5 आदतें जो चर्बी घटाएं सिर्फ एक महीने में

स्वस्थ और फिट रहने का सबसे बड़ा फायदा है एनर्जेटिक रहना .वजन बढ़ने और मोटापे की वजह से कई बीमारियों के साथ ही हमारा कॉन्फिडेंस भी कम हो जाता है और एनर्जी भी। जिसकी वजह से हमेशा थकान और कोई न कोई दर्द या समस्या बनी रहती है। इसलिए आज हम बात करते हैं उन आदतों की , जो आपको बिना किसी हैवी वर्कआउट के फैट बर्न करने में मदद करती हैं। इन आदतों से आप न सिर्फ और भी फिट होंगे बल्कि इससे आपका वजन भी कम करने में मदद मिलेगी।

पानी की मात्रा बढ़ा दें – पानी वैसे भी हमारे शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।एक सामान्य व्यक्ति को दिन में कम से कम 2 -3 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए। यह न सिर्फ बॉडी टेम्परेचर को रेगुलेट करता है बल्कि मेन्टल और फिजिकलहेल्थ को बनाये रखने में भी बहुत बड़ा रोल निभाता है। यदि आपका वजन ज्यादा है और आप मोटापे से परेशान हैं तो आपको ज्यादा पानी पीने की आदत डालनी चाहिए। इससे न सिर्फ शरीर हाइड्रेट रहता है बल्कि आपका BMR भी बढ़ जाता है। BMR कम होना वजन बढ़ने के मुख्य कारणों में से एक है।

पानी पर्याप्त मात्रा में पीने से बार बार खाने का मन नहीं होता। वजन बढ़ने की समस्या के कारण पर गौर करें तो हम देखेंगे की हम थोड़ी थोड़ी देर में कुछ न कुछ खाते रहते हैं,ऐसा जरूरी भी नहीं की जब आप भूखे हों तब ये फीलिंग आये , कई बार खाने के बाद भी हमारा कुछ खाने का मन करने लगता है और इस तरह की भूख में ज्यादातर हम कुछ मीठा खाने को ढूढ़ते हैं। इसका कारण यह है की जब हम पानी कम पीते हैं तो हमारे शरीर को खाने के बाद भी सैटिस्फैक्शन यानि तृप्ति नहीं होती जिससे हम और खाने के लिए प्रेरित होते रहते हैं। इसके लिए खाने के आधा घंटे पहले एक गिलास पानी पीने की आदत बनाएं।

फलों और सब्जियों को खाने में ज्यादा शामिल करें – फैट को कम करने के लिए ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियों और उन फलों का सेवन करना शुरू करें जिनमे पानी ज्यादा होता है। जैसे तरबूज , पपीता ,अनानास ,खरबूज ,संतरा , मोसम्मी , खीरा , गाजर , अमरुद। सब्जियों में लोकि ,तोरई , मेथी , पालक , करेला , ब्रोक्कली ज्यादा लें। यह सभी फैट बर्न करने में मदद करते हैं और पाचन संबंधी समस्याओं को कम करके पेट निकलने की प्रॉब्लम को सॉल्व करते हैं। खाने में जब भी मीठा खाने का मन हो तो चॉकलेट , आइसक्रीम या कुछ स्वीट्स खाने के बजाये कोई फल लें। इसके अलावा फलों की स्मूथीस और जूस बनाकर भी आप ले सकते हैं।

खाने के साथ बड़ी प्लेट में सलाद खाने की आदत डालें – खाने में फाइबर कम होने से कॉन्स्टिपेशन यानी कब्ज की समस्या होने लगती है। इसके लिए सलाद को खाने में शामिल करना बहुत जरूरी होता है। फाइबर एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करने के साथ ही ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है।

घर का बना खाना खाएं – पैक्ड फ़ूड और फ़ास्ट फ़ूड में आयल का ज्यादा प्रयोग और प्रोसेस्ड चीज़ों का ज्यादा प्रयोग करना वजन को अनहेल्दी तरीके से बढ़ाता है। इसके बजाए घर में खाना बनाने से आप उसमे तेल , मसाले और दूसरे इन्ग्रेडिएन्ट्स की मात्रा को अपने अनुसार रख सकते हैं। बाहर के खाने को सीमित करें कोशिश करें की ज्यादा से ज्यादा घर में बना खाना ही खाएं।

कुछ चीज़ों का सेवन रोक दें – अचार, सॉस, ज्यादा शक्कर ,चाय कॉफ़ी ,कोल्ड ड्रिंक्स , आईस्क्रीम और मेदे से बनी चीजों का सेवन कम करें। मीठे के लिए शक्कर की जगह गुड़ या शहद का प्रयोग करें। चाय कॉफ़ी के बजाए सुबह निम्बू शहद पानी या ग्रीन टी लें। स्नैक्स में मेदे से बनी चीज़ों की जगह अंकुरित अनाज या भुने चने या मूंगफली , या मिक्स वेज या फ्रूट सलाद को शामिल करें।

मोटापा कम करने के घरेलु नुस्खों के बारे में पढ़ें

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कैसे करें डायबिटीज को कंट्रोल

आजकल के समय में कुछ समस्यांए इतनी आम हो गईं हैं की उनको हम ये मान कर चलते हैं की उम्र बढ़ने के साथ ये प्रोब्लेम्स तो होती ही हैं। डाइबिटीज़ भी उन्ही समस्याओं में से एक है।

