How to keep heart healthy

हमारा दिल हमारे शरीर के सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण अंगो में से एक है। हम सभी जानते ही है की हमारा मस्तिष्क और हार्ट , ये ही वो अंग है जो हमारे पैदा होने से लेकर हमारी आखरी सांस तक लगातार काम करते रहते है। इसीलिए दिल यानि हार्ट का हमेशा ख्याल रखना जरूरी है। अपने हार्ट को हैल्दी रखने के लिए हम कुछ बातो का ख्याल रख कर खुद को और अपने अपनों हार्ट से रिलेटेड प्रोब्लेम्स से बचा सकते है।

हम अपने दिल को स्वस्थ यानि हैल्दी बनाये रखने के लिए कुछ आसान से टिप्स को फॉलो कर सकते है जिससे हम किसी भी हार्ट रिलेटेड प्रॉब्लम को होने से रोक सकते है।

योग , मैडिटेशन या कोई भी एक्सरसाइज करें या आधा घंटे की वॉक करें। हार्ट को हैल्दी और फिट रखने के लिए जरूरी है कम से कम 30 मिनट की फिजिकल एक्सरसाइज जरूर करें। इससे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है। इसके अलावा योग और मैडिटेशन से शरीर में स्ट्रेस हॉर्मोन का लेवल कम होता है जो तनाव को कम करता है। तनाव, हार्ट प्रोब्लेम्स के मुख्य कारणों में से एक होता है। इसके साथ ही एक्सरसाइज से हमारी इम्युनिटी भी बढ़ती है।

अपने डाइट में फ्रेश फ्रूट्स और वेजटेबल्स को बढ़ाएं। सब्जियों में पालक , ब्रोक्कली , लोकि , तरोई , करेला , कद्दू को शामिल करें। यह सभी सब्जियां अनेक मिनरल्स और विटामिन्स से भरपूर होती है जो बॉडी को सभी आवश्यक नुट्रिएंट्स प्रदान करती है। इनसब के साथ ही सलाद को भी अपने खाने में शामिल करे। खाने के साथ टमाटर , प्याज , लहसुन , खीरे का प्रयोग करें जिससे ब्लड प्रेशर ठीक रहता है और हमारे ब्लड वेसेल्स में ब्लॉकेज की प्रॉब्लम होने की संभावना कम हो जाती है। सभी बेरीज़ जैसे स्ट्रॉबेरी , लीची , ब्लैकबेरी , ब्लूबेरी और पाइनएप्पल , अनार , तरबूज , केला , खट्टे फलों को जरूर लें।

तनाव कम करें – तनाव का सीधा संबंध ब्लड प्रेशर से होता है यदि हम टेंशन में रहते है तो हमारे शरीर में ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है जो न सिर्फ दिमाग के लिए बल्कि दिल के लिए भी खतरा बन सकता है। इसलिए तनाव को कम करने की कोशिश करें। ध्यान , प्राणायाम करें। इसके अलावा आप अपने आप को अपने पसंद के कामो में बिजी कर सकते है। धीमा म्यूजिक सुने , या अपनी बातो या परेशानियों को कही लिख लें। इससे आप को राहत मिल सकती है।

नींद पूरी लें। एक सामान्य स्वस्थ व्यक्ति को कम से कम 7-8 घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए। यह हमारे हार्ट के लिए काफी जरूरी होता है। इसका कारण यह है की जब हम कम नींद लेते हैं तो हमारे शरीर में स्ट्रेस हॉर्मोन का स्तर बढ़ जाता है जिसका असर ब्लड प्रेशर पर पड़ता है। हमारे स्वस्थ दिल के लिए समान्य ब्लड प्रेशर का होना बहुत जरूरी होता है। इसके अलावा 8 घंटे से ज्यादा सोना हमारे बेसेल मेटाबोलिक रेट को कम कर देता है जिससे मोटापा बढ़ता है जो फिर हृदय रोगो का कारण बन जाता है। इसलिए पर्याप्त नींद लेना जरूरी है। कम और ज्यादा दोनों ही हमारे लिए नुकसानदायक होता है।

