सर्दियों के 10 सुपरफूड जो आपको रखें स्वस्थ और एनर्जेटिक

सर्दियों का मौसम वैसे तो काफी अच्छा होता है पर यही वो टाइम भी होता है जब हमे अपने खान पान का खास ख्याल रखना चाहिए। चाहे छोटे बच्चे हों या बड़ी उम्र के लोग सर्दियों में कुछ समस्याएं जैसे जोड़ों में दर्द , सर्दी जुकाम , स्किन ड्राई होना , बालों का झड़ना और पुरानी चोट का दर्द वापस आना वगैरह बढ़ने लगती है। इसीलिए हमे अपने खाने में कुछ चीज़ों को शामिल करके इन समस्याओ को आसानी से कम कर सकते हैं। पारम्परिक इंडियन फ़ूड में कई ऐसी चीज़ें हैं जो सर्दियों में न सिर्फ हमारे शरीर को मौसम के अनुसार जरूरी पोषक तत्व प्रदान करके हमे सारा टाइम एनर्जेटिक और फिट रहने में मदद करती है बल्कि हमारे इम्यून सिस्टम को स्ट्रांग बनाकर हमे बीमार होने से बचाते हैं।

अब बात करते है उन 10 सुपर फूड्स की जो विंटर में हमे स्ट्रांग और फिट रखने में हेल्प करते हैं।

बाजरा बाजरा में प्रोटीन , फाइबर , आयरन , पोटाशियम , मैग्नीशियम , कैल्शियम, विटामिन बी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा यह ग्लूटेन फ्री होता है और डाइबिटीज़ , अस्थमा के रोगियों के लिए काफी अच्छा होता है। आयुर्वेद के अनुसार बाजरा गर्म तासीर का होता है। बाजरा लम्बे समय तक पेट भरा रखता है , इसके हाई फाइबर कंटेंट के कारण डाइजेशन को इम्प्रूव करता है , एनीमिया को दूर करता है , इम्युनिटी बूस्ट करता है , हड्डियों को मजबूत बनाने में हेल्प करता है। इन सब गुणों के कारण इसे सर्दियों में खाना काफी हैल्दी होता है। बाजरा को हम नार्मल आटे में मिलाकर, या बाजरे के आटे की रोटी या बाजरे के लड्डू के रूप में प्रयोग कर सकते हैं।

तिल – तिल को गर्म तासीर , हाई कैलोरी और बहुत सारे न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होने के कारण इसे विंटर फ़ूड की लिस्ट में रखा जा सकता है। इसमें कैल्शियम , मैग्नीशियम , आयरन , फॉस्फोरस के साथ ही पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड होते हैं जो एनर्जी लेवल को बूस्ट करते हैं। इसके साथ ही इसमें हाई फाइबर कंटेंट होता है जो डाइजेशन में हेल्प करता है और कॉन्स्टिपेशन को दूर करता है। तिल को हम कई तरीको से अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं जैसे तिल के लड्डू , सलाद में स्प्रिंकल करके , भून कर भी खा सकते हैं। हालाँकि जिनको किडनी स्टोन की प्रॉब्लम हो उनको तिल का प्रयोग कम करने की सलाह दी जाती है।

गोंद – अपनी गर्म तासीर के कारण , सर्दियों में गोंद शरीर की गर्मी को बनाए रखने में हेल्प करता है इसके साथ ही गोंद में घावों को भरने के गुण होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, गोंद स्टैमिना और ओवरआल हेल्थ को बढ़ाता है जो सर्दी खांसी की समस्या को दूर रखने में सहायक होता है। इसके अलावा कैल्शियम और प्रोटीन की मौजूदगी के कारण यह कमर दर्द , पीठ दर्द , और जोड़ों के दर्द को दूर करने में भी बेहद प्रभावी होता है।