डाइबिटीज़ /मधुमेह (शुगर) की बीमारी से देश के करोड़ों लोग पीड़ित हैं। लगभग हर किसी के घर परिवार में कोई न कोई शुगर पेशेंट तो होता ही है।पहले के समय में डाइबिटीज़ को बड़ी उम्र में होने वाला रोग माना जाता था पर आजकल ये कम उम्र में भी दिखने लगा है । मधुमेह के कारणों पर गौर करें तो पायेंगे की इसके लिए हमारी जीवन शैली सबसे बड़ा कारण है इसके अलावा कई मामलो में यह जेनेटिक भी होता है और कभी किसी मेडिकल स्थिति के कारण।

डाइबिटीज़ मतलब ब्लड में ग्लूकोस का सामान्य मात्रा से ज़्यादा होना। वैसे तो यह एक ही रोग है पर इसकी वजह से कई और गंभीर रोग होने का खतरा होता है जैसे रक्तचाप यानि बीपी का डिस्टर्ब होना, हार्ट रिलेटेड प्रोब्लेम्स ,किडनी रिलेटेड प्रोब्लेम्स ,आँखों की समस्या होना , कोई भी चोट या इन्फेक्शन का देर से ठीक होना, ब्रेन स्ट्रोक , पैरालिसिस , अल्ज़ाइमर का भी खतरा हो सकता है। इसलिए इसे कण्ट्रोल किया जाना बहुत ज़रूरी होता है।

डाइबिटीज़ के लक्षणों की अगर बात करें तो इसके शुरूआती लक्षण हैं-

ज़्यादा प्यास लगना

बार बार भूख लगना

जल्दी जल्दी इन्फेक्शन होना

थकान रहना

बार बार पेशाब आना

स्किन ड्राई होना और खुजली होना

वजन कम होने लगना

दवाइयों के साथ साथ डाइबिटीज़ को नियंत्रित रखने के मुख्य तरीके हैं – योग या एक्सरसाइज और सही आहार ।


योग अभ्यास जैसे कि आसन, प्राणायाम, मुद्राएं, बंध, ध्यान, ब्लड ग्लूकोस के स्तर को कम करने में सहायता करते है। शुगर को कण्ट्रोल करने के लिए नियमित रूप से प्राणायाम , सूर्य नमस्कार करें ।

सूर्य नमस्कार मधुमेह यानी डाइबिटीज़ से पीड़ित लोगों के लिए एक अत्यंत लाभकारी योगाभ्यास है क्योंकि यह ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करता है और शरीर में इंसुलिन के सेक्रीशन को ठीक करता है।

कपालभाति और प्राणायाम जैसे आसन का यदि नियमित रूप से अभ्यास किया जाए तो यह डाइबिटीज़ को नियंत्रित करने में काफी प्रभावी हैं। इसके लिए खाली पेट 15 से 30 बार तक इन आसनों का अभ्यास करना चाहिए।

अनुलोम विलोम 10 मिनट , मंडूक आसान 5-5 बार करें।रिसर्च में ये पाया गया है की योग के नियमित अभ्यास से टाइप 2 डाइबिटीज़ को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है इससे ब्लड ग्लूकोस के स्तर पर काफी सकारात्मक सुधार होता है।

अर्ध मत्स्येन्द्रासन ,धनुरासन (धनुष मुद्रा), वक्रसाना, मत्स्येन्द्रासन (आधा-रीढ़ की हड्डी को मोड़), हलासन (हल के मुद्रा) करने से पेट संकुचित होता है और पेन्क्रियास में इन्सुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाओं को ठीक करता है जिससे इंसुलिन का स्राव होने लगता है और इस तरह बिना किसी परिश्रम के मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

घरेलु उपचार

एक बड़ा चम्मच मेथी दाना एक गिलास पानी में डालकर रात भर के लिए रख दें , सुबह खाली पेट इस पानी को पियें और मेथी को चबाचबा कर खाएं। इसे लेने के पहले और बाद में 40-45 मिनट तक कुछ ना खाएं।

सावधानी – गर्मी के मौसम में मेथी कम खाना चाहिए। जिन्हे कफ, बदहज़मी ,अस्थमा, थाइरॉइड की शिकायत हो उन्हें मेथी नहीं लेना चाहिए। इसे लम्बे समय तक नहीं लेना है 3 महीने लेने के बाद 1 महीने रुक कर फिर शुरू कर सकते हैं।

मेथी – 200 gm ,अजवाइन– 100 gm , काली जीरी – 50gm । इस तीनो को अलग अलग भून लीजिये। अब इसे अच्छे से पीस कर मिलाकार चूर्ण बना लें। रात के खाने के दो घंटे बाद एक चम्मच इस चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ खाएं।

मेथी दाना1 बड़ा चम्मच , हल्दी – आधी छोटी चम्मच , दालचीनी – चुटकी भर
एक गिलास पानी में इनसब को डालकर उबाल लें और जब पानी आधा हो जाए , तो उसे रख लें । यह सुबह खाली पेट लेना है और इसके एक घंटे बाद तक कुछ नहीं लेना है।

करेले में एक इंसुलिन जैसा यौगिक होता है जिसे पॉलीपेप्टाइड-पी या पी-इंसुलिन कहा जाता है जो प्राकृतिक रूप से डाइबिटीज़ को नियंत्रित करने में सहायता करता है।