ज्यादा देर तक बैठे रहने से बचें। हममे से अधिकतर लोग ऑफिस में लगातार बैठे बैठे काम करते रहते है और काम की व्यस्तता में हमारा ध्यान इस तरह नहीं जा पाता की हमे थोड़ी थोड़ी देर में उठ कर टहल लेना चाहिए। यदि टहलना पॉसिबल न हो तो आप कुछ देर खड़े होकर फिर बैठ सकते है। या फिर बैठे बैठे ही थोड़ी स्ट्रेचिंग कर लें।

ट्रांस फैट का प्रयोग न करें। यह हार्ट प्रोब्लेम्स को बढ़ाते है। इनका ज्यादा सेवन काफी खतरनाक हो सकता है। ट्रांस फैट एक प्रकार के अनसैचुरेटेड फैटी एसिड्स होते हैं जो हमारे शरीर में गुड कोलेस्टेरोल यानि HDL को कम करके बुरे कोलेस्ट्रॉल यानि LDLको बढ़ा देते है। इस तरह के डिस्टर्बेंस की वजह से हार्ट स्ट्रोक और हार्ट डिसीज़ का खतरा बढ़ जाता है। ट्रांस फैट बेक्ड फ़ूड आइटम्स जैसे केक , कुकीस, बिस्किट्स ,फ्राइड फूड्स , फ्रेंच फ्राइज , डोनट्स , फ्राइड चिकन , फ्रोजेन पिज़्ज़ा , नॉन डेरी कॉफ़ी क्रैमर्स में पाया जाता है। इसके अलावा हाइड्रोजनेटेड ऑयल्स भी ट्रांस फैट का स्त्रोत होते हैं।

वेजिटेबल आयल का प्रयोग करें। वेजिटेबल ऑयल्स नॉर्मल्ली हैल्दी होते हैं। पर इनका भी बहुत अधिक मात्रा में लिया जाना वजन बढ़ने के साथ साथ अन्य हेल्थ प्रोब्लेम्स को बढ़ा सकता है इसलिए तेल को सही मात्रा में लिया जाना चाहिए। सभी वेजिटेबल ऑयल्स में पॉली अनसैचुरेटेड फैटी एसिड्स होते है जो हमारे लिए काफी फायदेमंद होते हैं। मूंगफली , सरसो , सोयाबीन , सनफ्लॉवर , सभी तेलों में अलग अलग पोषक तत्व मिलते हैं इसलिए हम इनका अलग अलग डिशेस में प्रयोग करके सभी के फायदे ले सकते हैं। इसके अलावा कोकोनट , ओलिव आयल , केनोला आयल का प्रयोग भी किया जाता है। इसके अलावा आप जब तेल खरीदे तो इस बात का ध्यान दें की कच्ची धानी या कोल्ड प्रेस्सेड आयल खरीदें। रिफाइंड आयल का ज्यादा इस्तेमाल कुछ समय के बाद हेल्थ प्रोब्लेम्स को शुरू कर सकता है।

नमक का प्रयोग कम करें। ज्यादा नमक ब्लड प्रेशर बढ़ाता है जो नार्मल हार्ट फंक्शन पर बुरा प्रभाव डालता है। इसके साथ ही घर में बना ताज़ा खाना ही खाएं। बाहर के खाने में स्वाद और उसको ज्यादा देर तक ख़राब न होने के लिए काफी ज्यादा तेल और नमक का प्रयोग होता है जो हमारे शरीर में ब्लड प्रेशर को बढ़ाने के साथ ही वजन बढ़ने का भी कारण बनता है।

सिगरेट और शराब का सेवन नहीं करें। इसके अलावा प्रोसेस्ड फ़ूड , ज्यादा तेल मसाले वाला खाना , जंक फ़ूड को खाने से बचे। यह सभी चीज़े वजन बढ़ाने और शरीर में फ्री रेडिकल्स को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होती है। जिसका सीधा संबंध हमारे दिल की सेहत से होता है। इसलिए इनसब का सेवन जितना कम कर सके उतना अच्छा होता है।

यदि आपको हृदय से संबंधित कोई समस्या है तो अपने डॉक्टर से सलाह लेकर ही ड्राई फ्रूट्स खाएं। आमतौर पर हार्ट पेशेंट्स को ड्राई फ्रूट्स में से कुछ ही जैसे अंजीर , मुनक्का , डेट्स यानि खजूर , मखाने यानि फॉक्स सीड्स खाने की सलाह दी जाती है। क्यूंकि बादाम , काजू , पिस्ता सहित ज्यादातर डॉयफ्रुइट्स हाई कैलोरी और हाई फैट कंटेंट वाले होते हैं। इसलिए कोई भी नट्स और सीड्स को डॉक्टर की सलाह के बाद ही लें।

