Category Archives: Eating healthy

It is explained how eating healthy helps stay fit and active throughout the day and in life.

6 आसान और स्वादिष्ट डाइबिटिक ब्रेकफास्ट रेसिपीज़

हम सभी जानते है की डाइबिटीज़ के साथ कई सारे परहेज़ और खाने के कई चीज़ें प्रतिबंधित करनी पड़ती हैं। यही कारण है कई लोग हमेशा एक ही तरह का ब्रेकफास्ट और लंच लेकर बोर होने लगते हैं। कुछ चीज़ों को ध्यान में रखकर हम कुछ ऐसी रेसिपीज़ तैयार कर सकते हैं , जो न सिर्फ हैल्दी हैं बल्कि काफी टेस्टी और आसान है। इन्हे आप ब्लड शुगर को कण्ट्रोल करने के साथ ही वजन कम करने के लिए भी अपना सकते हैं।

  • ज्वार का चीला – ज्वार का चीला बनाने के लिए हमे जरुरत होगी – पालक , चुकंदर के पत्ते , एक प्याज कटा हुआ , कटा हुआ धनिया , मिर्ची , अदरक , जीरा, अजवाइन , काली मिर्च , हींग , हल्दी , नमक और ज्वार का आटा। इसे बनाने के लिए पालक और चुकंदर के पत्तों को अच्छे से धोकर, साफ़ करके काट लें। गाजर और टमाटर को मिक्सर में हल्का सा ग्राइंड करलें। अब 2 कप ज्वार के आटे में इन सभी इंग्रेडिएंट्स को मिलाकर थोड़ा गाढ़ा घोल यानी चीला का बेटर बनालें। अब तवे को थोड़ा गर्म करके उसमे थोड़ा सा तेल स्प्रे करके या 2-3 बून्द तेल डाल कर इसमें एक बड़ा चम्मच बेटर डाल कर चीला बनाएं। इसे आप दही या किसी भी चटनी के साथ ले सकते हैं। ज्वार हाई क़्वालिटी फाइबर से भरपूर होता है जो पाचन को सुगम बनाने, मोटापे को नियंत्रित करने, ब्लड ग्लूकोस के लेवल को नियंत्रित करने और हाई बीपी और स्ट्रोक के खतरे को कम करने में मदद करता है। ज्वार में कैल्शियम, ज़िंक , फॉस्फोरस, कॉपर, पोटेशियम और बी विटामिन भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
  • मसाला ओट्स – मसाला ओट्स बनाने के लिए सबसे पहले एक कप ओट्स को 1/4 कप मूंगफली के दानो के साथ 3-4 मिनट भून लें। अब इसे एक प्लेट में निकालकर रख लें। एक पैन में 2 चम्मच तेल डालें फिर इसमें करी पत्ता , जीरा , कटा हुआ प्याज, हरी मिर्च डाल कर , प्याज गोल्डन होने तक अच्छे से चलाएं। अब इसमें भुना हुआ ओट्स और मूंगफली को मिलाएं और स्वादानुसार नमक मिला लें । अब इसमें आधे कप से कम पानी मिलाएं और थोड़ा थिक होने तक चलाएं। 10 मिनट के बाद इसमें हरा धनिया और थोड़ा सा निम्बू का रस डालकर गर्म गर्म सर्व करें।
  • मूंग दाल टिक्की – इसके लिए हमें जरुरत होगी – डेढ़ कप भीगी हुई हरी मूंग + हरा प्याज कटा हुआ एक कप + 2 बड़े चम्मच बेसन या ओट्स का आटा + एक या दो हरी मिर्च + लहसुन + अदरक बारीक कटा हुआ + एक चम्मच तेल + नमक मिर्च स्वादानुसार. सबसे पहले भीगी हुई हरी मूंग को मिक्सर में बिना पानी मिलाये हल्का दरदरा पीस लेंगे। अब इस पेस्ट को एक बड़े बाउल में लेकर उसमे कटा हुआ हरा प्याज यानी स्प्रिंग अनियन , कटी हुई हरी मिर्च , लहसुन , अदरक , बेसन, नमक मिर्च मिला लेंगे। अब इस मिक्सचर के मध्यम आकर की टिक्की बनाकर इसे रख लेंगे। अब इन टिक्की को तवे पर हल्का सा तेल लगाकर रखेंगे और उसे हल्का गोल्डन होने तक सेंक देंगे। इसी तरह दूसरी तरफ भी सेंक देंगे। अब इन टिक्की को आप किसी भी ग्रीन चटनी के साथ सर्व कर सकते हैं।
  • ज्वार मूली का पराठा – ज्वार मूली पराठा , डाइबिटीज़ में बिना किसी संकोच के आप ले सकते हैं। इसे बनाने के लिए ज्वार का आटा , किसी हुई मूली , धनिया पत्ती, हरी मिर्च ,हल्दी पाउडर और अदरक-लहसुन का पेस्ट , जीरा , गर्म मसाला , नमक , दही की जरूरत होगी। सबसे पहले मूली को धोकर छीलकर उसे किस लें यानि ग्रेट कर लें। फिर इसमें 2 कप ज्वार का आटा और सभी इंग्रेडिएंट्स को मिलाकर एक आटा तैयार कर लेंगेऔर फिर पराठा बना लेंगे।
  • मिक्स दाल पराठा – इसे बनाने के लिए चने और मूंग की दाल को रात भर भिगो कर रख लें। भीगी हुई दोनों दालों को अच्छे से वाश करके , पानी निकाल कर, दालों को एक बाउल में रख लेंगे। अब एक पैन में बिना तेल डाले , बेसन को भून लें। फिर इसमें हल्दी, धनिया पाउडर , जीरा , नमक डाल कर दाल को मिलाएं। इसे 5 मिनट के लिए भूने। अब नार्मल आटे की लोई बनाए और दाल की फिलिंग भर कर पराठा बना लें। अब इस पराठे को दही या चटनी के साथ सर्व करें।
  • हरी मटर का पराठा – इसे बनाने के लिए एक कप हरी मटर के दानो को उबाल कर ठंडा करके छान कर रखलें अब इसे बिना पानी मिलाये मिक्सर में पीस कर स्मूथ पेस्ट बनालें। अब इस पेस्ट में एक कप आटा , एक चम्मच दही , बारीक कटी हरी मिर्च , जीरा , गरम मसाला , हींग ,नमक स्वादानुसार मिलालें। अब इन सबको मिक्स करके आटा तैयार करलें। इस आटे के पराठे बनालें। इन पराठों को आप चटनी , सॉस , अचार के साथ ले सकते हैं।