करेले का जूस पीने से ब्लड शुगर लेवल को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है। करेले को छीलकर उसमे से बीज और सफेद भाग हटा कर छोटे छोटे टुकड़े काट लें और इसे आधा घंटे के लिए ठंडे पानी में भीगा कर रखें और फिर इसमें आधा चम्मच नमक और निम्बू का रस डालकर जूस बना लें। इसे सुबह खाली पेट लें।

जौ के पानी में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में उपयोगी होते है। इसके लिए जौ को पानी में डालकर 15 मिनट के लिए गर्म करके रख लें और रोज़ इसे खाने के बाद पियें।

जामुन और इसके पत्ते ब्लड ग्लूकोस के स्तर को कम करने में काफी मददगार हैं। रोज़ लगभग 100 ग्राम जामुन का सेवन करने से आपके ब्लड ग्लूकोस लेवल में जबरदस्त सुधार आता है।

दालचीनी में एक बायोएक्टिव कंपाउंड होता है जो डाइबिटीज़ को रोकने में मदद कर सकता है। दालचीनी , इंसुलिन को प्रेरित करता है और ब्लड ग्लूकोस लेवल कम कर देता है। इसके लिए एक गिलास पानी में 2 इंच दालचीनी का टुकड़ा या या पाउडर भिगोएँ। इसे रात भर छोड़ दें और सुबह खाली पेट इसे पी लें।इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए इसका अधिक सेवन हानिकारक होता है।

गिलोय की २-२ गोली सुबह शाम लें या गिलोय का काढ़ा बनाकर भी पी सकते हैं।

इसके अलावा डाइबिटीज़ को नियंत्रित रखने के लिए हमें कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए जैसे तली हुई चीज़े , जंक फ़ूड , शहद , मिठाई,गुड़ ,कोल्ड ड्रिंक , मीठे बिस्कुट ,सॉस ,सूजी ,साबूदाना ,मखाने पैक्ड फ़ूड,मीठे फल नहीं खाना चाहिए।

प्रतिदिन पानी 8-10 गिलास पानी पियें और अपनी डाइट में हरी सब्जियों, फली वाली सब्जियों, शिमला मिर्च , टमाटर ,लोकि ,तोरई, गोभी,मटर , प्याज, लहसुन को शामिल करें। फलों में संतरा , मौसमी , अनार,जामुन ,पपीते का सेवन करें।

इस बात का ध्यान रखें की आप भूखे न रहें और एक बार में बहुत ज़्यादा न खाएं। छोटे छोटे मील्स लें और दिन में 4-5 बार खाएं। ब्रेकफास्ट बिलकुल स्किप ना करें।

मोटापा कम करने के 10 आसान तरीके

आजकल की व्यस्तताभरी ज़िंदगी में हम कई बार अपने आप को अनदेखा कर देते हैं। जिसका प्रभाव हमारे डेली रूटीन ,लाइफ स्टाइल,डाइट इन सभी पर पड़ता है, जो हमारी हेल्थ और पर्सनालिटी पर भी दिखता है। इससे सम्बंधित सबसे आम समस्या है मोटापा यानी ओवरवेट होना। आज कल के लाइफस्टाइल में जबकि फिजिकल वर्क काफी कम होने लगा है हमारा ज़्यादातर काम दिमाग वाला होता है जिसमे ज्यादा चलना भागना शामिल नहीं होता। ज्यादा देर तक ऑफिस में बैठे हुए काम करते रहना हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा सा बन गया है इसके बाद देर से खाना और सोना। यह लगभग हर घर की कहानी सा लगता है। ऐसे में मोटापा आना बहुत ही सामान्य है। हर कोई मोटापा कम करना चाहता है, परंतु कभी आलस के कारण तो कभी समय के अभाव के कारण एक्सरसाइज नहीं हो पाती।

मोटापे का मुख्य कारण है , हमारे बेसल मेटाबोलिक रेट (BMR) का कम होना। इसके कम होने से हम जो भी खाते हैं वो देर से डाइजेस्ट होता है और बॉडी में फैट को बढ़ाता है। बेसल मेटाबोलिक रेट को धीमा या कम करने के लिए मुख्य रूप से जो कारण जिम्मेदार होते है वो हैं -हमारी गलत लाइफ स्टाइल , किसी बीमारी या हार्मोनल बदलाव के कारण या जेनेटिक कारणों से।

मोटापे से होने वाले नुकसान की बात करें , तो ये कई गंभीर रोगों का कारण भी बनता है इसलिए अपने वजन को नियंत्रित रखना बेहद ज़रूरी है। इसके कारण घुटनो , कमर दर्द के साथ साथ ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याएं , डायबिटीज , किडनी रोग ,ह्रदय सम्बंधित रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए अपने वजन को लेकर हमेशा सजग रहना बहुत आवश्यक है।

मोटापे को कम करने के तरीकों में हम एक्सरसाइज के साथ ही उन तरीकों की भी बात करेंगे जिसे अपना कर आप अपना बेसल मेटाबोलिक रेट बढ़ा सकते है, जो वजन कम करने में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अब बात करते हैं उन घरेलु नुस्खों की जिनको अपनाने से मोटापा कम होने लगता है ये सभी उपाय शरीर में डाइजेशन को अच्छा करते हैं और एक्स्ट्रा फैट को कम करने में मदद करते है।

