। 

इस तिमाही में आपका बच्चा 0.4 मिमी लंबा होता है अर्थात एक सेब के बीज के बराबर। उसका दिल धड़कता है, रक्त पंप होना और अंगों का विकास होना शुरु हो जाता है।

चार हफ्ते के गर्भ का अल्ट्रासाउंड – Ultrasound in 4th week of pregnancy in Hindi

इस समय सोनोग्राम (अल्ट्रासाउंड) में बीच में एक छोटा सा गोला दिखाई देता है इससे अधिक कुछ भी नहीं। लेकिन यह छोटा सा गोला ही गर्भावधि थैली (Gestational sac) कहलाता है। इसका निर्माण करने वाली कुछ कोशिकाएं आगे चलकर प्लेसेंटा का निर्माण करती हैं। कुछ भ्रूणावरण बनाने में मदद करती हैं और अन्य कोशिकाएं, पलकें, मांसपेशियां और त्वचा के बनने के लिए ज़रूरी होती हैं। 

चार सप्ताह के गर्भधारण के लिए टिप्स – Week 4 pregnancy tips in Hindi

अपनी नकारात्मक आदतों को तुरंत बदल दें। यह आपके बच्चे के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इसलिए ड्रग्स, शराब और दवाओं का सेवन न करें क्योंकि ये बच्चे को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
अपने साथी से अपने मन की बातें साझा करें। अपनी चिंताओं और परेशानियों को व्यक्त करें और स्वयं को महसूस होने वाले लक्षणों पर चर्चा करें। उन्हें बताएं कि आप क्या महसूस करती हैं जिससे वो आपकी स्थिति समझकर आपकी मदद और देखभाल करने के लिए हमेशा तत्पर रहें। 
परिवार और दोस्तों से संपर्क में रहें और अच्छे सम्बन्ध बनाये रखें जिससे ज़रूरत पड़ने पर वे आपकी सहायता करने के लिए तैयार रहें। ऐसा करने से सारा भार आपके साथी पर नहीं पड़ता खासकर तब जब यह आपकी पहली प्रेगनेंसी हो क्योंकि यह आपके साथ साथ आपके साथी के लिए भी पहला अनुभव ही होता है। 
अपने प्रसूति विशेषज्ञ के साथ अपोइंटमेंट्स सुनिश्चित करें।
यदि आपके पास चिकित्सा बीमा (Medical insurance) है तो पता लगाएं कि क्या प्रेगनेंसी का के समय का खर्चा इसमें कवर हो रहा है या नहीं। अगर होता है तो आपके पूरे नौ महीनों की जांचों और डिलीवरी आदि का खर्चा आपकी बीमा कंपनी उठाएगी।
अधिक से अधिक आराम और विश्राम करें।

चार हफ्ते की प्रेगनेंसी के लिए डाइट प्लान – Diet during 4th week pregnancy in Hindi

गर्भावस्था के प्रारंभिक चरण में और आपको अनेकों नई चीज़ों का अनुभव होता है। मॉर्निंग सिकनेस, दर्द, मूड बदलना आदि अनेकों लक्षण महसूस होते हैं जिनका सामना आपको इस दौरान करना पड़ता है। स्वस्थ आहार आपको इन समस्याओं से निपटने में मदद करता है। इस दौरान अपने आहार पर खास ध्यान दें क्योंकि आपके के साथ साथ बच्चे का भी पोषण इसी से होता है।

आपको अपने आहार में फलों और सब्जियों को शामिल करना चाहिए, खासकर जिनमें फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में होता है। यह आपके बच्चे के तंत्रिका तंत्र का विकास करने में बहुत मदद करता है। पालक, मेथी के पत्तों, मूली, धनिया, गाजर, फूलगोभी, चुकंदर आदि फॉलिक एसिड के समृद्ध स्रोत हैं। फलों में, खरबूजा, एवोकाडो, अमरूद और संतरे में फॉलिक एसिड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थों में, रोटी, चावल और चोकरयुक्त गेहूं की रोटी आदि में यह मौजूद होता है।
प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे चिकन, अंडे आदि को अपने दैनिक आहार में शामिल करें। 
इस दौरान थकावट से बचने के लिए पर्याप्त तरल पदार्थों का सेवन करना ज़रूरी होता है। नारियल पानी और नींबू पानी आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छे पेय पदार्थ हैं इनके अलावा आप घर के बने जूस और मिल्कशेक पे सकती हैं जो आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं।
कैफीनयुक्त पेय पदार्थों और धूम्रपान का सेवन न करें। यह आपके और आपके बच्चे के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।