इस प्रकार आप इन चीज़ों को मिक्स मैच करके और भी कई डिशेस तैयार कर सकते हैं और कई और हरी पत्तेदार सब्जियों का प्रयोग करके इसे और भी ज्यादा पौष्टिक बना सकते हैं।

What to eat in diabetes

Green Leafy vegetables.

Whole grains.

low fat.

Flaxseeds , nuts, beans

what are the early signs and symptoms of diabetes ?

Frequent urination, Increased thirst, Feeling very tired, Blurry vision, Slow healing of cuts and wounds.

What should diabetics eat for breakfast?

whole wheat, oats , green peas, beans, cereals, sorghum, graan leafy vegetables.

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किटो डाइट क्या है ?

केटोजेनिक डाइट या कीटो आहार ऐसा आहार होता है जिसमे वसा कीअधिक मात्रा , प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में और कार्बोहायड्रेट कम मात्रा में लिया जाता है। इस प्रकार की डाइट में अनाज , दूध और कुछ फलो और कुछ सब्जियों जैसे आलू ,केला, शकरकंद आदि का सेवन नहीं किया जाता है और ज्यादा वसा वाले खाने को ऊर्जा के मुख्य स्त्रोत की तरह उपयोग किया जाता है।

20 से अधिक अध्ययनों से पता चलता है कि इस प्रकार का आहार आपको अपना वजन कम करने और आपके स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद कर सकता है। हालाँकि इस प्रकार की डाइट का प्रयोग किसी डॉक्टर या डिएटिशियन से सलाह लेके ही करना चाहिए ।

किटो आहार से मधुमेह, कैंसर, मिर्गी और अल्जाइमर रोग में भी लाभ मिलता है

सामान्य तौर पर हमारा शरीर कार्बोहायड्रेट से ही ऊर्जा प्राप्त करता है परन्तु जब शरीर में कार्बोहायड्रेट की कमी होती है तो वसा का प्रयोग ऊर्जा के लिए होने लगता है । केटोजेनिक डाइट इसी सिद्धांत पर काम करती है और आपका शरीर ऊर्जा के लिए वसा को केटोन्स में बदल देता है, जो मस्तिष्क के लिए ऊर्जा की आपूर्ति करता है ।

किटो आहार में किन चीज़ो का उपयोग वर्जित है?

अब यहाँ हम बात करते है उन चीज़ो की जिनका प्रयोग कीटो डाइट में कम से कम किया जाता है या जिनका प्रयोग वर्जित है । यहां हम उन खाद्य पदार्थों की एक सूची है जिन्हें किटोजेनिक डाइट के अनुसार कम करने की ज़रूरत है

मीठे पदार्थ: चॉकलेट, मिठाइयाँ, सोडा, फलों का रस, स्मूदी, केक, आइसक्रीम, कैंडी, आदि।
अनाज या स्टार्च: गेहूं , चावल, पास्ता, आदि।
बीन्स या फलियाँ: मटर, राजमा, दाल, छोले, आदि।
जड़ वाली सब्ज़िया: आलू, शकरकंद, गाजर, आदि।
कम वसा वाले या आहार उत्पाद: नमकीन और रेडी मेड खाने का सामान जैसे चिप्स और कुरकुरे जिनमे कार्बोहाइड्रेट ज़्यादा होता है।
किटो आहार में शराब का सेवन भी नहीं करना चाहिए। चीनी मुक्त आहार खाद्य पदार्थ भी वर्जित है।

किटो आहार में किन चीज़ो को बढ़ावा दिआ गया है ?