सुबह सुबह अनुलोम , विलोम , वज्रासन , पर्वतासन और प्राणायाम जरूर करें। केवल 10 मिनट भी इनको करने से हमारा ब्लड सर्कुलेशन इम्प्रूव होता है और हम हृदय संबंधी रोगो से बच सकते हैं।

इन बातो के साथ ही कुछ छोटे छोटे उपाय है जिनको हम अपने डेली रुटीन में शामिल करके अपने दिल को स्वस्थ रहने में हेल्प कर सकते हैं जैसे –

लहसुन का प्रयोग करें। कई रिसर्च में ये साबित हुआ है की कच्चे लहसुन के सेवन से कई तरह की हार्ट प्रोब्लेम्स को दूर किया जा सकता है। इसलिए लहसुन की 2-4 कलियाँ खाली पेट या खाने के साथ लिया जाना चाहिए। लहसुन में गामा ग्लूटामिलसिस्टन नाम का एक केमिकल होता है जो ब्लड प्रेशर को बढ़ने से रोकता है। इसीलिए हाई बीपी से पीड़ित लोगो को खाली पेट कच्चा लहसुन खाने की सलाह दी जाती है। यदि आप कोई मेडिसिन ले रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही इसका प्रयोग करें।

लौकी का जूस – यदि आपको हार्ट प्रॉब्लम है या नहीं है , दोनों ही स्थितियों में रोजाना लौकी का जूस पीना बेहद फायदेमंद होता है। सुबह खाली पेट लौकी का जूस रेगुलर लेने से बैड कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम करने में मदद मिलती है और हार्ट के सामान्य और स्वस्थ रूप से काम करने में भी यह सहायक होता है। लौकी का जूस पीना भी हार्ट को हैल्दी तो बनाता ही है साथ ही डाइबिटीज़ , लिवर इन्फेक्शन , कॉन्स्टिपेशन यानि कब्ज जैसी समस्याओं को भी दूर करता है।

अनार का जूस – हैल्दी हार्ट के लिए अनार का जूस पीने की भी सलाह दी जाती है। अनार में फ्री रेडिकल्स से लड़ने वाले हाई लेवल एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं इसके अलावा अनार में धमनियों को ब्लॉकेज फ्री रखने और ब्लड प्रेशर में सुधार करने वाले तत्व भी मौजूद होते हैं।

स्ट्रॉबेरी हमारे दिल को अनेक बीमारियों से बचाती हैं, ये एचडीएल (अच्छा) कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने में , बीपी को कम करने में मदद करती है इसके अलावा इसमें विटामिन, फाइबर और विशेष रूप से पॉलीफेनोल्स नाम के उच्च स्तर के एंटीऑक्सिडेंट भी पाए जाते हैं ।

डार्क चॉकलेट आपके दिल की सेहत के लिए अच्छी है।डार्क चॉकलेट में फ्लवोनोइड्स पाए जाते है जो दिल से संबंधित रोगों के खतरे को कम करते हैं। रोजाना थोड़ी सी डार्क चॉकलेट भी हार्ट को हैल्दी बनाए रखने में मदद करती है। कम शुगर और कम मिल्क कंटेन्ट वाली डार्क चॉकलेट रोगों से लड़ने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है और हृदय संबंधी रोगों के खतरे को कम करती है। एक्सपर्ट्स , एक सामान्य व्यक्ति को प्रतिदिन 30 gm डार्क चॉकलेट खाने की सलाह देते हैं।

इन सब के साथ ही अपने वजन और ब्लड प्रेशर को समान्य रख कर भी हम अपने आप को हार्ट रिलेटेड प्रोब्लेम्स से बचा सकते हैं। क्यूंकि मोटापा और हाई बीपी और तनाव , दिल की बीमारियों के मुख्य कारण हैं। इसलिए तनाव से बचें , खुश रहें , संतुलित आहार यानि बैलेंस्ड डाइट लें।

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मोबाइल रेडिएशन के खतरे को कैसे कम करें