  1. हल्दी – गर्म पानी में हल्दी डालकर, सुबह खाली पेट पियें। हल्दी में एंटीबायोटिक , एंटी ऑक्सीडेंट्स होते हैं जो वात,पित्त , कफ तीनो दोषों को दूर करती है इससे मोटापा धीरे धीरे कम होता है।
  2. अजवाइन – एक चमच अजवाइन रात में भीगा कर रख दें , सुबह इसे हल्का गर्म करें और इसमें आधा नीम्बू का रस डालकर पियें। इसे पीने के 40 मिनट तक कुछ ना खाएं ।अजवाइन में एसेंशियल आयल होता है जिसे थाइमोल कहते है ये मेटाबोलिज्म को बढ़ाता है और शरीर के विषैले पदार्थ बाहर निकालने का काम करता है जिससे शरीर का फैट कम होता है।
  3. सोंठ , काली मिर्च और पीपली – इन तीनो को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाएं। इसे एक चम्मच सुबह नाश्ते के बाद और एक चम्मच रात के खाने के बाद गुनगुने पानी से लेने से भी वजन कम होता है।
  4. सौंफ , धनिया – दोनों को बराबर मात्रा में लेकर उसमे थोड़ा अदरक डाल कर पानी में 2-3 मिनट उबाल कर रख लें और दिन में 3-4 बार गुनगुना पियें। इससे फैट कम होगा।
  5. दालचीनी – एक से दो चम्मच दालचीनी पाउडर को एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर उसमे आधे नीम्बू का जूस और थोड़ा शहद डाल कर पियें। इस उपाय को रोज़ाना एक बार खाली पेट करें। इससे मोटापा कम होता है।
  6. गुड़ – एक ग्लास पानी में 20 ग्राम हल्का या गहरे रंग वाला गुड़ डाल कर रात भर के लिए रख दें। सुबह एक ग्लास सामान्य गुनगुना पानी पीने के 15 मिनट बाद ये गुड़ वाला पानी गुनगुना करके छान कर पियें। इसमें ध्यान देना है की सफ़ेद गुड़ न लें और गुड़ को कांच के ग्लास में डाल कर रखें।
  7. सौंफ – सौंफ को हल्का भून कर उसे पीसकर पाउडर बनाकर रख लें। और इसे गर्म पानी में मिलकर रोज़ खाने के 15 मिनट पहले पियें। ऐसा आपको दिन में दो बार करना है।
  8. ग्रीन टीइसमें कुछ पोलीफेनॉल्स पाए जाते हैं जो शरीर में जमा फैट को बर्न करने में सहायता करते हैं। दिन में 2-3 बार ग्रीन टी पीना भी मोटापे को कम करता है।
  9. पानी – दिनभर में कम से कम 10 गिलास पानी जरूर पियें। पानी पीने के लिए प्यास लगने का इंतज़ार न करें।
  10. खाने में सलाद जरूर खाएं और ज्यादा मीठा , कोल्ड ड्रिंक ,जंक फूड्स ,पैक्ड फ़ूड, आइसक्रीम, केक और ज्यादा तेल से बनी चीज़ों का सेवन ना करें। मीठा खाने की जगह फ्रूट्स खाने की आदत बनाएं।

इन सब के अलावा आप अपने दिनचर्या में थोड़े बदलाव करके भी मोटापा घटा सकते है जैसे दिन में कम से कम 30 मिनट की वाक , योगा या एक्सरसाइज ज़रूर करें।

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यदि किसी भी उपाय से आपके वजन में कमी नहीं होती तो आपको मेडिकल टेस्ट कराने चाहिए जिनसे आपके वजन बढ़ने का कारण का पता चल सकेगा और उसके लिए आपको डॉक्टर की सहायता लेनी होगी।

Q. Motapa kyu badhtaa hai?

Ans. Motapa badhne ke kai karan ho skte hain pr sbse bada karan hai high calories vala khana khaana or workout km karna jisse BMR km ho jata hai.

Q. Motapa km karne ka sbse asan tarekaa kya h?

Diet ya exercise ya dono ko folllow krke BMR ko bdha kar effectively motape ko km kr skte hain. iske sath sugar or oily food ko bhi km krna jruuri h.

Q. Kya home remedies motapa km krne me help karti hai ?

Ha home remedies se digestion ko improve karke or BMR ko badha kar motapa km kia ja skta h. souf , jeera water sahit kai ese ingredients hote hai jo sahi tarah se lie jane pr body ko slim bnate hai.

5 आदतें जो चर्बी घटाएं सिर्फ एक महीने में

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9 Unique ways to activate subconscious mind

ऐसा कहा जाता है की हम जैसा सोचते हैं वैसे बन जाते है इसके पीछे कोई मैजिक नहीं है बल्कि साइंस है। दरअसल इसके लिए सबकॉन्शयस माइंड यानी अवचेतन मन जिम्मेदार होता है।

हमारा सबकॉन्शियस माइंड यानी अवचेतन मन एक तरह का डेटा-बैंक है, जो वो सभी सूचनाएं और इनफार्मेशन स्टोर करके रखता है जो हमारे चेतन मन यानी कॉन्शियस माइंड में नहीं है। यह हमारे विश्वासों, पिछले अनुभव, यादों, हमारे स्किल्स को स्टोर करता है। जो कुछ भी कभी भी हमने देखा है, किया है या सोचा है वह भी स्टोर रहता है।