हरी सब्जियां – ज्यादातर हरी पत्तेदार सब्ज़िया चाहे वो पालक हो , मेथी हो या बथुआ ,चौलाई , मूली के पत्ते सरसों यह गर्म तासीर की होती हैं। पत्तेदार हरी सब्जियां विटामिन, मिनरल्स और फाइबर से भरपूर होती है। पत्तेदार साग से भरपूर डाइट लेने से मोटापा, हृदय रोग, हाई बीपी और कमजोरी से राहत मिलती है। इसके साथ ही हरी सब्जियां आँखों को स्वस्थ रखती है , हड्डियों और बालों को मजबूत बनाती है। इनको हम साग के रूप में , सलाद , ग्रीन स्मूथी , वेजिटेबल स्टॉक , या आटे में मिलाकर पराठे या पूरी के रूप में भी ले सकते हैं।

घी – आयुर्वेद के अनुसार घी हमारी हेल्थ के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है इसमें एसेंशियल फैटी एसिड होते है जो हमारी सेहत के लिए लाभकारी होते है , इसके अलावा इसके सेवन से याददाश्त में सुधार होता है। घी में मौजूद ब्यूटेरिक एसिड के कारण इम्युनिटी यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और आंत यानि इंटेस्टाइन को हैल्दी रखता है। घी में विटामिन E ,D, K और विटामिन A पाए जाते हैं जो ब्रेन पावर , इम्यून सिस्टम , आँखों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी होते है। इसके साथ ही घी गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है।

शहद शहद को भी गर्म प्रकृति का माना गया है। शहद आपके पूरे शरीर को गर्माहट प्रदान करता है। कई रिसर्च में यह पाया गया है की शहद सर्दी जुकाम खांसी में तुरंत राहत देता है और किसी भी कफ सिरप के मुकाबले तेजी से आराम देने के साथ ही सर्दी खांसी से पीड़ित बच्चों में जल्दी नींद आने में भी प्रभावी होता है। इसके अलावा शहद में एंटी बैक्टीरियल , एंटी वायरल प्रॉपर्टीस होती हैं। इसीलिए इसका प्रयोग कई तरह की होम रेमेडीज में किया जाता है। शहद को काली मिर्च के साथ , दालचीनी के साथ लेने से गले की खराश में राहत मिलती है। सुबह खाली पेट गर्म पानी में शहद डाल कर पीने से बॉडी डेटॉक्स होती है और इम्युनिटी बढ़ती है। दूध में शहद का प्रयोग करने से स्टैमिना बढ़ता है और इसके साथ ही शहद का प्रयोग ड्राय स्किन की प्रॉब्लम को दूर करने में भी होता है। शहद में कई एंटीऑक्सीडेंट्स होते है जो हमे कई तरह के इन्फेक्शन से बचाते है।

मसाले – हल्दी , दालचीनी , काली मिर्च , अदरक , लहसुन , लौंग , लाल मिर्च तेज पत्ता , अजवाइन , जीरा , हींग, केसर । ज्यादातर मसाले गर्म प्रकृति के होते है और इनका सेवन भी शरीर को गर्म रखने में मदद करता है। इसके साथ ही इन सभी मसालों में इम्युनिटी बढ़ाने के गुण होते है। ज्यादातर मसाले कई तरह के मेडिसिनल प्रॉपर्टी से भरपूर होते हैं। इसीलिए इनके सामान्य खाने में प्रयोग के साथ ही काढ़े और सूप में लेना भी सर्दियों में शरीर की रोग रोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। हल्दी कफ को दूर करती है इसमें एंटीसेप्टिक , एंटी बायोटिक और एंटी एलर्जिक गुण होते है। इसके अलावा हल्दी में दर्दनाशक गुण भी पाया जाता है।

गुड़ हमारी इम्युनिटी को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, साथ ही हमारे शरीर में आवश्यक मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट और मिनरल्स का निर्माण करता है। गुड़ में ज़िंक, आयरन और सेलेनियम अच्छी मात्रा में पाया जाता है। भोजन के बाद थोड़ी मात्रा में गुड़ खाने से डाइजेशन में हेल्प मिलती है क्योंकि यह पाचन प्रक्रिया में एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य कर सकता है। गुड़ की गर्म तासीर के कारण इसे सर्दियों में ज्यादा खाया जाता है। इसके साथ ही कई सारे डॉयफ्रुइट्स के साथ इसे मिलाकर खाने से यह एनर्जी और न्युट्रिशन से भरपूर होते है।