आज के समय में मोबाइल हम सब की अनिवार्य आवश्यकता बन गया है। हमारे लिए मोबाइल फ़ोन की जरूरत वैसे ही हो गयी है जैसे खाना और पानी। हमारा छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा काम आजकल हम अपने स्मार्ट फ़ोन से कर लेते हैं।

मोबाइल को बीसवीं सदी की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण खोज माना जा सकता है इसने न केवल हमारे काम को आसान बनाया है बल्कि हमारी बहुत सी जरूरतों को रिप्लेस कर दिया है। आपने ध्यान दिया होगा पहले के टाइम में लोगो को अलार्म घडी , कैलकुलेटर , टेबल पर एक छोटा सा कैलेंडर रखते हुए। आज के टाइम में इन सब के लिए आपका एक मोबाइल ही काफी है उसमे आप सब कुछ कर लेते है। मोबाइल फ़ोन के फायदे और खूबियों के बारे में हम सब जानते ही है पर क्या हम इनके डायरेक्ट और इनडायरेक्ट खतरों को जानते हैं।

एक अनुमान के मुताबिक हर साल लगभग सात मिलियन पक्षी मोबाइल टावर रेडिएशन से मारे जाते हैं । ये टावर टीवी और रेडियो का प्रसारण करते है और सेल फोन के सेलुलर नेटवर्क के लिए भी जरूरी होते हैं। कई बार इनसे रेयर बर्ड्स यानि दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों को भी नुक्सान होता है। रेडियोफ्रीक्वेंसी वेव्स, पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र यानि मैग्नेटिक फील्ड को डिस्टर्ब कर देती हैं, जिसका प्रयोग पक्षी अपने नेविगेशन के लिए करते हैं।

हाल के अध्ययनों से ये भी पता चलता है कि एक सेल फोन टॉवर और मोबाइल फोन हैंडसेट के रेडिएशन उत्सर्जन के कारण मधु मक्खियों पर भी दुष्प्रभाव हो रहे हैं। अधिकांश शोधकर्ताओं ने विकिरण प्रभाव यानि रेडिएशन के कारण मधुमक्खी में जैविक और व्यवहार संबंधी परिवर्तनों को भी बताया है।

स्पेन और बेल्जियम में हुए अध्ययनों ने पक्षियों पर सेल फोन मास्टर्स द्वारा उत्सर्जित इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन (ईएमआर) के दुष्प्रभाव को बताया है, पंजाब यूनिवर्सिटी में एक टीम द्वारा किये गए एक अध्ययन में पाया गया है कि ईएमआर पक्षी के अंडे और भ्रूण को नुकसान पहुंचा सकता है।

पक्षियों और एनवायरमेंट को बचाने के लिए हम कुछ कदम उठा सकते है जिससे उनपर रेडिएशन के खतरे को कम किया जा सके जैसे –

  • मल्टीपल सिम कार्ड्स का प्रयोग को कम करें क्योंकि ज्यादा सिम कार्ड्स के कारण ज्यादा रेडिएशन होता है।
  • निर्धारित सीमा से अधिक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन का उत्सर्जन करने वाले टावरों का निरीक्षण करें और गवर्मेंट इसे कम करने का प्रयास करें।
  • हर शहर में स्थापित किए जाने वाले टॉवर की अधिकतम संख्या को सीमित किया जाना चाहिए।

कुछ चिकित्सा उपकरणों यानि मेडिकल इक्विपमेंट जैसे पेसमेकर, इम्प्लांटेबल डिफिब्रिलेटर, के प्रयोग के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करने की सलाह दी जाती है ऐसा इसलिए क्योंकि इससे उनके संचालन यानि ऑपरेशन में व्यवधान उत्पन्न होने की संभावना होती है।

कुछ देशों ने उड़ान के दौरान विमानों पर केवल लाइसेंस प्राप्त मोबाइल फोन के इस्तेमाल को ही अनुमति दी हुई है ऐसा इसलिए है क्यूंकि मोबाइल फ़ोन्स के सिग्नल विमान के कम्युनिकेशन सिग्नल में बाधा डाल सकते हैं।

यह तो बात हुई की मोबाइल और मोबाइल टावर के रेडिएशन से हमारे आसपास क्या फर्क पड़ रहा है , अब बात करते हैं की इसके रेडिएशन का हमारी हैल्थ पर क्या प्रभाव हो रहा है ।