प्रेगनेंसी का छठा महीना – Pregnancy sixth month in Hindi

गर्भावस्था का छठा महीना, दूसरी तिमाही का आखिरी महीना होता है। अब तक आपका पेट काफी बड़ा हो जाता है साथ ही आपके शरीर के अन्य अंगों में भी थोड़ी बहुत वृद्धि हो जाती है। जैसे जैसे आपके बच्चे का विकास होता है, आपका शरीर भी बढ़ता जाता है।

गर्भावस्था के छठे महीने में बच्चे का विकास – Baby growth during sixth month of pregnancy in Hindi

बच्चा छठे महीने में एक फुट लम्बा और करीब 680 ग्राम का हो जाता है। इस महीने के अंत तक वो लगभग पूरी तरह से बन चुका होता है हालांकि, उसके अंग अभी भी विकसित हो रहे होते हैं और फेफड़े अभी तक स्वयं कार्य करने के लिए विकसित नहीं हुए हैं।

बच्चे का सिर इस समय लगभग उसके शरीर के अनुपात का होता है और उसका चेहरा पूरी तरह से विकसित हो जाता है। हालाँकि बच्चे की आँखें अभी भी बंद होती हैं, पर वह प्रकाश और अंधेरे को महसूस कर सकता है।

बच्चे की त्वचा अब पारदर्शी नहीं रहती क्योंकि उसको गर्म रखने के लिए उसका शरीर फैट का उत्पादन करना शुरू कर देता है। उसकी मांसपेशियां मजबूत होने लगती हैं, जिसका आपको तब अनुभव होगा जब वो किक मारेगा या कुलबुलायेगा। उसका शरीर, सफेद रक्त कोशिकाएं बना रहा होता है जो रोगों से लड़ने में उसकी मदद करती हैं।

प्रेग्नेंसी के छठे महीने में शरीर में होने वाले बदलाव – Changes in body during 6th month of pregnancy in Hindi

अब तक आपको पीठ दर्द, पैरों और टांगों में ऐंठन की शायद आदत हो गयी होगी। यदि आप अभी तक गर्भावस्था तकिया या मैटरनिटी सपोर्ट बेल्ट (Maternity support belt) के बिना काम चला रहीं हैं तो अब उसे खरीद लें क्योंकि अब अगली तिमाही में असुविधाएं और भी ज्यादा महसूस हो सकती हैं।

आप टखनों और पैरों में सूजन का अनुभव भी कर सकती हैं। इस महीने से आप यह भी गौर करेंगी कि पीले तरल का योनि स्राव हो रहा है, जिसे ल्यूकोरिया (Leukorrhea) कहते हैं। अपच, सीने में जलन और बवासीर आम समस्याएं भी प्रमुख हैं।

आपका गर्भाशय, मूत्राशय पर बिना दबाव डाले ऊपर की ओर बढ़ रहा होता है और इसलिए संभवतः आप अभी बाथरूम का ज्यादा उपयोग नहीं करती हैं। आप ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन (Braxton Hicks contractions) महसूस कर सकती हैं। ये छोटे छोटे संकुचन, आपके शरीर को प्रसव के समय के लिए तैयार करने में मदद करते हैं।

छठे महीने की गर्भावस्था के बारे में जानने योग्य बातें – Things to know about sixth month of pregnancy in Hindi

अब तक आपका वज़न लगभग 5-7 किलो बढ़ चुका होता है। स्वस्थ गर्भावस्था आहार खाने की कोशिश करें, प्रीनेटल विटामिन लेती रहें और खुद को हाइड्रेटेड रखें।

यदि आप बवासीर से पीड़ित हैं, तो फाइबर युक्त आहार खाएं जो गर्भावस्था में कब्ज होने से बचाते हैं। अब आप अपने पैरों, स्तनों और पेट पर खिंचाव के निशान देख सकती हैं। बच्चे के जन्म के बाद ये सब हल्के पड़ जाते हैं, लेकिन पूरी तरह से नहीं जाते। अगर आपके शरीर पर खिंचाव के निशान नहीं हैं, तो वो प्रेग्नेंसी के आखिरी महीनों में दिख सकते हैं।

आप बच्चे के कपड़े, उसका डाइपर, पालना आदि खरीदना शुरु कर दीजिये क्योंकि जैसे जैसे समय बढ़ता जायेगा इन सारे कामों को करने के लिए आपकी ऊर्जा कम हो जाएगी। इसलिए बच्चे के सामान की शॉपिंग लिस्ट बनाना शुरू कर दीजिये।