नवरंगी या नौरंगी दल, उत्तराखंड की एक विशेष दाल है। यह प्रोटीन और फाइबर में भरपूर होती है और मैंगनीज, फॉस्फोरस, पोटेशियम, आयरन और तांबा जैसे कई महत्वपूर्ण मिनरल्स ,अच्छी मात्रा में फोलेट और बी-विटामिन होते हैं। यह भी गर्म तासीर की होती है इसीलिए इसे सर्दियों में ही खाया जाता है। इसका बनाने का तरीका काफी कुछ राजमा जैसा होता है पर इसका स्वाद थोड़ा अलग होता है।

कुलथी दाल एक प्रकार की दाल है, जिसे हार्स ग्राम के नाम से भी जाना जाता है। इसका रंग गहरा भूरा होता है और देखने में मसूर की दाल की तरह लगती है। दक्षिण भारत के कुछ प्रमुख व्यंजनों जैसे रसम आदि बनाने के लिए इसे प्रयोग में लाया जाता है। बुखार और सर्दी के लिए इस दाल का प्रयोग पारंपरिक दवाई के रूप में सदियों से किया जा रहा है। कुलथी दाल न सिर्फ सर्दी-बुखार से निजात दिलाने का काम करती है, बल्कि गले के संक्रमण को दूर करने का काम भी कर सकती है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार कुलथी की दाल का पानी भी सर्दी-खांसी से छुटकारा दिला सकता है।

इनसब के साथ ही गाजर , चुकंदर , शकरकंद , जैसे और कंद सब्जिओ को भी हम कई तरह से अपने आहार में शामिल कर सकते हैं। इसके अलावा ड्राई फ्रूट्स और हाई कैलोरी फूड्स का भी प्रयोग हम इस मौसम में कर सकते है।

कब्ज दूर करने के 7 असरदार उपाय

कॉन्स्टिपेशन आजकल काफी कॉमन प्रोब्लेम्स में से एक है। कॉन्स्टिपेशन यानी हमारे डायजस्टिव सिस्टम का ठीक प्रकार से काम न करना। हर किसी को कभी न कभी यह प्रॉब्लम होती ही है पर कई बार यह प्रॉब्लम इतनी ज्यादा होती है की इसकी वजह से कई और हेल्थ प्रॉब्लम होना स्टार्ट हो जाती है।

हम जो भी खाते है हमारा डाइजेस्टिव सिस्टम उसको डाइजेस्ट करके उसे एनर्जी में बदल देता है। यानी हम जो भी भोजन लेते है उससे हमारा शरीर nutrients यानि पोषक तत्वों को अब्सॉर्व कर लेता है और इस प्रक्रिया में जो भी टॉक्सिन्स और वेस्ट पदार्थ होते है उनको मल यानी स्टूल के रूप में शरीर से बाहर कर देता है पर जब इस सिस्टम में कुछ प्रॉब्लम हो जाती है तो ऐसा नहीं हो पाता जिसे कॉन्स्टिपेशन या कब्ज कहा जाता है।

इसकी वजह से सुस्ती , आलस रहना, किसी काम में मन न लगना , कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कॉन्स्टिपेशन के कारणों की अगर बात करें तो इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे – पानी कम पीना , नींद पूरी न होना , खाने में फाइबर की कमी , किसी दवाई के साइड इफ़ेक्ट के कारण , ठंडा भोजन करने से, ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी न करने से , स्मोकिंग या शराब के ज्यादा सेवन से , भोजन में हैल्दी फैट की कमी के कारण , मेदा और जंक फ़ूड के ज्यादा सेवन , इसके अलावा चिंता या तनाव में रहना भी हमारे डाइजेस्टिव सिस्टम को बिगाड़ सकता है इसका कारण यह है की हमारे ब्रेन और डाइजेस्टिव सिस्टम एक दूसरे को प्रभावित करते है।