अगर हम कहें की हमारा सबकॉन्शियस माइंड हमारे हर एक काम को चाहे वो हम जानबूझ कर करें या अनजाने में सभी को कण्ट्रोल करता है तो इसमें बिलकुल भी आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

हमारा सबकॉन्शियस माइंड कितना पॉवरफुल होता है इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं की यह हमारे ब्रेन पावर का 95% हिस्सा होता है और हमारे खाने और सांस लेने से लेकर याददाश्त बनाने तक बहुत सारी इनफार्मेशन को स्टोर रखता है। हम कितने लोगो से मिलते है बात करते है कितने सारे स्वाद और खुशबू और आवाजों को पहचानते हैं ये सभी सूचनाएं एक डाटा की तरह हमारे माइंड में स्टोर रहती है। माइंड जर्नल के अनुसार हमारा सबकॉन्शियस माइंड कॉन्शियस माइंड की तुलना में दस लाख गुना ज्यादा पावरफुल होता है।

अब अगर हम कॉन्शियस और सबकॉन्शियस माइंड के अंतर को समझना चाहें तो इसे हम ऐसे समझ सकते हैं चेतन मन यानी कॉन्शियस माइंड में हम अपनी और अपने आसपास की दुनिया की बाते रखते हैं जबकि अवचेतन मन में वो चीज़ें भी शामिल होती हैं जिन्हे हम वर्तमान में तो नहीं जानते पर जरूरत पड़ने पर उसे कॉन्शियस माइंड में ला सकते हैं। हमारे सबकॉन्शियस मांइड में यादें , हमारे डर और विश्वास रहते है। इसीलिए यह हमारे जाने अनजाने ही हम जीवन में क्या करते हैं सबकॉन्शियस मांइड इसका डायरेक्शन करता है। कई बार हम कुछ बिना सोचे समझे ही कुछ करते हैं तो उसका नियंत्रण हमारा अवचेतन मन ही करता है। इसका सीधा सा कनेक्शन यही है की हम जब कुछ भी सोच रहे होते हैं तो फीलिंग हमारे सबकॉन्शियस माइंड के डेटाबेस में स्टोर होती रहती है।

हमारा सबकॉन्शियस माइंड एक तरह से हमारे कम्फर्ट जोन का गेटकीपर है यानी यह वह क्षेत्र है जहां आप खुद के ऐसे गोल्स और टार्गेट्स को पूरा करने के लिये सोचते हैं और रेगुलर उस तरफ प्रयास करते हैं जो आपको लाइफ की सबसे बड़ी सक्सेस और ख़ुशी दिलाएगी। जीवन में बहुत बड़े पैमाने पर बदलाव लाने के लिए पहला कदम है उस इम्पॉसिबल चीज़ को पॉसिबल देखना।

अब बात करते हैं कैसे हम अपने सबकॉन्शियस माइंड को एक्टिव करके अपनी लाइफ में अभूतपूर्व और आश्चर्यजनक बदलाव ला सकते हैं इसके लिए हमे कुछ टेक्निक्स पर काम करना होगा जैसे –

खुद को सफल बनाने के बारे में सोचिये। खुद को खुश रखने के लिए काम कीजिये। यदि आप मन से दुखी या हताश होंगे तो यह आपके सबकॉन्शियस माइंड में स्टोर होगा। जैसे अगर कोई वीडियो या ऑडियो फाइल करप्ट हो जाती है तो कुछ साफ़ समझ नहीं आता यही लॉजिक हमारे सबकॉन्शियस माइंड में भी अप्लाई होता है इसलिए सबसे पहले खुद को रिलैक्स और पॉजिटिव बनाये और अपने लक्ष्य के याद रखें।

दूसरों के डर और शक को अपने ऊपर हावी न होने दें। जैसे अगर आप किसी को अपनी किसी बड़ी महत्वाकांक्षा के बारे में बताते हैं तो अलग अलग लोग उसमे अलग अलग प्रतिक्रिया देते है उदाहरण के लिए अगर आप किसी को अपने बहुत बड़े प्लान के बारे में बताते हैं तो कुछ लोग आपको उसमे होने वाली परेशानियों और चुनौतियों के बारे में बतायेगे और कुछ लोग अपनी फेलियर को आपके साथ शेयर करेंगे। अब आप के सबकॉन्शियस माइंड में दोनों तरह के विचार स्टोर हो जाएंगे और आप जिस को ज्यादा सोचेंगे वही इफेक्टिव बनने लगेगा।

खुद को सकारात्मक रूप से बढ़ाइए / खुद में पॉजिटिव बदलाव लाइए , अच्छा सोचिये। उन बातो और घटनाओं को रिकॉल न करें जो आपमें गुस्सा , तनाव या डर पैदा करती हैं। मोटिवेशनल और पॉजिटिव बुक्स पढ़ें। कुछ नया सीखिए और उन कामो की लिस्ट बनाकर काम करें जो आपके लक्ष्य के लिए जरूरी है।

उन बदलावों को सोचिये जो आज आपको लगता है ये कभी नहीं बदल सकता। न सिर्फ उनको सोचिये बल्कि उन बातों और चीज़ों को देखिये। जैसा आप सोच सकते हैं वैसा हो सकता है ये बिलकुल लॉजिकल है। जैसे अगर आपको कोई बदलाव करना है तो उस बदलाव को ऐसे सोचिये और देखिये जैसे वो आपके अनुसार हो गया हो।