सेल फोन उपयोग के समय नॉन आयोनाइज़्ड रेडिएशन को उत्सर्जित यानि एमिट करते हैं। सेल फोन द्वारा उत्सर्जित रेडिएशन के प्रकार को रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) ऊर्जा भी कहा जाता है। यदि आरएफ रेडिएशन काफी अधिक है, तो इसका एक ‘थर्मल’ प्रभाव होता है, जिसका अर्थ है कि यह शरीर के तापमान को बढ़ाता है।

हालाँकि नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट का यह मत है की वैसे तो इस बात को कोई ठोस सबूत नहीं मिला है की नॉन आयोनाइज़्ड रेडिएशन से मनुष्यों में कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। फिर भी फोन द्वारा उत्सर्जित आरएफ रेडिएशन के निम्न स्तर से सिरदर्द या ब्रेन ट्यूमर जैसी समस्याएं हो सकती हैं ।

इस रेडिएशन के ह्यूमन ब्रेन यानि मानव मस्तिष्क पर पड़ने वाले प्रभाव को जानने के लिए वैज्ञानिकों ने कई रिसर्च की है, जिसमे ब्रेन एक्टिविटी में कुछ बदलाव , रेस्पॉन्ड टाइम यानी प्रतिक्रिया समय और नींद के पैटर्न पर इसके साइड इफेक्ट्स को पाया गया है।

सभी मोबाइल फ़ोन के रेडिएशन की मात्रा उस फ़ोन के मॉडल के आधार पर अलग अलग होती है। आप इसे स्पेसिफिक अब्सॉर्प्शन रेट यानि SAR के माध्यम से नाप सकते है। आपके फ़ोन की SAR वैल्यू जितनी कम होती है उससे उतना ही कम रेडिएशन होता है।

आप यूएसएसडी कोड * # 07 # डायल करके अपने स्मार्टफोन के SAR के संदर्भ में रेडिएशन लेवल की जांच कर सकते हैं, यदि एसएआर 1.6 वाट प्रति किलोग्राम (1.6 W/Kg) से नीचे दिखाता है तो यह ठीक है अन्यथा आपको अपना स्मार्टफोन तुरंत बदलने की सलाह दी जाती है।

मोबाइल फ़ोन के रेडिएशन के साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए हम कुछ महत्वपूर्ण बातो को ध्यान में रख सकते है जैसे –

  • जब नेटवर्क कम हो या बैटरी कम हो तब मोबाइल फ़ोन का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्यूंकि इस समय मोबाइल से रेडिएशन कई गुना ज्यादा एमिट होता है। इसलिए फ़ोन को चार्ज करके ही बात करें।
  • कॉल करते समय स्पीकरफ़ोन या हेडसेट का उपयोग करें।
  • अपना फ़ोन अपने शरीर के पास न रखें, जैसे कि जेब में न रखें।
  • मोबाइल को लेकर न सोएं , मोबाइल को कभी भी अपने तकिया के नीचे या सिरहाने न रखें।
  • कॉल लगाने के बाद कुछ सेकण्ड्स रुक कर मोबाइल को कान में लगाए, क्यूंकि मोबाइल कॉल कनेक्ट करने के पहले काफी इन्टेन्स रेडिएशन एमिट करता है और कनेक्ट होने के बाद इसकी तीव्रता कम हो जाती है।
  • जितना हो सके मोबाइल को एयरप्लेन मोड पर रखें। जैसे रात में मोबाइल को एयरप्लेन मोड में रख कर सोएं।
  • चार्जिंग के दौरान मोबाइल पर बात न करें क्योंकि ऐसे में मोबाइल से निकलने वाला रेडिएशन लेवल 10 गुना तक बढ़ जाता है।
  • यदि आप फ़ोन को अपनी जेब में वाइब्रेट मोड में रखते हैं तो यह आपके शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। कुछ रिसर्च में यह साबित हुआ है कि इसके कारण सिर में दर्द, पेट की समस्याओं और संतुलन में समस्या आने का खतरा बढ़ जाता है। लम्बे समय तक कंपन यानि वाइब्रेशन से tendons, मांसपेशियों, हड्डियों और जोड़ों में परिवर्तन हो सकते हैं, और यह तंत्रिका तंत्र यानि नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं। इसको हैंड-आर्म वाइब्रेशन सिंड्रोम (एचएवीएस) के रूप में जाना जाता है।
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इम्युनिटी बढ़ाने के 10 असरदार तरीके