हम इन कारणों को जान कर उससे जुड़ी सावधानियों को अपनाकर इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं जैसे नींद पूरी लें , खाने में सलाद को जरूर शामिल करें , हैल्दी फैट जैसे दूध और घी और संतुलित मात्रा में वेजिटेबल आयल का प्रयोग करें , रेगुलर एक्सरसाइज या वाक या योग करें , कोशिश करें की खाना कम मसाले और कम तेल में बना हुआ लें और जंक फ़ूड का सेवन ज्यादा न करें। इसके साथ ही कम से कम 10 गिलास पानी जरूर पियें। मैदा और फ्रोजेन मीट का प्रयोग कम करें।

खाने का टाइमिंग फिक्स रखें यानी अपने ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर का टाइम फिक्स करें और उसी समय पर खाना खाये। खाने का रूटीन सही नहीं होने से भी कब्ज और दूसरी डाइजेस्टिव सिस्टम रिलेटेड प्रोब्लेम्स होने लगती है।
अपनी डाइट में एक से अधिक अनाजों को शामिल करें जैसे गेहूं , चावल , मुंग , रागी , ज्वार , बाजरा , मक्का , चना। इससे आपको सभी के पोषक तत्व मिल पाते हैं और फाइबर भी पर्याप्त मात्रा में मिलता है।

खाना खाते समय जल्दबाजी न करें। खाना आराम से बैठकर और अच्छे से चबा कर खाएं। इसके अलावा अपने खाने में दही और फर्मेन्टेड फ़ूड को शामिल करें , यह नेचुरल प्रोबिओटिक्स से भरपूर होते है प्रोबिओटिक्स यानी गुड बैक्टीरिया जो हमारे डाइजेशन में हेल्प करते हैं। इसके अलावा टोमेटो सूप , वेजिटेबल स्टॉक्स का सेवन भी कॉन्स्टिपेशन को कम करने में प्रभावी होता है। खाने के बाद अजवाइन या सौंफ चबा कर खाएं।

अब बात करते है कुछ घरेलु उपायों की जिनको अपना कर आप अपनी कॉन्स्टिपेशन यानि कब्ज की समस्या को कम कर सकते हैं।

डेट्स यानी खजूर को रात भर पानी में भीगाकर रखें और सुबह इसको मसलकर उसी पानी के साथ इसको खाली पेट पियें।

रात में सोने से पहले भुने हुए जीरे और अजवाइन को पीसकर रखलें। एक चम्मच इस पाउडर को गुनगुने पानी के साथ लें। इसके अलावा अलसी को भूनकर उसका पाउडर बना कर रख लें और रात में सोने से पहले अलसी के पाउडर को गर्म पानी के साथ ले सकते हैं। ये दोनों तरीके इंटेस्टाइन को साफ़ करने के साथ ही पूरे डाइजेस्टिव सिस्टम को ठीक करते हैं।

किशमिश को रात भर पानी में भिगो कर रखें और सुबह खाली पेट इन भीगी हुई किशमिश को खालें। इससे कब्ज से राहत मिलती है। यहाँ आप किशमिश की जगह मुनक्के का प्रयोग भी कर सकते है।

दोपहर में खाने के बाद थोड़ा गुड़ व घी मिलाकर खाएं। गुड़ में आयरन और घी में वसा यानी फैट होता हैं। इन दोनों का मेल आंतों को साफ रखने में हेल्प करता है। इसके अलावा 3 से 4 बजे के आसपास तरबूज या नाशपाती खाना भी पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में हेल्प करता है।

अंजीर में भरपूर मात्रा में फाइबर्स होते है जो की पाचन के लिए काफी अच्छा होता है। अंजीर को 2-3 बादाम के साथ कुछ घंटे भीगा कर रखें और रात में सोने से पहले इन भीगी हुई अंजीर और बादाम का पेस्ट बनाकर एक चम्मच शहद के साथ खाएं। इससे कब्ज दूर होता है।