अपनी सफलता को भविष्य में नहीं आज में सोचिये जैसे की आप कुछ करना चाहते हैं तो उसे मैं शायद किसी दिन ऐसा करूँगा ना कह कर मैं अभी इस काम को कैसे कर सकता हूँ उसको समझ रहा हूँ। मैं उस तरह उस जगह खुश रहूँगा सोचने के बजाये ऐसा सोचें में खुश हूँ और मुझे कुछ भी परेशान नहीं कर सकता। इस तरह आप अपने सबकॉन्शियस माइंड में ख़ुशी वाला डाटा स्टोर कर रहे होते हैं।

अपने प्रतिरोध को पहचाने – कई बार ऐसा होता है की हम जो भी करना या बनना चाहते हैं तो हमारा मन उसको करने से हमे रोकता है जैसे कोई बड़ा काम करने के पहले हमारे मन में कई कमजोर विचार आते हैं जैसे यदि कोई बहुत इम्पोर्टेन्ट प्रोजेक्ट या एग्जाम की तैयारी से पहले हमे इस तरह के ख्याल आते है की शायद मैं उतना केपेबल नहीं या मुझसे भी ज्यादा स्मार्ट और इंटेलीजेंट लोग वहां होंगे। ऐसे विचार हमे इसलिए आते हैं क्यूंकि हमारे अवचेतन मन में हमने खुद को कम समझ रखा है। इसके लिए खुद पर भरोसा करना है और मन को विश्वास दिलाना है की आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।

एक मास्टर प्लान बनाइये – पांच साल या दस साल के प्लान्स के बजाये एक मास्टर प्लान बनाएं। अपने आप से पूछें की आप वास्तव में क्या चाहते हैं आप किस तरह का जीवन या विरासत देखना चाहते हैं और उसके लिए अपनी योजनाएं बनाएं।

महत्वाकांक्षी, सहयोगी और क्रिएटिव लोगों के साथ रहिये। याद रखें कि आप सही मायने में वही बनेंगे, जिसके साथ आप सबसे अधिक समय बिताते हैं, इसलिए अपने आस पास किस तरह के लोग हैं उसपर ध्यान दीजिये। यदि आप अपने फ्री टाइम में ऐसे लोगों के साथ घूम रहे हैं, जो अपने जीवन से नाखुश हैं, तो आप पर भी निराशावादी भाव आने लगेगा।

अपने उस समय को प्रोडक्टिवली यूज़ करें जब आप कुछ फिजिकल वर्क कर रहे हों। जैसे जब आप कुकिंग या अपने सुबह के डेली कामों में लगे होते हैं उस समय कुछ मोटिवेशनल या पॉजिटिव एनर्जी वाले ऑडियो सुने। ऐसा करने से हम अपने सबकॉन्शियस माइंड में पॉजिटिव और मोटिवेटिंग थॉट्स स्टोर करते है जो धीरे धीरे हमारी सोच और पर्सनालिटी में आने लगता है। इसलिए इस बात के लिए हमेशा सचेत रहें की आप क्या सुन , पढ़ और देख रहें हैं।

इस तरह सबकॉन्शियस माइंड बेहद शक्तिशाली सिस्टम होता है जो हमारी लाइफ को लगभग हर तरह से नियंत्रित करता है और चलाता है। यही कारण है की किसी की सलाह या बात आपके जीवन को प्रभावित नहीं कर सकती जब तक आप उसको अपने सबकॉन्शियस माइंड में डाल नहीं देते। इसका मतलब है जब तक आप अपने अवचेतन मन में जब तक किसी बात को नहीं रखेंगे तब तक उसका अच्छा या बुरा प्रभाव आप पर नहीं होगा।

सफलता , खुशियाँ और एक अच्छी लाइफ स्टाइल को हासिल करने का सबसे पॉवरफुल तरीका है अपने कॉन्शियस और सबकॉन्शियस माइंड के बीच संवाद यानि कम्युनिकेशन को बढ़ाना।मैडिटेशन ऐसा करने में काफी मददगार होता है। इसके लिए हमें अपनी सोच को पॉजिटिव बनाने के साथ ही अपने डर , शंकाओं और सभी तरह के नेगेटिव थॉट्स को अपने अवचेतन मन से मिटाना होगा।

Q. How powerful is the subconscious mind?

Ans. माइंड जर्नल के अनुसार हमारा सबकॉन्शियस माइंड कॉन्शियस माइंड की तुलना में दस लाख गुना ज्यादा पावरफुल होता है।

Q. What is subconscious mind?

Ans. सबकॉन्शियस माइंड हमारी आदतों , धारणाओं , विश्वास , अनुभवों पर आधारित होता है यह लॉजिक्स के बजाये फीलिंग्स पर ज्यादा चलता है।

Q. How to activate subconscious mind .

Ans. subconscious mind can be activated through Meditation , Visualisation , repeat for results and some more techniques like focus on positive thoughts.