अब बात करते है इस केटोजेनिक डाइट में किन चीज़ो को अपने आहार में शामिल करना होता है :


वसायुक्त मछली: जैसे सैल्मन, ट्राउट, ट्यूना और मैकेरल।
अंडे: पास्ता या ओमेगा -3 से भरपूर अंडे।
मक्खन और क्रीम
पनीर:
नट और बीज: बादाम, अखरोट, सन बीज, कद्दू के बीज, चिया बीज, आदि।
स्वस्थ तेल: मुख्य रूप से एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल, नारियल तेल और एवोकैडो तेल।
एवोकाडोस:
लो-कार्ब सब्जियाँ: हरी सब्जियाँ, टमाटर, प्याज, मिर्च, आदि।
मसाले: आप नमक, काली मिर्च और विभिन्न स्वस्थ जड़ी बूटियों और मसालों का उपयोग कर सकते हैं।

मांस: अगर आप नॉनवेज खाते है तो आपको इन चीज़ों का सेवन अधिक करना चाहिए रेड मीट यानि लाल मांस, सॉसेज, चिकन और पेरू पक्षी

किटो आहार के साइड इफेक्ट्स ?

हालांकि केटोजेनिक आहार स्वस्थ लोगों के लिए सुरक्षित है, लेकिन आपके शरीर के अनुकूल होने पर कुछ प्रारंभिक दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

इसे अक्सर कीटो फ्लू के रूप में जाना जाता है और आमतौर पर कुछ दिनों के भीतर खत्म हो जाता है।

किटो फ़्लू में ऊर्जा की कमी और मानसिक कमज़ोरी , भूख में वृद्धि, अनिद्रा , मतली, पाचन की गड़बड़ी और व्यायाम करने में परेशानी शामिल है।

इसे कम करने के लिए, आप पहले कुछ हफ्तों तक नियमित कम कार्ब आहार खाने की कोशिश करें । यह करने से आपके शरीर को अधिक वसा जलाने का आदत बन जाएगी और साइड इफेक्ट्स का असर कम होगा ।

किटो आहार सभी के लिए नहीं है

किटो आहार उन लोगों के लिए बहुत अच्छा हो सकता है जो अधिक वजन, मधुमेह या अपने मेटाबोलिक स्वास्थ्य में सुधार चाहते है।

जो लोग अपना वज़न बढ़ना चाहते है उनके लिए किटो डाइट नहीं है।

और यह तभी काम करता है जब आप इसे लम्बे समय तक प्रयोग में लाए।

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ज़्यादा नमक क्यों नहीं खाना चाहिए

अति सर्वत्र वर्जयेत

अति सर्वत्र वर्जयेत अर्थात अति हर चीज़ की बुरी होती है यहाँ हम बात करेंगे नमक के अधिक उपयोग से होने वाले नुकसान के बारे में ।

हमारे भोजन में नमक की आदर्श मात्रा 1,500 मिलीग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। लेकिन हम अक्सर इस बात पर गौर नहीं करते कि हम कितना नमक खा रहे हैं और नमक की ज्यादा मात्रा लेते रहते हैं। नमक की मात्रा हम खाना बनाते समय तो ध्यान देते हैं पर खाना खाते समय हम इसको अनजाने ही बढ़ा लेते हैं। जैसे सलाद ,अचार या सॉस या चटनी में डला हुआ नमक हम ध्यान ही नहीं देते इस तरह हम तय मात्रा से काफी ज्यादा नमक लेलेते है।

अधिक नमक शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ा देता है जिसका असर रक्त वाहिनियों के फैलने के रूप में दिखाई दे सकता है ।ज्यादा सोडियम ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है जिससे दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

नमक की अधिकता के कारण किडनी स्टोन यानी पथरी हो जाती है ।

आहार में नमक की अधिक मात्रा का अधिक सेवन गैस्ट्रोएंट्रोएन्टराइटिस की समस्या पैदा कर सकता है ।

ज्यादा नमक खाने से हड्डियों में कैल्शियम की मात्रा कम होने लगती है और अधिक कमी होने पर ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा हो जाता है।

नमक का अधिक सेवन हेलिकोबैक्टर पायलोरी बैक्टीरिया द्वारा पेट के उपनिवेशण को बढ़ाता है जिससे गैस्ट्रिक समस्या पैदा हो सकती है या बिगड़ सकती है । अगर इसपर ध्यान न दिया जाए तो आगे चल कर ये गैस्ट्रिक टयूमर की समस्या उत्पन्न कर सकता है l  कई वैज्ञानिको के अनुसार अधिक नमक के सेवन से पेट के कैंसर का कारण बन सकता है l

इसलिए कहा गया है की नमक का सेवन सही मात्रा मे करना लाभदायक है

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