सौंफ का प्रयोग भी कब्ज को दूर करने में काफी प्रभावी होता है। इसके लिए सौंफ को थोड़ा सा भूनकर उसका पाउडर बनाकर किसी एयरटाइट डब्बे में रखलें और नियमित रूप से आधा चम्मच इस पाउडर को गर्म पानी के साथ लें।

सेब , अमरूद , पपीता , पालक , मेथी को नियमित रूप से लें। यह सभी पाचन को अच्छा बनाते हैं और कब्ज को दूर करते हैं। इसके अलावा इसबगोल और त्रिफला चूर्ण का प्रयोग भी कब्ज दूर करने में किया जाता है।

ये कुछ घरलू उपाय हैं जिनको अपना कर हम कॉन्स्टिपेशन की प्रॉब्लम को दूर कर सकते हैं। यदि आपको लगातार कई दिनों तक कब्ज की समस्या रहती है और किसी भी उपाय से आपको कोई फायदा नहीं होता तो आपको डॉक्टर से सलाह जरूर लेना चाहिए। इसके अलावा यदि आपको सीवियर कॉन्स्टिपेशन के साथ ही पेट दर्द या वजन तेजी से कम होने जैसे लक्षण हो तो आपको तुरंत मेडिकल सलाह की जरूरत है।

Q. कब्ज या कॉन्स्टिपेशन किस स्थिति को कहा जाता है?

Ans. यदि लगातार तीन या इससे ज्यादा दिन तक पेट साफ़ नहीं होता तो इसे कॉन्स्टिपेशन कहा जाता है। इससे ज्यादा समय तक मल के शरीर के अंदर रहने से स्टूल यानी मल बहुत ज्यादा सख्त हो जाता है जिससे उसका बाहर निकलना और भी दर्द दायक होता है।

Q. डॉक्टर को कब दिखाना जरूरी हो जाता है?

Ans. यदि लगतार एक सप्ताह से ज्यादा समय तक पेट साफ़ नहीं हुआ और पेट में अकड़न , दर्द हो या टॉयलेट के टाइम बहुत ज्यादा दर्द और खून आता हो इसके साथ ही तेजी से वजन कम हो रहा हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाया जाना चाहिए।

Q. कॉन्स्टिपेशन या कब्ज में कौन से ड्रिंक्स फायदा करते हैं ?

Ans. गुनगुने पानी में नीम्बू डाल कर पियें या अदरक को पानी में उबाल कर उसमे शहद और एक चुटकी काला नमक डाल कर पियें। इसके अलावा छाछ , सौंफ का पानी , अजवाइन का पानी , एलोवेरा जूस भी कब्ज दूर करने में प्रभावी होते है। इसके अलावा गर्म दूध में थोड़ा सा घी डाल कर सोने से पहले पियें।

Q. कौन से योगासन से कब्ज / कॉन्स्टिपेशन दूर होता है ?

Ans. पवनमुक्तासन , मालाआसन , बालासन, मत्स्यासन ,नौकासन

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दिल की अच्छी सेहत के लिए 9 असरदार तरीके

हमारा दिल हमारे शरीर के सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण अंगो में से एक है। हम सभी जानते ही है की हमारा मस्तिष्क और हार्ट , ये ही वो अंग है जो हमारे पैदा होने से लेकर हमारी आखरी सांस तक लगातार काम करते रहते है। इसीलिए दिल यानि हार्ट का हमेशा ख्याल रखना जरूरी है। अपने हार्ट को हैल्दी रखने के लिए हम कुछ बातो का ख्याल रख कर खुद को और अपने अपनों हार्ट से रिलेटेड प्रोब्लेम्स से बचा सकते है।

हम अपने दिल को स्वस्थ यानि हैल्दी बनाये रखने के लिए कुछ आसान से टिप्स को फॉलो कर सकते है जिससे हम किसी भी हार्ट रिलेटेड प्रॉब्लम को होने से रोक सकते है।