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6 आसान और स्वादिष्ट डाइबिटिक ब्रेकफास्ट रेसिपीज़

हम सभी जानते है की डाइबिटीज़ के साथ कई सारे परहेज़ और खाने के कई चीज़ें प्रतिबंधित करनी पड़ती हैं। यही कारण है कई लोग हमेशा एक ही तरह का ब्रेकफास्ट और लंच लेकर बोर होने लगते हैं। कुछ चीज़ों को ध्यान में रखकर हम कुछ ऐसी रेसिपीज़ तैयार कर सकते हैं , जो न सिर्फ हैल्दी हैं बल्कि काफी टेस्टी और आसान है। इन्हे आप ब्लड शुगर को कण्ट्रोल करने के साथ ही वजन कम करने के लिए भी अपना सकते हैं।

  • ज्वार का चीला – ज्वार का चीला बनाने के लिए हमे जरुरत होगी – पालक , चुकंदर के पत्ते , एक प्याज कटा हुआ , कटा हुआ धनिया , मिर्ची , अदरक , जीरा, अजवाइन , काली मिर्च , हींग , हल्दी , नमक और ज्वार का आटा। इसे बनाने के लिए पालक और चुकंदर के पत्तों को अच्छे से धोकर, साफ़ करके काट लें। गाजर और टमाटर को मिक्सर में हल्का सा ग्राइंड करलें। अब 2 कप ज्वार के आटे में इन सभी इंग्रेडिएंट्स को मिलाकर थोड़ा गाढ़ा घोल यानी चीला का बेटर बनालें। अब तवे को थोड़ा गर्म करके उसमे थोड़ा सा तेल स्प्रे करके या 2-3 बून्द तेल डाल कर इसमें एक बड़ा चम्मच बेटर डाल कर चीला बनाएं। इसे आप दही या किसी भी चटनी के साथ ले सकते हैं। ज्वार हाई क़्वालिटी फाइबर से भरपूर होता है जो पाचन को सुगम बनाने, मोटापे को नियंत्रित करने, ब्लड ग्लूकोस के लेवल को नियंत्रित करने और हाई बीपी और स्ट्रोक के खतरे को कम करने में मदद करता है। ज्वार में कैल्शियम, ज़िंक , फॉस्फोरस, कॉपर, पोटेशियम और बी विटामिन भरपूर मात्रा में पाया जाता है।
  • मसाला ओट्स – मसाला ओट्स बनाने के लिए सबसे पहले एक कप ओट्स को 1/4 कप मूंगफली के दानो के साथ 3-4 मिनट भून लें। अब इसे एक प्लेट में निकालकर रख लें। एक पैन में 2 चम्मच तेल डालें फिर इसमें करी पत्ता , जीरा , कटा हुआ प्याज, हरी मिर्च डाल कर , प्याज गोल्डन होने तक अच्छे से चलाएं। अब इसमें भुना हुआ ओट्स और मूंगफली को मिलाएं और स्वादानुसार नमक मिला लें । अब इसमें आधे कप से कम पानी मिलाएं और थोड़ा थिक होने तक चलाएं। 10 मिनट के बाद इसमें हरा धनिया और थोड़ा सा निम्बू का रस डालकर गर्म गर्म सर्व करें।
  • मूंग दाल टिक्की – इसके लिए हमें जरुरत होगी – डेढ़ कप भीगी हुई हरी मूंग + हरा प्याज कटा हुआ एक कप + 2 बड़े चम्मच बेसन या ओट्स का आटा + एक या दो हरी मिर्च + लहसुन + अदरक बारीक कटा हुआ + एक चम्मच तेल + नमक मिर्च स्वादानुसार. सबसे पहले भीगी हुई हरी मूंग को मिक्सर में बिना पानी मिलाये हल्का दरदरा पीस लेंगे। अब इस पेस्ट को एक बड़े बाउल में लेकर उसमे कटा हुआ हरा प्याज यानी स्प्रिंग अनियन , कटी हुई हरी मिर्च , लहसुन , अदरक , बेसन, नमक मिर्च मिला लेंगे। अब इस मिक्सचर के मध्यम आकर की टिक्की बनाकर इसे रख लेंगे। अब इन टिक्की को तवे पर हल्का सा तेल लगाकर रखेंगे और उसे हल्का गोल्डन होने तक सेंक देंगे। इसी तरह दूसरी तरफ भी सेंक देंगे। अब इन टिक्की को आप किसी भी ग्रीन चटनी के साथ सर्व कर सकते हैं।
  • ज्वार मूली का पराठा – ज्वार मूली पराठा , डाइबिटीज़ में बिना किसी संकोच के आप ले सकते हैं। इसे बनाने के लिए ज्वार का आटा , किसी हुई मूली , धनिया पत्ती, हरी मिर्च ,हल्दी पाउडर और अदरक-लहसुन का पेस्ट , जीरा , गर्म मसाला , नमक , दही की जरूरत होगी। सबसे पहले मूली को धोकर छीलकर उसे किस लें यानि ग्रेट कर लें। फिर इसमें 2 कप ज्वार का आटा और सभी इंग्रेडिएंट्स को मिलाकर एक आटा तैयार कर लेंगेऔर फिर पराठा बना लेंगे।
  • मिक्स दाल पराठा – इसे बनाने के लिए चने और मूंग की दाल को रात भर भिगो कर रख लें। भीगी हुई दोनों दालों को अच्छे से वाश करके , पानी निकाल कर, दालों को एक बाउल में रख लेंगे। अब एक पैन में बिना तेल डाले , बेसन को भून लें। फिर इसमें हल्दी, धनिया पाउडर , जीरा , नमक डाल कर दाल को मिलाएं। इसे 5 मिनट के लिए भूने। अब नार्मल आटे की लोई बनाए और दाल की फिलिंग भर कर पराठा बना लें। अब इस पराठे को दही या चटनी के साथ सर्व करें।
  • हरी मटर का पराठा – इसे बनाने के लिए एक कप हरी मटर के दानो को उबाल कर ठंडा करके छान कर रखलें अब इसे बिना पानी मिलाये मिक्सर में पीस कर स्मूथ पेस्ट बनालें। अब इस पेस्ट में एक कप आटा , एक चम्मच दही , बारीक कटी हरी मिर्च , जीरा , गरम मसाला , हींग ,नमक स्वादानुसार मिलालें। अब इन सबको मिक्स करके आटा तैयार करलें। इस आटे के पराठे बनालें। इन पराठों को आप चटनी , सॉस , अचार के साथ ले सकते हैं।