हमारे हैल्दी और फिट रहने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है हमारे इम्यून सिस्टम का स्ट्रांग होना। आजकल हमारी लाइफस्टाइल , बिज़ी रुटीन के चलते कई बार हमारा ध्यान इस तरफ जाता ही नहीं की हमारी बॉडी को कैसे और किन किन चीज़ों की कमी हो जाती है और इसके बारे में हमे तब पता चलता है जब हमे कोई हैल्थ प्रॉब्लम होने लगती है।

हम जानते ही है की हमारी बॉडी का अपना एक पूरा सिस्टम होता है जो किसी भी इन्फेक्शन या एलर्जी होने पर उसको पहचान कर उसे ठीक कर लेता है, पर यह तभी संभव होता है जब हमारे शरीर में सभी जरूरी मिनरल्स और विटामिन्स समुचित मात्रा में मौजूद हो। इसके अलावा कई और भी ऐसे फैक्टर्स होते है जो हमारे इम्यून सिस्टम को प्रभावित करते हैं।

अब बात करते है उन तरीको की जिनसे हम अपने इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग बना सकते है और कई तरह की बीमारियों और इन्फेक्शन्स से खुद को बचा सकते है।

अपनी डेली डाइट में फ्रूट्स को जरूर शामिल करें। फलों में हमारे लिए आवश्यक कई मिनरल्स और विटामिन्स होते है जो हमारे शरीर में होने वाली अनेक महत्वपूर्ण क्रियाओं के लिए बेहद जरूरी होते है। सेब यानि एप्पल , कीवी, संतरा , पाइनएप्पल , नाशपाती , पपीता जैसे फलों में इम्यून बूस्टिंग प्रॉपर्टीज होती है जो हमारे शरीर को अनेक संक्रमणों से बचाने में सहायक होते है।सभी रंग की सब्जियों को अपने डाइट में शामिल करें। सब्जियां विटामिन ए, बी 6, और विटामिन सी, फोलेट, मैग्नीशियम, फाइबर, राइबोफ्लेविन, फास्फोरस और पोटेशियम से भरपूर होती है। इसके साथ ही उनमें कई विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो हमारे इम्यून सिस्टम के लिए काफी फायदेमंद होते हैं।

विटामिन सी एक पावरफुल एंटीऑक्सिडेंट होता है . इसके अलावा यह काफी सारे सेलुलर फंक्शन्स में भाग लेकर इम्यून डिफेन्स में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विटामिन C युक्त खाद्य पदार्थ जैसे आँवला, संतरा , मोसम्मी, निम्बू में अच्छी मात्रा में पाया जाता है। निम्बू पानी को यदि विटामिन C के लिए ले रहे है तो इस समय इस बात का ध्यान देना जरूरी है की इसे गर्म करने पर विटमिन नष्ट हो जाता है। इसके अलावा fermented फूड्स और सलाद का प्रयोग जरूर करें।

जिंक, हमारे इम्यून सिस्टम और मेटाबोलिक फंक्शन में मदद करता है। इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग बनाए रखता है और शरीर के ऊतकों को बढ़ाता और मरम्मत करता है। यह 300 से अधिक एंजाइमों के कार्यों के लिए आवश्यक है और शरीर में कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में शामिल रहता है। क्योंकि ज़िंक हमारे शरीर में स्टोर नहीं रहता है इसलिए इसे डेली डाइट में लिया जाना बेहद जरूरी होता है। इसके स्त्रोतों की बात करें तो यह साबूत अनाज , डेरी प्रोडक्ट्स जैसे दूध , पनीर , फोर्टिफाइड अनाजों , बीन्स , पालक , मशरूम , फलियों में , अंडे , कद्दू के बीजों , तिल के बीजो में , ड्राई फ्रूट्स में , डार्क चॉकलेट में पाया जाता है।