  1. योग , मैडिटेशन या कोई भी एक्सरसाइज करें या आधा घंटे की वॉक करें। हार्ट को हैल्दी और फिट रखने के लिए जरूरी है कम से कम 30 मिनट की फिजिकल एक्सरसाइज जरूर करें। इससे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है। इसके अलावा योग और मैडिटेशन से शरीर में स्ट्रेस हॉर्मोन का लेवल कम होता है जो तनाव को कम करता है। तनाव, हार्ट प्रोब्लेम्स के मुख्य कारणों में से एक होता है। इसके साथ ही एक्सरसाइज से हमारी इम्युनिटी भी बढ़ती है।
  2. अपने डाइट में फ्रेश फ्रूट्स और वेजटेबल्स को बढ़ाएं। सब्जियों में पालक , ब्रोक्कली , लोकि , तरोई , करेला , कद्दू को शामिल करें। यह सभी सब्जियां अनेक मिनरल्स और विटामिन्स से भरपूर होती है जो बॉडी को सभी आवश्यक नुट्रिएंट्स प्रदान करती है। इनसब के साथ ही सलाद को भी अपने खाने में शामिल करे। खाने के साथ टमाटर , प्याज , लहसुन , खीरे का प्रयोग करें जिससे ब्लड प्रेशर ठीक रहता है और हमारे ब्लड वेसेल्स में ब्लॉकेज की प्रॉब्लम होने की संभावना कम हो जाती है। सभी बेरीज़ जैसे स्ट्रॉबेरी , लीची , ब्लैकबेरी , ब्लूबेरी और पाइनएप्पल , अनार , तरबूज , केला , खट्टे फलों को जरूर लें।
  3. तनाव कम करें – तनाव का सीधा संबंध ब्लड प्रेशर से होता है यदि हम टेंशन में रहते है तो हमारे शरीर में ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है जो न सिर्फ दिमाग के लिए बल्कि दिल के लिए भी खतरा बन सकता है। इसलिए तनाव को कम करने की कोशिश करें। ध्यान , प्राणायाम करें। इसके अलावा आप अपने आप को अपने पसंद के कामो में बिजी कर सकते है। धीमा म्यूजिक सुने , या अपनी बातो या परेशानियों को कही लिख लें। इससे आप को राहत मिल सकती है।
  4. नींद पूरी लें। एक सामान्य स्वस्थ व्यक्ति को कम से कम 7-8 घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए। यह हमारे हार्ट के लिए काफी जरूरी होता है। इसका कारण यह है की जब हम कम नींद लेते हैं तो हमारे शरीर में स्ट्रेस हॉर्मोन का स्तर बढ़ जाता है जिसका असर ब्लड प्रेशर पर पड़ता है। हमारे स्वस्थ दिल के लिए समान्य ब्लड प्रेशर का होना बहुत जरूरी होता है। इसके अलावा 8 घंटे से ज्यादा सोना हमारे बेसेल मेटाबोलिक रेट को कम कर देता है जिससे मोटापा बढ़ता है जो फिर हृदय रोगो का कारण बन जाता है। इसलिए पर्याप्त नींद लेना जरूरी है। कम और ज्यादा दोनों ही हमारे लिए नुकसानदायक होता है।