इस प्रकार आप इन चीज़ों को मिक्स मैच करके और भी कई डिशेस तैयार कर सकते हैं और कई और हरी पत्तेदार सब्जियों का प्रयोग करके इसे और भी ज्यादा पौष्टिक बना सकते हैं।

What to eat in diabetes

Green Leafy vegetables.

Whole grains.

low fat.

Flaxseeds , nuts, beans

what are the early signs and symptoms of diabetes ?

Frequent urination, Increased thirst, Feeling very tired, Blurry vision, Slow healing of cuts and wounds.

What should diabetics eat for breakfast?

whole wheat, oats , green peas, beans, cereals, sorghum, graan leafy vegetables.

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5 Good Luck Plants

प्लांट्स घर के माहौल को तो खुशनुमा बनाते ही हैं साथ ही हमारे घर की हवा को भी प्यूरीफाय करते हैं। पौधों का घर में होना काफी तरह से हमारे हैल्थ और वेल्थ दोनों को ही बढ़ाता है। काफी सारे रिसर्च और स्टडीज से भी यह पता चलता है की घर या ऑफिस में प्लांट्स होने से घर या उस जगह पर रहने वालों पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ये प्लांट्स काम के तनाव और थकान को कम करने की क्षमता रखते हैं। फेंगशुई के अनुसार ऐसे कई प्लांट्स होते हैं जो घर में पॉजिटिविटी यानी सकारात्मकता को बढ़ाते हैं और घर के सदस्यों की कामयाबी को बढ़ाते हैं।

कहा जाता है की पैसे पेड़ों पर नहीं उगते हैं। लेकिन कुछ प्लांट्स सच में ऐसे होते हैं जो पैसे और अच्छी किस्मत ला सकते है। फेंगशुई के अनुसार यह प्लांट्स आपके घर और ऑफिस में गुड लक को लाते हैं। ऐसे ही कुछ प्लांट्स के बारे में हम बात करेंगे , जो गुड लक और खुशहाली को आकर्षित करते हैं।

Jade Plant – यह पौधा सफलता और समृद्धि के द्वार के रूप में जाना जाता है। फेंगशुई के अनुसार जेड की तुलना एक मैग्नेट से भी की जा सकती है क्योंकि यह धन को आकर्षित करता है और कई बार अप्रत्याशित सफलता भी दिलाता है।

मनी प्लांट – फेंग शुई के अनुसार कंप्यूटर, टीवी या वाईफाई राउटर के पास एक प्लांट जरूर रखना चाहिए। किसी कोने या शार्प एंगल पर यह प्लांट रखने से चिंता और तनाव कम होता है। यह वाद विवाद और नींद संबंधी परेशानियों से बचने में भी मदद करता है।

लकी बैंबू / बाँस, वास्तव में ड्रेकेना फॅमिली का सदस्य है। लकी बैम्बू दरअसल बाँस नहीं है , क्योंकि यह बाँस जैसा दिखता है इसलिए इसे बैम्बू कहा जाता है। लकी बैंबू प्लांट पॉजिटिव एनर्जी को आकर्षित करता है जो कि अच्छी सेहत, शांति, सुख, समृद्धि, दीर्घायु और सौभाग्य लाने के लिए जाना जाता है। इसीलिए इसे गिफ्ट के रूप में दिया जाता है।

मनी ट्री – ऐसा माना जाता है की लकी ट्री में फेंग शुई के पांच मुख्य तत्वों का प्रतिनिधित्व करने के लिए पत्ते होते हैं; पृथ्वी, धातु, जल, अग्नि और लकड़ी। मनी ट्री को आमतौर पर उन जगहों पर रखा जाता है जहाँ पैसे रखे जाते हैं या जहाँ पैसे की ज़रूरत होती है। और जहाँ भी पौधे को रखा जाता है, धन और समृद्धि उसकी ओर बहती है।

स्नैक प्लांट यानी सेंसेविरिया मूल रूप से अफ्रीका का प्लांट है। इसके कई आकार प्रकार के कारण इसके कई नाम हैं जैसे साप का पौधा , सास की जीभ आदि। नासा के एयर स्टडी में यह पाया गया की यह पौधा बेंजीन, फॉर्मलाडिहाइड, ट्राइक्लोरोइथिलीन, ज़ाइलीन और टोल्यूनि को हटाकर इनडोर एयर क़्वालिटी में सुधार करने में काफी प्रभावी है। फेंगशुई के अनुसार इसे सौभाग्य लाने के लिए जाना जाता है।