एंटी इंफ्लामेटरी फूड्स जैसे लहसुन , अदरक , हल्दी , पुदीना , काली मिर्च , दालचीनी का प्रयोग करें। इनका प्रयोग हम सूप , काढ़े या चाय के रूप में भी कर सकते हैं। इनमे मौजूद एंटी एक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टी के कारन यह इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग बनाते है और इन्फेक्शन को जल्दी खत्म करने में मदद करते हैं।

प्रोटीन युक्त डाइट लें – अपनी डाइट में उन चीज़ों को जरूर शामिल करे जिनसे प्रोटीन मिलता है। जैसे दूध और दूध से बने पदार्थ जैसे दही , पनीर , अंडा , मीट , मछली, दालें, बीन्स । इनसब के सेवन से शरीर में प्रोटीन की कमी नहीं होती और बॉडी अपना डेवलपमेंट और रिपेयर का काम आसानी से कर पाती है।

हमारा शरीर विटामिन डी खुद ही बनाता है इसके लिए हमे धूप यानि सन लाइट की जरूरत होती है। हालाँकि विटामिन डी किसी प्लांट प्रोडेक्ट में ज्यादा नहीं पाया जाता इसीलिए इसकी कमी होने पर हमे सप्प्लीमेंटस लेने होते हैं जो की हमे डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेना चाहिए। फिर भी कुछ फ़ूड प्रोडक्ट ऐसे है जिनमे यह पाया जाता है जैसे टूना फिश , साल्मन फिश , मशरूम्स।

पर्याप्त पानी पियें , हाइड्रेट रहें – जिससे बॉडी को डेटॉक्स करने में आसानी होती है और सभी मेटाबोलिक क्रियाओ के सुचारु रूप से चलने में मदद मिलती है। इसके साथ ही सुबह खाली पेट निम्बू या शहद डालकर हल्का गुनगुना पानी भी इम्यून सिस्टम को एक्टिवेट करता है।

नींद पूरी लें – ऐसा करने से ना सिर्फ हमारा शरीर रिलैक्स होता है बल्कि और भी ज्यादा बेहतर तरीके से इन्फेक्शन्स और टॉक्सिन्स को पहचानकर खत्म करता है। इसके अलावा नींद अच्छी लेने से बॉडी में स्ट्रेस हार्मोन्स का लेवल कम होता है जिससे इम्यून सिस्टम स्ट्रांग बनता है।

वर्क आउट जरूर करें – इसके लिए कम से कम 20 मिनट वॉक, योग या एक्सरसाइज जरूर करे इससे हमारी बॉडी का स्टैमिना बढ़ता है और इम्युनिटी में भी सुधार होता है।

जंक फ़ूड , बहुत ज्यादा मिर्च मसाला और तला हुआ और पैक्ड फ़ूड का प्रयोग कम से कम करें। इनसब से हमारे शरीर में फ्री रेडिकल्स की मात्रा बढ़ती है जो इन्फेक्शन और बीमारियों की मुख्य वजह होती है। इसके अलावा धूम्रपान और बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फ़ूड का प्रयोग भी इम्यून सिस्टम को कमजोर बनाता है।

इन सबके साथ ही कुछ इम्युनिटी बूस्टर ड्रिंक्स भी बनाये जा सकते हैं इनके सेवन से सामान्य सर्दी खासी के अलावा कुछ वायरल इन्फेक्शन्स में भी ये काफी इफेक्टिव होते है।

जैसे गुनगुने पानी में एक चुटकी काली मिर्च और आधा चम्मच हल्दी डाल कर पीने से सर्दी जुकाम में राहत मिलती है।

एक गिलास पानी में एक चुटकी दालचीनी पाउडर , एक चौथाई यानि 1/4 चम्मच काली मिर्च , एक लौंग, तुलसी के पत्ते , थोड़ा सा अदरक डाल कर उसे तब तक उबाले जब तक पानी आधा न हो जाए। इसे छानकर इसमें थोड़ा सा शहद मिला कर पिया जा सकता है ।

गिलोय की पत्ती को उबालकर उसकी चाय भी इम्युनिटी बूस्ट करती है। इसके अलावा आप गिलोय का जूस का भी प्रयोग कर सकते हैं।

दूध में हल्दी डाल कर गर्म करके इसे रात में सोने से पहले पीने से कई तरह के इन्फेक्शन्स दूर करने में मदद मिलती है।

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