  5. ज्यादा देर तक बैठे रहने से बचें। हममे से अधिकतर लोग ऑफिस में लगातार बैठे बैठे काम करते रहते है और काम की व्यस्तता में हमारा ध्यान इस तरह नहीं जा पाता की हमे थोड़ी थोड़ी देर में उठ कर टहल लेना चाहिए। यदि टहलना पॉसिबल न हो तो आप कुछ देर खड़े होकर फिर बैठ सकते है। या फिर बैठे बैठे ही थोड़ी स्ट्रेचिंग कर लें।
  6. ट्रांस फैट का प्रयोग न करें। यह हार्ट प्रोब्लेम्स को बढ़ाते है। इनका ज्यादा सेवन काफी खतरनाक हो सकता है। ट्रांस फैट एक प्रकार के अनसैचुरेटेड फैटी एसिड्स होते हैं जो हमारे शरीर में गुड कोलेस्टेरोल यानि HDL को कम करके बुरे कोलेस्ट्रॉल यानि LDLको बढ़ा देते है। इस तरह के डिस्टर्बेंस की वजह से हार्ट स्ट्रोक और हार्ट डिसीज़ का खतरा बढ़ जाता है। ट्रांस फैट बेक्ड फ़ूड आइटम्स जैसे केक , कुकीस, बिस्किट्स ,फ्राइड फूड्स , फ्रेंच फ्राइज , डोनट्स , फ्राइड चिकन , फ्रोजेन पिज़्ज़ा , नॉन डेरी कॉफ़ी क्रैमर्स में पाया जाता है। इसके अलावा हाइड्रोजनेटेड ऑयल्स भी ट्रांस फैट का स्त्रोत होते हैं।
  7. वेजिटेबल आयल का प्रयोग करें। वेजिटेबल ऑयल्स नॉर्मल्ली हैल्दी होते हैं। पर इनका भी बहुत अधिक मात्रा में लिया जाना वजन बढ़ने के साथ साथ अन्य हेल्थ प्रोब्लेम्स को बढ़ा सकता है इसलिए तेल को सही मात्रा में लिया जाना चाहिए। सभी वेजिटेबल ऑयल्स में पॉली अनसैचुरेटेड फैटी एसिड्स होते है जो हमारे लिए काफी फायदेमंद होते हैं। मूंगफली , सरसो , सोयाबीन , सनफ्लॉवर , सभी तेलों में अलग अलग पोषक तत्व मिलते हैं इसलिए हम इनका अलग अलग डिशेस में प्रयोग करके सभी के फायदे ले सकते हैं। इसके अलावा कोकोनट , ओलिव आयल , केनोला आयल का प्रयोग भी किया जाता है। इसके अलावा आप जब तेल खरीदे तो इस बात का ध्यान दें की कच्ची धानी या कोल्ड प्रेस्सेड आयल खरीदें। रिफाइंड आयल का ज्यादा इस्तेमाल कुछ समय के बाद हेल्थ प्रोब्लेम्स को शुरू कर सकता है।
  8. नमक का प्रयोग कम करें। ज्यादा नमक ब्लड प्रेशर बढ़ाता है जो नार्मल हार्ट फंक्शन पर बुरा प्रभाव डालता है। इसके साथ ही घर में बना ताज़ा खाना ही खाएं। बाहर के खाने में स्वाद और उसको ज्यादा देर तक ख़राब न होने के लिए काफी ज्यादा तेल और नमक का प्रयोग होता है जो हमारे शरीर में ब्लड प्रेशर को बढ़ाने के साथ ही वजन बढ़ने का भी कारण बनता है।
  9. सिगरेट और शराब का सेवन नहीं करें। इसके अलावा प्रोसेस्ड फ़ूड , ज्यादा तेल मसाले वाला खाना , जंक फ़ूड को खाने से बचे। यह सभी चीज़े वजन बढ़ाने और शरीर में फ्री रेडिकल्स को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होती है। जिसका सीधा संबंध हमारे दिल की सेहत से होता है। इसलिए इनसब का सेवन जितना कम कर सके उतना अच्छा होता है।

यदि आपको हृदय से संबंधित कोई समस्या है तो अपने डॉक्टर से सलाह लेकर ही ड्राई फ्रूट्स खाएं। आमतौर पर हार्ट पेशेंट्स को ड्राई फ्रूट्स में से कुछ ही जैसे अंजीर , मुनक्का , डेट्स यानि खजूर , मखाने यानि फॉक्स सीड्स खाने की सलाह दी जाती है। क्यूंकि बादाम , काजू , पिस्ता सहित ज्यादातर डॉयफ्रुइट्स हाई कैलोरी और हाई फैट कंटेंट वाले होते हैं। इसलिए कोई भी नट्स और सीड्स को डॉक्टर की सलाह के बाद ही लें।

सुबह सुबह अनुलोम , विलोम , वज्रासन , पर्वतासन और प्राणायाम जरूर करें। केवल 10 मिनट भी इनको करने से हमारा ब्लड सर्कुलेशन इम्प्रूव होता है और हम हृदय संबंधी रोगो से बच सकते हैं।

इन बातो के साथ ही कुछ छोटे छोटे उपाय है जिनको हम अपने डेली रुटीन में शामिल करके अपने दिल को स्वस्थ रहने में हेल्प कर सकते हैं जैसे –

लहसुन का प्रयोग करें। कई रिसर्च में ये साबित हुआ है की कच्चे लहसुन के सेवन से कई तरह की हार्ट प्रोब्लेम्स को दूर किया जा सकता है। इसलिए लहसुन की 2-4 कलियाँ खाली पेट या खाने के साथ लिया जाना चाहिए। लहसुन में गामा ग्लूटामिलसिस्टन नाम का एक केमिकल होता है जो ब्लड प्रेशर को बढ़ने से रोकता है। इसीलिए हाई बीपी से पीड़ित लोगो को खाली पेट कच्चा लहसुन खाने की सलाह दी जाती है। यदि आप कोई मेडिसिन ले रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही इसका प्रयोग करें।

लौकी का जूस – यदि आपको हार्ट प्रॉब्लम है या नहीं है , दोनों ही स्थितियों में रोजाना लौकी का जूस पीना बेहद फायदेमंद होता है। सुबह खाली पेट लौकी का जूस रेगुलर लेने से बैड कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम करने में मदद मिलती है और हार्ट के सामान्य और स्वस्थ रूप से काम करने में भी यह सहायक होता है। लौकी का जूस पीना भी हार्ट को हैल्दी तो बनाता ही है साथ ही डाइबिटीज़ , लिवर इन्फेक्शन , कॉन्स्टिपेशन यानि कब्ज जैसी समस्याओं को भी दूर करता है।

अनार का जूस – हैल्दी हार्ट के लिए अनार का जूस पीने की भी सलाह दी जाती है। अनार में फ्री रेडिकल्स से लड़ने वाले हाई लेवल एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं इसके अलावा अनार में धमनियों को ब्लॉकेज फ्री रखने और ब्लड प्रेशर में सुधार करने वाले तत्व भी मौजूद होते हैं।

स्ट्रॉबेरी हमारे दिल को अनेक बीमारियों से बचाती हैं, ये एचडीएल (अच्छा) कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने में , बीपी को कम करने में मदद करती है इसके अलावा इसमें विटामिन, फाइबर और विशेष रूप से पॉलीफेनोल्स नाम के उच्च स्तर के एंटीऑक्सिडेंट भी पाए जाते हैं ।

डार्क चॉकलेट आपके दिल की सेहत के लिए अच्छी है।डार्क चॉकलेट में फ्लवोनोइड्स पाए जाते है जो दिल से संबंधित रोगों के खतरे को कम करते हैं। रोजाना थोड़ी सी डार्क चॉकलेट भी हार्ट को हैल्दी बनाए रखने में मदद करती है। कम शुगर और कम मिल्क कंटेन्ट वाली डार्क चॉकलेट रोगों से लड़ने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है और हृदय संबंधी रोगों के खतरे को कम करती है। एक्सपर्ट्स , एक सामान्य व्यक्ति को प्रतिदिन 30 gm डार्क चॉकलेट खाने की सलाह देते हैं।

इन सब के साथ ही अपने वजन और ब्लड प्रेशर को समान्य रख कर भी हम अपने आप को हार्ट रिलेटेड प्रोब्लेम्स से बचा सकते हैं। क्यूंकि मोटापा और हाई बीपी और तनाव , दिल की बीमारियों के मुख्य कारण हैं। इसलिए तनाव से बचें , खुश रहें , संतुलित आहार यानि बैलेंस्ड डाइट लें।

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